विजय प्राप्ति या सत्ता प्राप्ति के लिए गठबंधन आवश्यक होता है - डां मनोज मोहन शास्त्री
श्रीमदभागवत कथा का चौथा दिवस
राम तुम बढ़े दयालु हो, श्याम तुम बढ़े ही कृपालु हो - डां मनोज मोहन शास्त्री
जिस पर परमात्मा की कृपा नहीं होती उनकी जिंदगी बेकार होती है
विजय प्राप्ति या सत्ता प्राप्ति के लिए गठबंधन आवश्यक होता है - डां मनोज मोहन शास्त्री
इंदौर। भगवान श्री राम का जन्म त्रेतायुग में, अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र के रूप में, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि (रामनवमी) को, पुनर्वसु नक्षत्र और कर्क लग्न में हुआ। भगवान विष्णु का सातवां अवतार है। असुरों के अंत और धरती पर धर्म की पुनर्स्थापना के लिए माता की कोख से हुआ।
इसके पूर्व प्रसिद्ध कथा वाचक आचार्य "*डॉ. मनोज मोहन जी शास्त्री* वांमन अवतार, कछप् अवतार गज मोक्ष, समुद्र मंथन वृतांत सुनाया।
प्रसिद्ध कथा वाचक आचार्य "*डॉ. मनोज मोहन जी शास्त्री* ने कहा राजा दशरथ को कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने ऋषि वशिष्ठ की सलाह पर ऋषि श्रृंगी से 'पुत्रकामेष्टि यज्ञ की समाप्ति पर, अग्निदेव ने प्रकट होकर राजा दशरथ को एक दिव्य खीर (प्रसाद) प्रदान की, जिसे दशरथ ने अपनी तीनों रानियों—कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा में बांट दिया।
प्रसाद ग्रहण करने के बाद, चैत्र शुक्ल नवमी के दिन कौशल्या ने राम को, कैकेयी ने भरत को, और सुमित्रा ने लक्ष्मण व शत्रुघ्न को जन्म हुआ।
जन्म के समय माता कौशल्या ने प्रभु के दिव्य चतुर्भुज रूप (चार भुजाओं वाले रूप) के दर्शन किए, जिसमें वे शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए हुए थे।
भगवान का जन्म उस समय हुआ जब पांच ग्रह अपनी उच्च राशि में थे, जो एक अत्यंत शुभ योग था।
भगवान राम के जन्म के साथ ही, देवता प्रसन्न होकर आकाश से पुष्प वर्षा करने लगे और अयोध्या में उत्सव मनाया गया।
आज श्रीमद्भागवत के चतुर्थ दिवस में मुख्य यजमान नंद किशोर पिपलावा, श्रीमती पुष्पा खंडेलवाल, विजय पांडेय,अध्यक्ष खांडल समाज म प्र, मनिषा जोशी, विशाल जोशी, सोनाली शर्मा, केदार शर्मा, मंगिलाल, गोदावरी, श्याम सुंदर,दामोदर प्रसाद, महेश शर्मा, ने किया।
श्री कृष्ण जन्मोत्सव भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण का जन्मोत्सव है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि 12 बजे मथुरा में कारागार में हुआ ।
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि मथुरा के कारागार में माता देवकी और वसुदेव के आठवें पुत्र के रूप में जन्म हुआ। देवताओं ने आकाश से फूल बरसाए। पुरे बृह्मं जय करे लगने लगे। सभी देवता झूमने लगे। कारागृह के दरवाजे खुल गए। वासेदेव ने भगवान् श्री कृष्ण को सूपडे में लिटकार यमुना नदी जी को पार किया। गौकुल में माता यशोदा के बगल में भगवान् को लिटा दिया। ओर कन्या को लेकर मथुरा में वापस कारागृह में आ गए। कारागृह के दरवाजे बंद हो गए।
गोकुल में नंदबाबा और यशोदा मैया के घर बड़ा उतस्व का माहौल हों गया। गोकुल वासियों ने गोकुल में नंदबाबा और यशोदा मैया को बधाई देने वालों भीड़ लग गई।
भगवान् श्री कृष्ण जन्म उत्सव बढ़े धूम धाम से मनाया गया। व्यास पीठ से मीठाई, खिलौने, फल फ्रूट एवं ड्राई फ्रूट का वितरण किया गया।
शाम को आरती में राजेश गर्ग अग्रसेन सोशल ग्रुप, शिव जिंदल कृष्ण राव पागरे, पदमा पगारे, संजय गोयल, ओमप्रकाश अग्रवाल , राधेश्याम अग्रवाल चुरी वाले आदित्य गोयल, इन्द्रर सिंह ठाकुर, बजरंग, नरेश अग्रवाल ने श्रीमद् भागवत कथा की आरती में भाग लिया। श्रीमद्भागवत के बाद, माखन मिश्री, पंजेरी का प्रसाद भक्तों को का वितरण किया गया।
प्रसिद्ध कथा वाचक आचार्य "*डॉ. मनोज मोहन जी शास्त्री*, वृंदावन के मुखार बिंद से *श्रीमदभागवत कथा का भव्य आयोजन* *श्री खजराना गणेश मंदिर, सत्संग हाल*, इंदौर में हो रही हैं। *श्रीमद्भागवत कथा में प्रसंग* 11 अप्रेल - *श्रीकृष्ण बाललीलाएँ एवं गिरिराज पूजन,12 अप्रेल - *महारास एवं रुक्मिणी विवाह13 अप्रेल - को श्री शुकदेव विदाई एवं व्यास पूजन* होगा।


