विश्व पर्यावरण दिवस पर आईआईए इंदौर सेंटर ने आयोजित की पर्यावरण जागरूकता एवं एआई कार्यशाला* 

विश्व पर्यावरण दिवस पर आईआईए इंदौर सेंटर ने आयोजित की पर्यावरण जागरूकता एवं एआई कार्यशाला* 

*विश्व पर्यावरण दिवस पर आईआईए इंदौर सेंटर ने आयोजित की पर्यावरण जागरूकता एवं एआई कार्यशाला* 

इंदौर, । विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स (IIA), इंदौर सेंटर द्वारा आयोजित कार्यशाला “फ्यूचर बाय डिज़ाइन: द थर्ड आई – बियॉन्ड बाउंड्रीज़” का सफल आयोजन किया गया। तीन घंटे के इस विशेष कार्यक्रम में शहर के आर्किटेक्ट्स, डिज़ाइनर्स एवं कंस्ट्रक्शन प्रोफेशनल्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की नई संभावनाओं पर चर्चा की।

आईआईए इंदौर सेंटर के *अध्यक्ष आर्किटेक्ट नितिन घुले* ने कहा कि यह आयोजन पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी नवाचार के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। 

कार्यक्रम की संयोजक एवं आईआईए इंदौर सेंटर की *सचिव आर्किटेक्ट स्नेहल सोनटक्के* ने बताया कि कार्यशाला का संचालन *आर्किटेक्ट सोमाली सिन्हा* द्वारा किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों को एआई के व्यावहारिक उपयोग, डिज़ाइन एवं कंस्ट्रक्शन उद्योग में इसके बढ़ते प्रभाव तथा भविष्य की संभावनाओं से परिचित कराया। कार्यशाला में एआई आधारित डिज़ाइन टूल्स, प्रेज़ेंटेशन तकनीक, कंटेंट क्रिएशन, विज़ुअलाइज़ेशन और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों को विस्तार से समझाया गया।

आर्किटेक्ट सोमाली सिन्हा ने प्रतिभागियों को एआई के मूलभूत सिद्धांतों से अवगत कराते हुए बताया कि एआई को “थर्ड आई” के रूप में देखा जा सकता है, जो रचनात्मकता, कार्यक्षमता और निर्णय क्षमता को नई दिशा प्रदान करता है। प्रतिभागियों ने विभिन्न एआई टूल्स के लाइव डेमो भी देखे तथा विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के समाधान प्राप्त किए।

विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में प्रतिभागियों को देशी पौधों के सीड बॉल्स भी भेंट किए गए, जिससे पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी सहभागिता को प्रोत्साहित किया जा सके।

आईआईए इंदौर सेंटर के *कोषाध्यक्ष आर्किटेक्ट अर्पित काबरा* ने इस पहल को आर्किटेक्ट्स में पर्यावरणीय संवेदनशीलता, नवाचार और तकनीकी उत्कृष्टता को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।

कार्यक्रम के दौरान *आर्किटेक्ट कपिल जैन* द्वारा निर्मित लघु फिल्म *“युगांधर”* का भी प्रदर्शन किया गया। फिल्म में विकास और प्रकृति के बीच संतुलन की आवश्यकता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया तथा यह संदेश दिया गया कि सृजनकर्ता अपनी क्षमताओं का उपयोग समाज और प्रकृति के हित में करें।

कार्यशाला का समापन प्रतिभागियों, आयोजकों एवं वक्ताओं के बीच सार्थक संवाद तथा भविष्य में एआई के जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग के संकल्प के साथ हुआ। इस आयोजन ने न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई, बल्कि आर्किटेक्चर एवं डिज़ाइन क्षेत्र में एआई की बढ़ती भूमिका को लेकर प्रतिभागियों को नई प्रेरणा और दृष्टिकोण भी प्रदान किया।