मध्य प्रदेश टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन (एमपीटीसीए) द्वारा अनुमानित कराधान योजना एवं आयकर रिटर्न की सही रिपोर्टिंग विषय पर एक विशेष सेमिनार का आयोजन
मध्य प्रदेश टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन (एमपीटीसीए) द्वारा अनुमानित कराधान योजना एवं आयकर रिटर्न की सही रिपोर्टिंग विषय पर एक विशेष सेमिनार का आयोजन
इंदौर। मध्य प्रदेश टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन (एमपीटीसीए) द्वारा अनुमानित कराधान योजना (Presumptive Taxation Scheme) एवं आयकर रिटर्न की सही रिपोर्टिंग विषय पर एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, टैक्स कंसल्टेंट्स, अधिवक्ताओं, व्यापारियों एवं करदाताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
कार्यक्रम के स्वागत भाषण में इंदौर जोन के चेयरमैन सीए एस.एन. गोयल ने कहा कि सोशल मीडिया एवं विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अनुमानित कराधान योजना को लेकर अनेक भ्रामक जानकारियां प्रसारित की जा रही हैं, जिसके कारण कई करदाता गलत तरीके से आयकर रिटर्न दाखिल कर रहे हैं।
एमपीटीसीए के राष्ट्रीय अध्यक्ष सीए एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सुमित नीमा ने बताया कि गलत रिटर्न दाखिल करने पर करदाताओं को आयकर विभाग की जांच, नोटिस, ब्याज एवं पेनल्टी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि नए आयकर रिटर्न फॉर्म में व्यापारिक लेनदेन वाले बैंक खातों का 31 मार्च का क्लोजिंग बैलेंस बताना अनिवार्य किया गया है, इसलिए सही एवं तथ्यात्मक जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है।
सेमिनार को संबोधित करते हुए सीए कीर्ति जोशी ने बताया कि छोटे व्यापारियों एवं पेशेवरों के लिए अनुमानित कराधान योजना एक महत्वपूर्ण सुविधा है, लेकिन इसके नियमों की सही समझ होना आवश्यक है। उन्होंने व्यापारियों एवं प्रोफेशनल्स के लिए उपलब्ध टर्नओवर एवं प्राप्तियों की सीमा तथा न्यूनतम लाभ घोषित करने के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी।
मुख्य वक्ता अजमेर से पधारे सीए अंकित सोमानी ने अनुमानित कराधान योजना से जुड़े व्यवहारिक एवं जटिल मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि 2 करोड़ रुपये तक के व्यापार या 24 लाख रुपये तक की प्रोफेशनल आय पर कोई आयकर नहीं देना पड़ता, जबकि यह पूरी तरह सही नहीं है। उन्होंने बताया कि अनुमानित कराधान योजना में निर्धारित लाभ प्रतिशत केवल न्यूनतम सीमा है। यदि किसी करदाता की वास्तविक आय इससे अधिक है, तो उसे वास्तविक आय ही घोषित करनी होगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कमीशन या दलाली से आय अर्जित वाले करदाता धारा 44AD के अंतर्गत अनुमानित कराधान योजना का लाभ नहीं ले सकते। ऐसे करदाताओं को नियमित लेखा-पुस्तकें रखना अनिवार्य होता है तथा वे अपनी आय अनुमानित आधार पर घोषित नहीं कर सकते।
उन्होंने धारा 44AD एवं 44ADA की पात्रता, एफ एंड ओ एवं इंट्राडे ट्रेडिंग पर अनुमानित कराधान की वैधता, ऑडिट की आवश्यकता, बैंक खातों में जमा राशि की व्याख्या, जीएसटी एवं आयकर टर्नओवर के अंतर, पांच वर्षीय लॉक-इन नियम तथा विभागीय जांच से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी मार्गदर्शन दिया।
सोमानी ने कहा कि अनुमानित कराधान योजना अपनाने का अर्थ यह नहीं है कि करदाता विभागीय जांच या स्क्रूटिनी से पूरी तरह मुक्त हो जाता है। यदि बैंक खातों, जीएसटी रिटर्न, टीडीएस विवरण एवं आयकर रिटर्न में किसी प्रकार की असंगति पाई जाती है, तो विभाग आवश्यक जांच कर सकता है।
धन्यवाद अभिभाषण सीए डॉ अभय शर्मा ने दिया।
कार्यक्रम में सीए चर्चिल जैन, सीए आनंद जैन, सीए पी डी नागर, सीए शैलेंद्र पोरवाल सीए जी बी अग्रवाल, आर एस गोयल, सहित बड़ी संख्या में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, टैक्स कंसल्टेंट्स, अधिवक्ता, व्यापारी एवं करदाता उपस्थित रहे।


