कान्ह-सरस्वती नदी पुनर्जीवन महाअभियान का शुभारंभ, जनसहभागिता से नदी बचाने का लिया संकल्प

कान्ह-सरस्वती नदी पुनर्जीवन महाअभियान का शुभारंभ, जनसहभागिता से नदी बचाने का लिया संकल्प

*कान्ह-सरस्वती नदी पुनर्जीवन महाअभियान का शुभारंभ, जनसहभागिता से नदी बचाने का लिया संकल्प*

इंदौर, । विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कृष्णपुरा छत्री घाट पर अभ्यास मंडल एवं कान्ह-सरस्वती नदी पुनर्जीवन अभियान समिति के तत्वावधान में कान्ह-सरस्वती नदी पुनर्जीवन महाअभियान का शुभारंभ उत्साह एवं जनसहभागिता के साथ किया गया। कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, युवाओं, महिला मंडलों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता करते हुए नदी संरक्षण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ नदी पुनर्जीवन के संकल्प के साथ हुआ। इस अवसर पर रामेश्वर गुप्ता ने अभियान के प्रतिज्ञा-पत्र का वाचन करते हुए उपस्थित नागरिकों से नदी, जलस्रोतों एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। वहीं डॉ. ओ.पी. जोशी ने सभी उपस्थितजनों को पर्यावरण एवं नदी संरक्षण की शपथ दिलाई।
कार्यक्रम में आगामी समय मे आयोजित होने वाली गतिविधियों एवं जनजागरण कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी देते हुए डॉ. मालासिंह ठाकुर ने बताया कि यह अभियान केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज की सहभागिता से नदी को पुनर्जीवित करने का दीर्घकालिक जनआंदोलन है। उन्होंने नागरिकों से अभियान से जुड़कर नदी, जल एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में योगदान देने का आग्रह किया।
कार्यक्रम की प्रस्तावना एवं संचालन डॉ. स्वप्निल व्यास ने किया। उन्होंने कहा कि किसी भी नदी का अस्तित्व केवल जलधारा तक सीमित नहीं होता, बल्कि उससे क्षेत्र की संस्कृति, जैव विविधता, अर्थव्यवस्था और भविष्य जुड़ा होता है। कान्ह-सरस्वती नदी का पुनर्जीवन आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार बनेगा।
अभियान को अपना वैचारिक समर्थन देते हुए गौतम कोठारी,,मुकेश चौहान, वैशाली खरे, शंकर गर्ग, दिलीप वघेला, श्यामसुंदर यादव, सुधीन्द्र मोहन शर्मा, अरविन्द तिवारी एवं मुकेश तिवारी,संदीप खनवीलकर ने अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि नदी संरक्षण केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। समाज की सक्रिय भागीदारी, जनजागरण और सतत प्रयासों से ही कान्ह-सरस्वती नदी को पुनः जीवन दिया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित नागरिकों ने मानव श्रृंखला बनाकर तथा हस्ताक्षर अभियान में भाग लेकर नदी पुनर्जीवन के समर्थन में अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। पूरे आयोजन में "नदी बचेगी तो जीवन बचेगा" तथा "जल बचाओ, नदी बचाओ, भविष्य बचाओ" के संदेश गूंजते रहे।
अंत में सभी उपस्थितजनों ने कान्ह-सरस्वती नदी को स्वच्छ, अविरल एवं जीवंत बनाने के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण एवं जनसहभागिता के संदेश के साथ हुआ।
"कान्ह-सरस्वती नदी का पुनर्जीवन केवल पर्यावरण का प्रश्न नहीं, बल्कि इंदौर के भविष्य, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के जीवन का प्रश्न है।" – यह संदेश पूरे आयोजन का केंद्र बिंदु रहा।
इस अवसर पर  अशोक गोलाने , शरद कटारिया ,   मुकेश तिवारी, संजय त्रिपाठी,ओ पी श्रीवास्तव,  मनीष भालेराव,  आशा तिवारी मनमोहन शर्मा, दिवाकर घायल, सुनील बेनवंशी ,ग्रीष्म त्रिवेदी, अजेयसिंह सेंगर  आदि उपस्थित थे