क्षमता, योग्यता और दक्षता निर्माण पर दिया विस्तृत मार्गदर्शन

क्षमता, योग्यता और दक्षता निर्माण पर दिया विस्तृत मार्गदर्शन

रेनेसां यूनिवर्सिटी में ‘थ्राइव 1.0’ के पहले दिन डॉ. आर. एल. भाटिया का प्रेरक सत्र

· क्षमता, योग्यता और दक्षता निर्माण पर दिया विस्तृत मार्गदर्शन

इंदौर। रेनेसां यूनिवर्सिटी में आयोजित दो दिवसीय मैनेजमेंट कॉन्क्लेव ‘थ्राइव 1.0’ का प्रथम दिवस उत्साह, ऊर्जा और प्रेरणा से ओत-प्रोत रहा। विश्वविद्यालय परिसर में सुबह से ही छात्रों, फैकल्टी, एलुमनाइ और फ्रेंड्स ऑफ रेनेसां का उत्साह देखने योग्य था। पहले दिन के मुख्य वक्ता रहे देश के सुप्रसिद्ध चेंज मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट और आईआईएम अहमदाबाद के एलुमनस डॉ. आर. एल. भाटिया, जिन्होंने युवाओं को क्षमता, नेतृत्व और आधुनिक प्रबंधन की गहन समझ प्रदान की।

डॉ. भाटिया ने अपने तीन घंटे लंबे सत्र की शुरुआत एक विशेष शॉर्ट फिल्म और स्लाइड शो से की, जिसमें उन्होंने क्षमता निर्माण, निरंतर सीख, और व्यक्तिगत विकास के आयामों को सरल, रचनात्मक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने छात्रों को अपनी लिखी पुस्तकें भेंट कीं और चॉकलेट देते हुए एक सहज, आत्मीय और सहभागितापूर्ण वातावरण बनाया। इससे पूरा सत्र इंटरैक्टिव संवाद, प्रेरक अनुभवों और सीख से भर गया।

युवाओं को यह समझाते हुए प्रेरित किया कि किसी भी व्यक्ति के विकास की नींव उसकी विशिष्टता, उसकी यूनिकनेस को पहचानने में है। उन्होंने कहा कि अपने कौशल, स्वभाव और क्षमताओं की वास्तविक पहचान करने वाला व्यक्ति न केवल अपने जीवन को दिशा देता है, बल्कि समाज और वैश्विक स्तर पर भी सार्थक योगदान देने में सक्षम होता है।

डॉ. भाटिया ने छात्रों को उत्साहित करने के लिए प्रेरक कथनों और जीवन-आधारित उदाहरणों का उपयोग किया। उन्होंने कहा, “जो व्यक्ति हतोत्साहित हो जाता है, उसका उत्साह बनाए रखना नेतृत्वकर्ता की जिम्मेदारी है; मनुष्य कोई मशीन का पुर्जा नहीं है, उसकी संवेदनाएँ होती हैं।” उन्होंने अपने पूरे सत्र में मानवीय संवेदनाओं, प्रेरणा, सकारात्मक सोच और भावनात्मक संतुलन को प्रबंधन का अनिवार्य हिस्सा बताया।

अपने व्याख्यान में उन्होंने आधुनिक मैनेजमेंट की महत्वपूर्ण विधियों, एडवांस प्लानिंग, पावर डिस्ट्रीब्यूशन और टीम्स कंसेप्ट की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने समझाया कि कैसे छोटे-छोटे क्षेत्रों में जिम्मेदारियाँ बांटकर मजबूत नेतृत्व विकसित किया जा सकता है और कैसे हर सदस्य का योगदान संगठन को सशक्त बनाता है।

छात्रों को प्रेरित करते हुए उन्होंने टीम वर्क का महत्व विशेष रूप से समझाया। उन्होंने कहा कि “हम सभी अपूर्णांक हैं, मिलकर पूर्णांक बनते हैं। कोई भी व्यक्ति दूसरे से अधिक महत्वपूर्ण नहीं है; जब हम एक साथ आते हैं तो संगठन मजबूत बनता है।” उनके अनुसार, सहभागिता, सहयोग और उच्च विचारों का वास्तविक व्यवहार केवल भाषणों में नहीं, बल्कि जीवन में लागू होना चाहिए।

पर्यावरण संरक्षण पर बात करते हुए उन्होंने सस्टेनेबिलिटी और रीसाइक्लिंग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति के लिए कुछ अवश्य करना चाहिए, पेड़ लगाना, संसाधनों का संरक्षण करना और पानी की बचत की आदत विकसित करना। उन्होंने दैनिक जीवन की छोटी-छोटी बातों जैसे मेहमानों को आवश्यकता के अनुसार पानी परोसना और अनावश्यक उपयोग रोकने को भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम बताया।

युवाओं से उन्होंने आग्रह किया कि वे आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, वास्तविक जीवन में सक्रियता और सोशल मीडिया का रचनात्मक उपयोग अपनी आदत बनाएं। उन्होंने ओवरथिंकिंग से बचने, निरंतर सीखने, नई भाषाएँ अपनाने और कृष्ण-राम जैसे महान आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उनका मुख्य मंत्र था, “फोकस पर फोकस करें, खुद को रोज़ बेहतर बनाते रहें।”

सत्र से पूर्व चांसलर सीए स्वप्निल कोठारी ने डॉ. भाटिया का स्वागत तुलसी का पौधा और स्मृति-चिह्न भेंट कर किया। श्री कोठारी ने कहा कि वर्तमान समय पूर्णतः प्रतिस्पर्धा का समय है, और इसमें वही व्यक्ति आगे बढ़ सकता है जो लगातार खुद को अपडेट करता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी विचार, उत्पाद या सेवा को बाजार में उतारने से पहले बाजार की ज़रूरतों, रिसर्च और ट्रेंड्स को समझना आवश्यक है। उनका संदेश था कि एआई टूल्स का उपयोग आज की मांग है, लेकिन इनके साथ अपनी बुद्धिमत्ता, विवेक और निर्णय क्षमता का संतुलित उपयोग ही वास्तविक पेशेवर मजबूती प्रदान करता है।

इस प्रेरक और ज्ञानवर्धक सत्र में विश्वविद्यालय के मैनेजमेंट विभाग, फैकल्टी, एलुमनाइ और लगभग 1000 छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। छात्रों ने इसे अपने करियर, व्यक्तित्व विकास और वास्तविक जीवन प्रबंधन कौशल के लिए बेहद मूल्यवान सत्र बताया।