सिल्क पर त्योहारों की रंगत और करवा चौथ की परंपरा*

सिल्क पर त्योहारों की रंगत और करवा चौथ की परंपरा*

इंदौर, इंदौर का बास्केटबॉल कॉम्प्लेक्स ग्राउंड इस समय रेशमी रंगों से सजा हुआ है। यहाँ 3 से 8 अक्टूबर तक नेशनल सिल्क एग्ज़ीबिशन का आयोजन किया जा रहा है।करवा चौथ और दीपावली के त्यौहार को देखते हुए सिल्क कलाकारों ने अपने वस्त्रो पर त्योहारों के रंग और परंपरा से जुड़ी डिजाइन भी उकेरी हैं ।

 प्रदर्शनी का उद्घाटन हेल्थ फिटनेस एक्सपर्ट वर्तिका चौधरी ने फीता काटकर किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में आगंतुक मौजूद रहे। करवा चौथ और दीपावली के त्यौहार को देखते हुए सिल्क कलाकारों ने अपने वस्त्रो पर त्योहारों के रंग और परंपरा से जुड़ी डिजाइनर भी उकेरी हैं । देश के कोने–कोने से आए बुनकर और कलाकार अपनी विशिष्ट कला और परंपरागत हैंडलूम संग्रह के साथ यहां पहुंचे हैं। 

 प्रदर्शनी में कश्मीर की पश्मीना साड़ियाँ, बनारस की कतान और किमखाब, छत्तीसगढ़ की बैंबू सिल्क, आंध्रप्रदेश की गदवाल और कलमकारी, कोलकाता की कांथा वर्क, पंजाब की आरी–जरी कढ़ाई और जयपुर का रेडीमेड वेडिंग कलेक्शन खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। आगंतुकों को एक ही छत के नीचे भारत की विविध रेशमी परंपराओं की झलक देखने को मिल रही है।

यहाँ प्रदर्शित हर साड़ी अपनी अलग विशेषता लिए हुए है। कश्मीर की महीन पश्मीना साड़ियाँ अपनी गर्माहट और नफासत के लिए चर्चित हैं, वहीं छत्तीसगढ़ की बैंबू सिल्क हल्की और हर मौसम में आरामदायक मानी जाती है। कोलकाता का कांथा वर्क महीनों की मेहनत से तैयार होता है और आंध्रप्रदेश की कलमकारी व पटोला साड़ियाँ प्राकृतिक रंगों और हाथ की पेंटिंग का जादू बिखेर रही हैं। बनारसी जरी वर्क साड़ियों की शान बढ़ा रहा है और जयपुर का वेडिंग कलेक्शन भी महिलाओं का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

आयोजक जयेश गुप्ता ने बताया कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य पारंपरिक बुनाई और हस्तशिल्प को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से स्थानीय लोगों को देशभर की समृद्ध रेशमी परंपराओं से रूबरू होने का अवसर मिलेगा और बुनकरों को भी अपने हुनर को बड़े स्तर पर पेश करने का मंच मिलेगा।