जैन रामायण में श्रीराम अहिंसक, धर्मशील और आदर्श पुरुष*
*जैन रामायण को आज हर जैनत्व को पढ़ने की आवश्यकता : धैर्यप्रभाजी*
*जैन रामायण में श्रीराम अहिंसक, धर्मशील और आदर्श पुरुष*
इंदौर। जैन रामायण अनकही और अनसुनी गौरव गाथा है । जैन कहलाने वालों लोगों को यह रामायण जरूर सुननी चाहिए और अपना जीवन श्रीराम की भांति धर्मशील बनाना चाहिए। जैन समाज के लिए जैन रामायण अनुपम और अनुकरणीय है।
ये प्रेरक प्रसंग धर्म शेरनी महासती श्री धैर्यप्रभाजी मसा ने अपने चातुर्मासिक प्रवचन में पोरवाल भवन जंगमपुरा की धर्म सभा में व्यक्त किए।
आपने कहा कि जैन रामायण में अलग-अलग अध्याय में अलग-अलग वर्णन मिलता है। भगवान श्रीराम को धर्मशील और मोक्ष का अधिकारी बताया गया है। वे धर्म को सर्वोपरि मानने वाले और अहिंसक हैं। जबकि जैन रामायण में लक्ष्मण रावण का वध करते हैं। लक्ष्मण की मृत्यु के बाद भगवान श्रीराम जैन भागवती दीक्षा लेकर मोक्ष में जाते हैं। जैन परम्परा में भगवान श्रीराम को एक आदर्श व धर्मनिष्ठ पुरुष माना गया है।
संघ अध्यक्ष विनोद जैन एवं मंत्री कमल जैन ने बताया कि महासती धैर्यप्रभाजी मसा द्वारा अपने मुखारविंद से 12 सितंबर से जैन रामायण का सुंदर वर्णन किया गया, जिसका 16 दिनों तक सरल भाषा में वाचन महासतीजी द्वारा किया गया। इस जैन रामायण को सुनने के बाद समाजजनों को रामायण की महिमा का सही ज्ञान प्राप्त हो गया।



