सनातन धर्म से जुड़ने और उसे समृद्ध बनाने में ही संभव होगी हमारे जीवन की धन्यता – स्वामी चिदम्बरानंद

सनातन धर्म से जुड़ने और उसे समृद्ध बनाने में ही संभव होगी हमारे जीवन की धन्यता – स्वामी चिदम्बरानंद

,
सनातन धर्म से जुड़ने और उसे समृद्ध बनाने में ही संभव
होगी हमारे जीवन की धन्यता – स्वामी चिदम्बरानंद


बिजासन रोड स्थित अखंड धाम आश्रम पर चल रहे अ.भा. संत सम्मेलन में नगरीय प्रशासन मंत्री विजयवर्गीय एवं सांसद बाल योगी उमेशनाथ भी पहुंचे

इंदौर । दुर्लभ मनुष्य जीवन की धन्यता सत्य सनातन धर्म से जुड़ने और उसे समृद्ध बनाने में ही संभव होगी। हमारी श्रद्धा अखंड, अटूट और समर्पित होना चाहिए। आज भारत दुनिया में जिन ऊँचाइयों को छू रहा है, उसका श्रेय हमारे यशस्वी नेतृत्व के साथ ही देश के संत समाज को भी जाता है। विडम्बना यह है कि कुछ राजनीतिक दल तो हमारे प्रभु श्रीराम के अस्तित्व को ही नकार रहे थे लेकिन देश के जनमानस ने ऐसे दलों को उनकी सही जगह पहुंचा दिया। कुछ दलों ने तो रामसेतु को भी काल्पनिक बता दिया था लेकिन सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की यही विशेषता है कि वह हमेशा सत्य का समर्थन करती है। अब वक्त आ गया है जब हम हमारी सनातन संस्कृति को समृद्ध और सुदृढ़ बनाने के लिए एकजुट होकर काम करें अन्यथा हमारी आने वाली पीढ़ी हमें माफ़ नहीं करेगी। संत सम्मेलन जैसे आयोजन भारतीय समाज में संस्कारों का रोपण कर देश को विश्व गुरु का गौरव दिलाने में मददगार साबित होंगे।
ये प्रेरक विचार हैं मुंबई से आए महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती के जो उन्होंने शनिवार को बिजासन रोड स्थित अविनाशी अखंड धाम आश्रम पर 58वें अ.भा. अखंड वेदांत संत सम्मेलन में व्यक्त किए। इस अवसर पर राज्य के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और राजसभा सांसद बाल योगी बाबा उमेशनाथ भी विशेष रूप से संत सम्मेलन में शामिल हुए और देश भर से आए सभी संत विद्वानों का स्वागत-सम्मान कर उनके शुभाशीष भी प्राप्त किए।
आश्रम के महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी चेतन स्वरुप की अध्यक्षता में प्रारंभ हुए इस सम्मेलन में हरिद्वार-वृन्दावन के महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश्वरानंद, रतलाम से आए महामंडलेश्वर स्वामी देवस्वरूप, डाकोर से आए स्वामी देवकीनंदन दास, अयोध्या से आई 10 वर्षीय बालिका आहुति शुक्ला, सारंगपुर से साध्वी आदित्य चेतना गिरि, उज्जैन से आए स्वामी परमानन्द, चौबारा जागीर के स्वामी नारायणानंद, संत राजानंद एवं अन्य संत विद्वानों ने भी विभिन्न ज्वलंत विषयों पर अपने ओजस्वी विचार व्यक्त किए। प्रारंभ में आयोजन समिति की ओर से अध्यक्ष हरि अग्रवाल, अशोक गोयल, दीपक जैन टीनू, भावेश दवे, रणधीर दग्धी, डॉ. चेतन सेठिया, परीक्षित पंवार, पार्षद निरंजन सिंह चौहान गुड्डू, पार्षद बरखा-नितिन मालू, अशोक चौहान चांदू, गगन यादव, महेंद्र विजयवर्गीय, राजेंद्र सोनी, मुरलीधर धामानी, शिवम कछवाहा, राहुल शर्मा, विनय जैन, वासुदेव चावला आदि ने सभी संतों एवं मेहमानों का स्वागत किया। मंच का संचालन हरि अग्रवाल एवं स्वामी नारायणानंद ने किया। महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. चेतन स्वरुप ने स्वागत उद्बोधन दिया। संध्या को समापन सत्र में हुई आरती में गीता भवन ट्रस्ट के मंत्री रामविलास राठी, राजेश कुंजीलाल गोयल, नवनीत शुक्ला सहित सैकड़ों भक्तो ने भाग लिया। इस अवसर पर आश्रम की ओर से नगरीय प्रशासन मंत्री विजयवर्गीय एवं सांसद बाल योगी उमेशनाथ का सम्मान भी किया गया।
किसने क्या कहा – सांसद एवं बाल योगी बाबा उमेशनाथ ने कहा कि वेदांत संत सम्मेलन का आयोजन हमारी नयी पीढ़ी को मार्गदर्शन प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने और समरसता के माध्यम से एक नए समाज का निर्माण करने की प्रेरणा देता है। अखंड धाम आश्रम पर होने वाला यह संत सम्मेलन केवल संत समाज ही नहीं बल्कि समग्र समाज को नयी चेतना प्रदान करेगा। डाकोर से आए स्वामी देवकीनंदन दास ने कहा कि वेदांत का चिंतन मनुष्य को सकारात्मक सोच और विचार प्रदान करता है। जहाँ वेदनाओं का अंत संभव है, वही वेदांत सबसे ज्यादा सार्थक होगा। साध्वी आदित्य चेतन गिरि ने कहा कि हमारी श्रद्धा में ईश्वर के प्रति समर्पण का भाव होना चाहिए। वेदांत स्वयं का पता ढूंढने और स्वयं को खोजने की व्यवस्था है। वेदांत हमे विचारों के प्रति नया नजरिया प्रदान करता है। मुंबई से आए महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से हुई संतों की मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश का सौभाग्य है कि हमें एक दबंग और यशस्वी नेतृत्व मिला है जिन्होंने पूरे विश्व में भारत माता के नाम को ऊँचा उठाया है। वे ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो संतों का आशीर्वाद लेने के लिए पहले अपनी चरण पादुका उतारते हैं और फिर पैर छूते है। यह उनके संस्कारों का परिणाम है कि वे संत समाज को पूरा सम्मान देते हैं।वृंदावन से आए स्वामी जगदीशानंद ने कहा कि संतों और ऋषि मुनियों ने हमेशा समाज का मार्गदर्शन ही किया है। कलयुग में आज यदि समाज में नैतिक मूल्य स्थापित हैं तो उसका श्रेय बहुत हद तक संत समाज को भी दिया जाना चाहिए।
संत सम्मेलन में विशेष रूप से आए राज्य के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जहाँ संत के चरण पड़ते हैं, वह भूमि स्वर्ग हो जाती है। मैंने बचपन में अपने नंदा नगर स्थित घर से गीता भवन और अखंड धाम आश्रम तक पैडल आकर संतो के प्रवचन सुने हैं। अखंड धाम बहुत प्राचीन आश्रम है और यह तपस्वी संतों की कर्म स्थली रही है। इतने बरसों से चल रहे संत सम्मेलन में यहाँ अनेक तपस्वी और तपोनिष्ठ संतों के चरण पड़े हैं इसलिए यह स्थान एक सिद्ध और पवित्र स्थान बन गया है। संतों की वाणी जब हमारे कानो तक पहुँचती है तो उसकी पहुँच गुलेल से छोड़े गए वचनों की तरह बहुत तेज और प्रेरक होती है जो हमारे मन मष्तिष्क तक पहुँचती है और जीवन की दिशा बदल जाती है। इंदौर में आए हुए इस सभी संतों विद्वानों का स्वागत और सम्मान कर हम सब अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
            *आज के कार्यक्रम*-अखंड धाम पर चल रहे 58वें अ.भा. अखंड वेदांत संत सम्मेलन के चौथे दिन 7 दिसंबर को मुंबई से आए महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती के सानिध्य और आश्रम के महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी चेतन स्वरूप की अध्यक्षता में दोपहर 3 बजे से हरिद्वार-वृंदावन से आए महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश्वरानंद, रतलाम से आए महामंडलेश्वर स्वामी देवस्वरूप, डाकोर से आए स्वामी देवकीनंदन दास, चौबारा जागीर के स्वामी नारायणानंद, सारंगपुर की साध्वी आदित्य चेतना गिरि, उज्जैन के स्वामी परमानंद, संत राजानंद एवं अन्य संत विद्वानों के प्रवचनों की अमृत वर्षा होगी।