सहारा योजना : बेसहारो का सहारा है इंदौर का एमवाय हास्पिटल*

सहारा योजना : बेसहारो का सहारा है इंदौर का एमवाय हास्पिटल*

*सहारा योजना : बेसहारो का सहारा है इंदौर का एमवाय हास्पिटल* l

*3 हजार बेसहारा-लावारिस मरीजों का इलाज*

*400 लावारिस मरीजों का घर ढूंढकर किया परिवार के हवाले किया* 

हर साल 300 से ज्यादा बेसहारा मरीजों का इलाज करता है सहारा वार्ड*

इंदौर, मध्य प्रदेश के सबसे बड़े हॉस्पिटल में स्थित एक मात्र ऐसा वार्ड जिसमें ऐसे मरीज जिनका इस दुनिया में या तो कोई नहीं या जिनके अपनों ने उन्हें सड़कों, बस स्टॉप, रेलवे स्टेशन आदि पर तड़पता छोड़ गए पीड़ित मानव का उपचार किया जाता है। सहारा वार्ड ऐसे कई बेबस लोगों के जीवन का सहारा बन चुका है।

लावारिस , बेसहारा मरीजों का इलाज करने और फिर इन अज्ञात मरीजों के घरों का पता तलाशकर उन्हें परिजनों तक पहुंचाने के लिए इंदौर के एमवाय हॉस्पिटल ने सहारा वार्ड बनाकर शहर, प्रदेश सहित सारे देश में एक अलग ही पहचान बना ली है। 

एमवाय हास्पिटल ने साल 2016 में लावारिस, बेसहारा, लाचार लोगों के लायक सहारा वार्ड की स्थापना की थी। यह सहारा वार्ड देश का एक ऐसा इकलौता वार्ड है, जो पिछले नौ सालों में 3000 अज्ञात मरीजों का इलाज करने और इनमें से अब तक 400 बेसहारा मरीजों को स्वस्थ होने के बाद उनके परिजनों को तलाशकर उनके घर पहुंचा चुका है। उनमें नेपाल, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश, कोलकाता, तमिलनाडु , राजस्थान, उत्तरप्रदेश के अलावा मध्यप्रदेश के रतलाम, देवास, उज्जैन के मरीज शामिल है।

गंभीर रूप से बीमार पडऩे, दुर्घटना में घायल या अपंग हो जाने पर जिन मरीजों की उनके घर-परिवार सहित खून के रिश्तों और संबंधियों ने खबर तक नहीं ली, ऐसे बेसहारा मरीजों को एमवाय हॉस्पिटल सहारा वार्ड में भर्ती करके न सिर्फ उनका सारा इलाज किया, बल्कि उनके सगे, परिजनों से ज्यादा उनके दूध, चाय-नाश्ते से लेकर दोनों समय भोजन करवाने जिम्मेदारी भी निभाने में कोई संकोच नहीं किया । इतना ही नहीं, उन बेसहारों को अपनों की कमी महसूस न हो, इसके लिए उनके साथ परिजनों की तरह हर त्योहार भी मनाते हैं।

एमवाय हास्पिटल ने साल 2016 में इसकी शुरुआत 6 बेड से हुई थी, आज यहां पर 30 से ज्यादा बेड हैं। तब से अब तक लगभग 3000 लावारिस अज्ञात मरीजों का इलाज किया जा चुका है। वर्तमान में यहां लगभग 18 बेसहारा मरीजों का इलाज जारी है। जिसमे पुरुष अधिक और महिला मरीज कम भर्ती हैं। ज्यादातर मरीज 50 साल से ऊपर के है। 

सहारा वार्ड के स्टाफ सीमा, शिल्पा, अनिता, विनीत, एल्विन, वादिनी प्रधान आदि लोग ही इन मरीजों का परिवार है। पूरा स्टाफ सभी मरीजों के दैनिक कार्य से ले कर उनकी दवाई, उनके पुनर्वास का कार्य करता है।

*मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ अरविंद घंघोरिया ने कहा* इस सहारा वार्ड में अकसर ऐसे ही पीडित, शहर की एम्बुलेंस, सामाजिक संस्थाओं, वृद्धाश्रमों द्वारा यहां पहुंचाए जाते हैं। कई को उनके परिजन ही ढूंढते हुए आ जाते हैं । सहारा वार्ड में मरीजों को परिवार की तरह स्नेह मिलता है और यहां सभी त्योहार हर्ष उल्लास के साथ मनाए जाते हैं।

*घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी निभा रहे*

जब मरीज बिलकुल स्वस्थ हो जाता है तो इसके बाद उसके परिजनों और घर का पता लगाने के लिए टीम वर्क शुरू होता है। इस टीम में एंबुलेंस चालक जो उन्हें लेकर आते हैं, पुलिस प्रशासन , इंदौर सहित बाहर की अन्य सामाजिक संस्थाएं,ऑटो रिक्शा चालक और मीडियाकर्मी शामिल हैं। यह पूरी टीम आपस में समन्वय बनाकर अज्ञात मरीज से मिली जानकारी एक-दूसरे से शेयर करते हुए कड़ी से कड़ी मिलाकर उसके फोटो के जरिए मरीज के परिजनों की जानकारी और घर का पता मालूम कर उन्हें वापस घर भेज देते हैं।

इनमें से जिनका परिवार वापस मिल जाता है वो चले जाते है बाकि अधिकांश मरीज स्वस्थ होने के बाद सामाजिक संस्थाओं द्वारा संचालित वृद्धाश्रम में ही जीवन गुजारते हैं। जब तक इन्हें इनके अपने या कोई सहारा नहीं मिल जाता, तब तक सहारा वार्ड और इस वार्ड से जुड़ी अन्य संस्थाएं, एम्बुलेंस चालक ही इनका परिवार बन जाते हैं। 

*मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ अरविंद घंघोरिया ने कहा* 

हमारे लिए यह मरीज परिजन की तरह हैं और इन मरीजों के लिए हम, हमारी टीम ही परिवार हैं। सारी टीम इन मरीजों की मदर टेरेसा की तरह देखभाल करती है। हम चाहते है कि हर गरीब मरीजो का अच्छे से अच्छा हरसंभव इलाज हो सके ऐवम सरकार द्वारा जनहित एवं जन कल्याणकारी योजनाओं एवं सुविधाओं को बेहतर सुचारू रूप से कार्यवाहित कर एवं सरल बना सके ताकि हर किसी को इलाज मिल सके ।