संस्कारवान समाज ही समृद्ध राष्ट्र का निर्माण करेगा, संस्कारों के विघटन वाला आगे नहीं बढ़ सकता -भागवताचार्य ऋषभदेव
संस्कारवान समाज ही समृद्ध राष्ट्र का निर्माण करेगा, संस्कारों के विघटन वाला आगे नहीं बढ़ सकता -भागवताचार्य ऋषभदेव
इंदौर। हम सब सौभाग्यशाली हैं कि हमें दुर्लभ मनुष्य के रूप में भारत भूमि पर जन्म मिला है। हमारे पिछले जन्मों के कर्मों की पुण्याई का फल है मानव जन्म मिलना। याद रखें कि जिस परिवार, समाज और राष्ट्र में संस्कारों का विघटन होता है, वह समाज कभी आगे नहीं बढ़ सकता। संस्कारवान समाज ही एक समृद्ध राष्ट्र का निर्माण करेगा। भागवत जैसे धर्म ग्रंथ समाज को चैतन्य एवं ऊर्जावान बनाते हैं।
कथा शुभारंभ के पूर्व श्रीमती पूनम संजय मिश्रा के साथ पं. गोविंद शर्मा, अनिरुद्ध शर्मा, पं.राजेंद्र रामावत पिंटू शर्मा, मातृ शक्ति की और से मोनिका शर्मा, मोनिका दुबे, पायल शर्मा, डिंपल शर्मा आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया। संयोजक पं. संजय मिश्रा ने बताया कि राजेंद्र नगर एवं आसपास की कॉलोनियों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा श्रवण का पुण्य लाभ ले रहे हैं।
राजेंद्र नगर जवाहर सभागृह में आयोजित भागवत ज्ञान यज्ञ में संबोधित करते भागवताचार्य ऋषभदेव ने कहा कि भक्ति मनुष्य का सर्वश्रेष्ठ गुण है। भक्त कभी विभक्त नहीं हो सकता। भक्ति में लगन, निष्ठा और समर्पण का भाव जरूरी है। दिखावे की भक्ति स्वयं को धोखा देने जैसी होती है। भगवान तो अंतर्यामी है, उनसे कोई बात छुपी नहीं रह सकती । इस सृष्टि में परमात्मा की सत्ता ही सर्वोपरि है। परमात्मा का ऐश्वर्य ही सबसे सुंदर होता है। हम भक्ति के नाम पर प्रदर्शन करेंगे तो वह ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकता। भारत तो भक्तों की ही भूमि है।



