पाकिस्तान की ‘कूटनीतिक नाकेबंदी’: भारतीय डिप्लोमैट्स को गैस, पानी और अख़बार से वंचित किया
पाकिस्तान की ‘कूटनीतिक नाकेबंदी’: भारतीय डिप्लोमैट्स को गैस, पानी और अख़बार से वंचित किया
पाकिस्तान की ‘कूटनीतिक नाकेबंदी’: भारतीय डिप्लोमैट्स को गैस, पानी और अख़बार से वंचित किया
इस्लामाबाद | 12 अगस्त 2025
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक नए स्तर पर पहुंच गया है। इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों और उनके परिवारों को लक्षित करते हुए पाकिस्तान ने अचानक गैस, मिनरल वॉटर और अख़बार की सप्लाई रोक दी है। सूत्रों के मुताबिक,
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गैस सप्लाई: सरकारी गैस कंपनी ने उच्चायोग और राजनयिक आवासों में पाइप्ड गैस बंद कर दी। साथ ही, स्थानीय विक्रेताओं को आदेश दिए गए कि वे भारतीय राजनयिकों को गैस सिलेंडर न बेचें।
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मिनरल वॉटर: नियमित पानी सप्लायर को उच्चायोग में डिलीवरी से रोका गया। अन्य वेंडर्स को भी पानी बेचने से मना किया गया।
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न्यूज़पेपर: अख़बारों की डिलीवरी को पूरी तरह रोक दिया गया—न केवल उच्चायोग, बल्कि राजनयिकों के घरों तक भी कोई समाचार पत्र नहीं पहुँच रहा।
राजनयिक शिष्टाचार का उल्लंघन
यह कदम न केवल वियना कन्वेंशन 1961 के अनुच्छेद 25 का उल्लंघन माना जा रहा है, बल्कि इसे “Petty Retaliation” यानी छोटी लेकिन जानबूझकर की गई प्रतिशोधी कार्रवाई बताया जा रहा है।
राजनयिक हलकों में इसे हालिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और इंडस वॉटर ट्रीटी से जुड़े विवाद के बाद पाकिस्तान की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
भारत के लिए चिंता का विषय....
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बुनियादी सुविधाओं की आपूर्ति रोकना किसी भी राजनयिक मिशन के लिए सीधे तौर पर कामकाज में बाधा डालना है।
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इस्लामाबाद में पीने का पानी पहले से ही असुरक्षित माना जाता है; ऐसे में मिनरल वॉटर रोकना स्वास्थ्य के लिए भी जोखिमपूर्ण है।
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गैस और अख़बार की रोक से न केवल रोज़मर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि सूचना और संचार पर भी असर पड़ रहा है।
भारत की संभावित प्रतिक्रिया
सूत्रों के मुताबिक, भारत भी पाकिस्तानी उच्चायोग के खिलाफ समान कदम उठाने पर विचार कर रहा है। संभावित कार्रवाइयों में शामिल हैं—
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पाकिस्तानी राजनयिकों को समाचार पत्रों की आपूर्ति रोकना
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स्थानीय वेंडर्स पर प्रतिबंध
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कड़ी कूटनीतिक आपत्ति दर्ज कराना
यह घटनाक्रम दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच संबंध अब केवल सैन्य और राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दैनिक राजनयिक जीवन पर सीधा असर डालने वाली ‘माइक्रो लेवल’ प्रतिरोधी रणनीतियों का भी सहारा लिया जा रहा है। इस तरह की कार्रवाई अल्पकाल में पाकिस्तान के लिए संतोषजनक लग सकती है, लेकिन दीर्घकाल में यह उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुँचा सकती है।
पाकिस्तान की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि दक्षिण एशिया में कूटनीतिक तनाव सिर्फ बयानों या वार्ताओं तक सीमित नहीं, बल्कि अब यह “मिशन-लेवल इन्फ्रास्ट्रक्चर वॉर” का रूप ले रहा है। आने वाले दिनों में भारत की प्रतिक्रिया तय करेगी कि यह विवाद किस दिशा में बढ़ेगा।


