जीवन में सत्य की प्राण प्रतिष्ठा का मार्ग प्रशस्त करती है भागवत कथा-स्वामी प्रणवानंद
इंदौर। भागवत हमारे जीवन में सत्य की प्राण प्रतिष्ठा करने का मार्ग प्रशस्त करती है। भारतीय धर्म और सनातन संस्कृति को समृद्ध बनाने वाला कोई अग्रणी ग्रंथ है तो उसका नाम श्रीमद् भागवत के सिवाय कुछ और नहीं हो सकता। भागवत जैसे कालजयी ग्रंथ की अमृत वर्षा देश के जन-जन में आस्था, श्रद्धा और भक्ति का निर्झर प्रवाहमान बनाए हुए हैं। जन्म- जन्मांतर के भाग्योदय और पुण्योदय का फल है भागवत कथा श्रवण का अवसर मिलना।
गीता भवन परिसर में भागवतजी एवं कथा व्यास आचार्यश्री की शोभायात्रा निकाली गई। व्यासपीठ का पूजन गीता भवन के अध्यक्ष राम ऐरन, मंत्री रामविलास राठी, मनोहर बाहेती, श्रीमती कमल राठीआदि ने किया।
स्वामी प्रणवानंद ने कहा कि भागवत विश्व का एकमात्र ऐसा ग्रंथ है, जिसे हजारों बार पढ़ा और सुना जा सकता है फिर भी नित्य नूतन अनुभूति होती है। भागवत को कल्पवृक्ष और महासागर भी कहा गया है, जिसमें जितना गहरा उतरेंगे, उतने मूल्यवान खजाने मिलेंगे जो जीवन को सद्गुणों श्रृंगारित करते हैं।


