*एसजीएसआईटीएस, इंदौर में 25वां प्रो. डी. जी. धवलीकर स्मृति व्याख्यान एवं स्वर्ण पदक समारोह आयोजित

*एसजीएसआईटीएस, इंदौर में 25वां प्रो. डी. जी. धवलीकर स्मृति व्याख्यान एवं स्वर्ण पदक समारोह आयोजित

*एसजीएसआईटीएस, इंदौर में 25वां प्रो. डी. जी. धवलीकर स्मृति व्याख्यान एवं स्वर्ण पदक समारोह आयोजित*

इंदौर। श्री जी. एस. इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS), इंदौर में  25वां प्रो. डी. जी. धवलीकर स्मृति व्याख्यान एवं स्वर्ण पदक पुरस्कार समारोह सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन एसोसिएशन ऑफ स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स (ASE), इंदौर तथा अन्य प्रतिष्ठित संस्थाओं—इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), एसोसिएशन ऑफ कंसल्टिंग सिविल इंजीनियर्स, इंडियन जियोटेक्निकल सोसाइटी एवं इंडियन सोसाइटी ऑफ स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स—के संयुक्त सहयोग से किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ इंजी. एच. आई. मेहता, अध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स (ASE), इंदौर के स्वागत उद्बोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने संस्था की गतिविधियों एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। तत्पश्चात इंजी. डी. एस. परिहार, माननीय सचिव, ASE, इंदौर द्वारा स्मृति व्याख्यान की पृष्ठभूमि एवं स्व. प्रो. डी. जी. धवलीकर के महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख किया गया।

स्व. प्रो. डी. जी. धवलीकर, जिनकी स्मृति में यह व्याख्यान आयोजित किया जाता है, SGSITS के पूर्व निदेशक एवं इस एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य थे। उनका योगदान आज भी इंजीनियरिंग समुदाय को प्रेरित करता है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में Prof. T. G. Sitharam (पूर्व अध्यक्ष AICTE एवं पूर्व निदेशक IIT गुवाहाटी) उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में Er. Mahavir Bidasaria तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता Prof. Neetesh Purohit, निदेशक SGSITS द्वारा की गई।

 प्रो. सीताराम द्वारा “अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के भू-तकनीकी एवं भू-भौतिकीय अन्वेषण तथा नींव डिजाइन” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। उन्होंने लगभग 1000 वर्ष की आयु हेतु निर्मित इस मंदिर के निर्माण में आई चुनौतियों—कमजोर जलोढ़ मिट्टी, 12 मिमी की सीमित अवतलन सीमा एवं विस्तृत भू-तकनीकी जांच—पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने 12–14 मीटर गहरी खुदाई, रोलर कम्पैक्टेड कंक्रीट (RCC) द्वारा इंजीनियर्ड फिल तथा राफ्ट फाउंडेशन के अभिनव समाधान का वर्णन किया, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित हुई। निर्माण में पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के साथ आधुनिक तकनीकों, कठोर गुणवत्ता नियंत्रण एवं उन्नत मॉनिटरिंग का सफल उपयोग किया गया। वास्तविक अवतलन लगभग 4.7 मिमी पाया गया, जो अनुमेय सीमा से काफी कम है।

कार्यक्रम में स्वर्ण पदक पुरस्कार समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें उत्कृष्ट उपलब्धियों का सम्मान किया गया। साथ ही स्व. प्रो. धवलीकर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम का संचालन इंजीनियर संजय जैन द्वारा अत्यंत प्रभावी एवं गरिमामय ढंग से किया गया।अंत में आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।