-सुनीति का मतलब नीति से,अनुशासन से चले वह सुनीति

-सुनीति का मतलब नीति से,अनुशासन से चले वह सुनीति

श्रीमदभागवत कथा का तृतीय दिवस

-सुनीति का मतलब नीति से,अनुशासन से चले वह सुनीति 

-नारद वह जो संसार में भटके हुए लोगों को परमात्मा से मिलादें

भगवान सदा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं - डां मनोज मोहन शास्त्री   

               

  इंदौर। भक्त प्रह्लाद और भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार श्रद्धा से मनाते है ।

भगवान नृसिंह का अवतार अधर्म पर धर्म की जीत और अटूट भक्ति का प्रतीक है। भगवान नृसिंह ने अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए खंभा फाड़कर नरसिंह ने आधा सिंह रूप में अवतार लेकर अहंकारी हिरण्यकशिपु का वध किया । 

आज कथा में शिव पुराण का महत्व बताया गया। सुनीति का मतलब नीति, अनुशासन से चले वह सुनीति। हैं। ध्रुव ने देवश्री नारद से कहा आप नारद जी नहीं है। नारद वह जो संसार में भटके हुए लोगों को परमात्मा से मिलादें। फिर नारद जी ने भगवान के लिए बीज मंत्र ओम नमो भगवते वासुदेवाय दिया। ध्रुव ने ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र से परमातम्मा की प्राप्ति

 की। 

आज श्रीमद्भागवत के तृतीय दिवस में मुख्य यजमान नंद किशोर पिपलावा, श्रीमती पुष्पा खंडेलवाल, विजय पांडेय,अध्यक्ष खांडल समाज म प्र, रामदास जी गोयल , संजय गोयल मनिषा जोशी, विशाल जोशी, सोनाली शर्मा, केदार शर्मा, अलका खंडेलवाल, अर्चना खंडेलवाल ,दिवाकर बिरथरे, मंगिलाल, गोदावरी, श्याम सुंदर,दामोदर प्रसाद, महेश शर्मा, सत्यनारायण मंगिलाल शर्मा ने किया। 

 दैत्यराज हिरण्यकशिपु का पुत्र होने के बाद भी प्रह्लाद भगवान विष्णु के परमभक्त थे। हिरण्यकशिपु ने विष्णु भक्त होने के कारण अपने ही पुत्र प्रह्लाद को मारने के अनेक प्रयास किए। पहाड़ से फेंक दिया, विष दिया । हिरण्यकशिपु ने बहन होलिका को प्रह्लाद गोद में बिठाने का आदेश दिया। 

होलिका को अग्नि में न जला पाने के कारण, उनकी बुआ होलिका जिसे अग्नि से न जलने का वरदान था जलकर राख हो गई। पर भगवान विष्णु कृपा से प्रह्लाद बच गए।

हिरण्यकशिपु को ब्रह्मा जी से वरदान था कि मनुष्य, पशु, दिन - रात, अस्त्र शस्त्र नहीं मर सकता था। 

हिरण्यकशिपु ने भगवान पर सवाल उठाया, तब भगवान विष्णु नृसिंह रूप में खंभे से प्रकट हुए। भगवान नृसिंह ने संध्या के समय, घर की देहरी पर, अपने नाखूनों से हिरण्यकशिपु का वध कर दिया। 

प्रसिद्ध कथा वाचक आचार्य "*डॉ. मनोज मोहन जी शास्त्री*, वृंदावन के मुखार बिंद से *श्रीमदभागवत कथा का भव्य आयोजन*स्थान :- *श्री खजराना गणेश मंदिर, सत्संग हाल*, इंदौर में हो रहा हैं। 

 *श्रीमद्भागवत कथा में प्रसंग* 10 अप्रेल - *श्रीकृष्ण जन्मोत्सव*,11 अप्रेल - *श्रीकृष्ण बाललीलाएँ एवं गिरिराज पूजन,12 अप्रेल - *महारास एवं रुक्मिणी विवाह13 अप्रेल - को श्री शुकदेव विदाई एवं व्यास पूजन* होगा।

 श्रीमद्भागवत जी की सैकडो लोगों ने आरती उतारी। अंत में भक्तों को प्रसाद का वितरण किया गया।