केयर हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों की चेतावनी, गोल्डन ऑवर में इलाज से बच सकती हैं अनगिनत ज़िंदगियां
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा दिवस
केयर हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों की चेतावनी, गोल्डन ऑवर में इलाज से बच सकती हैं अनगिनत ज़िंदगियां
केयर हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों ने युवाओं में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर जताई चिंता, सुरक्षित ड्राइविंग की अपील
इंदौर, : राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा दिवस के अवसर पर केयर हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों ने सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता जताई है। डॉक्टरों का कहना है कि भारत में सड़क हादसे आज भी ऐसी मौतों और लंबे समय तक रहने वाली अपंगता के बड़े कारण हैं, जिन्हें सही सावधानियों से रोका जा सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं के कारण रोज़ाना इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की संख्या का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं हादसों से जुड़ा होता है। इनमें से ज़्यादातर पीड़ित 18 से 40 वर्ष की उम्र के युवा होते हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि इन दुर्घटनाओं में होने वाली कई गंभीर चोटें ज़िम्मेदारी से ड्राइविंग और ट्रैफिक नियमों का सख़्ती से पालन करके रोकी जा सकती हैं।
डॉक्टरों ने विशेष रूप से इस बात पर ज़ोर दिया कि सड़क हादसे के बाद गोल्डन ऑवर, यानी पहले 60 मिनट बेहद निर्णायक होते हैं। यदि इस अवधि में घायल व्यक्ति को ट्रॉमा सुविधाओं से लैस अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। समय पर और सही चिकित्सकीय इलाज न सिर्फ़ मृत्यु के जोखिम को कम करता है, बल्कि गंभीर जटिलताओं से बचाते हुए मरीज के बेहतर और तेज़ स्वस्थ होने में भी अहम भूमिका निभाता है।
डॉ. निखिलेश जैन, सीनियर कंसल्टेंट – इमरजेंसी एवं ट्रॉमा केयर, केयर हॉस्पिटल्स ने कहा- “सड़क दुर्घटनाएं समय के लिहाज़ से बेहद संवेदनशील आपात स्थितियां होती हैं। हमारे पास अक्सर गंभीर सिर की चोट, अंदरूनी रक्तस्राव और मल्टीपल ट्रॉमा से जूझते मरीज आते हैं। रेस्क्यू में देरी, घायल को गलत तरीके से संभालना और गोल्डन ऑवर के भीतर अस्पताल न पहुंच पाना, इलाज के नतीजों को और खराब कर देता है। हेलमेट और सीट बेल्ट पहनना, तेज़ रफ्तार से बचना और नशे की हालत में वाहन न चलाना जैसे छोटे लेकिन ज़रूरी कदम अनगिनत ज़िंदगियां बचा सकते हैं।”
सड़क दुर्घटनाएं आज भी जटिल फ्रैक्चर, रीढ़ की हड्डी की गंभीर चोटों और स्थायी अपंगता का एक बड़ा कारण बनी हुई हैं। इसका बोझ न सिर्फ़ शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक और आर्थिक रूप से भी मरीजों और उनके परिवारों पर भारी पड़ता है। डॉ. प्रवीण अग्रवाल, कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक सर्जन, केयर हॉस्पिटल्स ने कहा, “कई सड़क हादसा पीड़ितों को एक से ज़्यादा सर्जरी करानी पड़ती है और लंबे समय तक रिहैबिलिटेशन की ज़रूरत होती है। कई मामलों में चोटें जीवनभर चलने वाली चलने-फिरने की दिक्कतों में बदल जाती हैं। ट्रैफिक नियमों का पालन करना और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करना चोटों की गंभीरता और लंबे समय की जटिलताओं को काफ़ी हद तक कम कर सकता है।”
केयर हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों ने सड़क हादसों के बाद सही फर्स्ट रिस्पॉन्स और घायलों को सुरक्षित तरीके से अस्पताल पहुंचाने के महत्व पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने सलाह दी कि दुर्घटना पीड़ितों को बिना ज़रूरत हिलाया-डुलाया नहीं जाना चाहिए, खासकर तब जब सिर, गर्दन या रीढ़ की हड्डी में चोट की आशंका हो। यदि किसी कारणवश घायल को स्थानांतरित करना अनिवार्य हो, तो उसे स्थिर अवस्था में रखा जाए, सीधा लिटाया जाए और सिर व गर्दन को सही सहारा दिया जाए। तुरंत आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि एंबुलेंस में प्रशिक्षित पैरामेडिक्स और जीवनरक्षक उपकरण उपलब्ध होते हैं। अधिक रक्तस्राव की स्थिति में साफ़ कपड़े से दबाव डालकर खून रोकने की कोशिश करनी चाहिए और घायल को खाना या पानी नहीं देना चाहिए। साथ ही, हेलमेट को अचानक नहीं हटाना चाहिए, जब तक कि सांस लेने में रुकावट न हो।
कटे हुए या शरीर के किसी हिस्से के अलग हो जाने से जुड़े हादसों में डॉक्टरों ने सबसे पहले खून को रोकने की सलाह दी। उनका कहना है कि अलग हुआ हिस्सा साफ़ कपड़े या स्टरल गॉज़ में लपेटकर किसी साफ़ और वॉटरप्रूफ थैली में रखा जाना चाहिए। इसके बाद उसे ठंडा रखने के लिए आइस पैक का इस्तेमाल किया जाए, लेकिन बर्फ़ या पानी को सीधे संपर्क में नहीं लाना चाहिए। डॉक्टरों ने ज़ोर देकर कहा कि घायल व्यक्ति और अलग हुए शरीर के हिस्से—दोनों को बिना देरी किए ट्रॉमा सुविधाओं से लैस अस्पताल तक साथ में पहुंचाना चाहिए, क्योंकि समय पर इलाज मिलने से कई मामलों में उस हिस्से को बचाने की सर्जरी संभव हो सकती है।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा दिवस के संदेश के तहत केयर हॉस्पिटल्स ने आम लोगों से की है अपील
• हमेशा हेलमेट और सीट बेल्ट पहनें
• तेज़ रफ्तार से वाहन न चलाएं और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करें
• शराब या किसी नशे की हालत में कभी वाहन न चलाएं
• बच्चों के लिए उम्र के अनुसार उचित सेफ्टी बेल्ट और सीट का इस्तेमाल सुनिश्चित करें
• किसी भी सड़क हादसे की स्थिति में तुरंत आपातकालीन सेवाओं को कॉल करें
केयर हॉस्पिटल्स ने बताया कि उनके यहां अत्याधुनिक इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर सेवाएं उपलब्ध हैं। ये सेवाएं मल्टीडिसिप्लिनरी टीम द्वारा संचालित की जाती हैं, जिसमें इमरजेंसी डॉक्टर, ऑर्थोपेडिक सर्जन, न्यूरोसर्जन और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ शामिल हैं। इसका उद्देश्य सड़क हादसों के पीड़ितों को समय पर, समन्वित और संपूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा दिवस के अवसर पर केयर हॉस्पिटल्स ने एक बार फिर यह दोहराया कि सड़क सुरक्षा हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। सड़क पर लिया गया एक सतर्क और जिम्मेदार फैसला किसी की जान जाने या जीवनभर की अपंगता से बचा सकता है।
सड़क सुरक्षा सिर्फ़ नियमों का पालन नहीं है—यह ज़िंदगियां बचाने का संकल्प है।



