भूत से शिक्षा लेकर वर्तमान को सुधारना चाहिए

भूत से शिक्षा लेकर वर्तमान को सुधारना चाहिए

भूत से शिक्षा लेकर वर्तमान को सुधारना चाहिए

इंदौरअप्रतिम नाट्य महोत्सव के अंतर्गत , डीएवीवी ऑडिटोरियम में  'हंस वाहिनी कला समूह' द्वारा 'भूत और वर्तमान" नाटक का मंचन किया गया . यह नाटक नारी सशक्तिकरण पर आधारित था। इस नाटक भूत के जरिए , ऐसी महिलाओं की कहानी को मंच पर प्रस्तुत किया गया जो महिलाएं घर में डोमेस्टिक वायलेंस का शिकार होती हैं परंतु फिर भी समाज के डर से ,अपने खानदान की इज्जत के डर से , अपने ऊपर घटित हो रहे अत्याचार को कभी भी किसी को बताती नहीं है।

सीता के किरदार में गरिमा जैन, द्रोपदी के किरदार में वैष्णवी सिंह ने बहुत ही सहज प्रस्तुतियां दी। राशि मालवीय , निर्मल जैन एवं राम मालवीय पुलिस के किरदार में थे।ससुर, आरके शर्मा एवं बेटा राघव शर्मा ने भी अच्छा संदेश दिया। दूसरी पत्नी, निधि वर्मा एवं नंद के किरदार में गीतांजलि सांवरिया थी ।संगीत विजय ओहवाल का था और प्रकाश गीतांजलि सांवरिया का था।

डिंपल अग्रवाल इस नाटक की लेखिका एवं निर्देशिका है और घर में प्रताड़ित स्त्री का किरदार 'लक्ष्मी' भी उन्हीं ने निभाया । 

कहानी .....यह कहानी एक लक्ष्मी नाम की ग्रहणी की है जो कि घर में ही रहकर एक व्हाट्सएप संस्था से जुड़ी है और लेख लिखती है । उसे एक दिन लेख का टॉपिक मिलता है "भूत और वर्तमान". अपने लेख मे पुराणिक स्त्रियों के बारे में लिखती है। जैसे सीता, मंदोदरी ,गांधारी, द्रौपदी। लेख को लिखते लिखते उसे यह एहसास होता है कि वह आज के वर्तमान युग मैं जी रही है। तभी एक फोन कॉल से पता चलता है कि उसके पति ने बाहर एक दूसरा परिवार बसा रखा है। वह पूरी तरह टूट जाती है और वर्तमान काल की महिला बनने का निर्णय लेती है।

 ओम कुमार ने एक ऐसे दुराचारी पति की भूमिका को बड़े ही अच्छे तरीके से निभाया है ।जो अपनी पत्नी को चार दिवारी के अंदर ही रखना पसंद करता है और उसे रोज रात को मारता है और अपनी पत्नी को डरा धमका कर रखता है।