सजल नेत्रों से स्नेहीजनों ने दी दीक्षार्थी विनुषी भंडारी को भावपूर्ण बिदाई
खचाखच भरे सभा गृह में रुंधे गले एवं सजल नेत्रों से स्नेहीजनों ने दी दीक्षार्थी विनुषी भंडारी को भावपूर्ण बिदाई
उद्योग मंत्री चेतन कश्यप के मुख्य आतिथ्य में रवीन्द्र नाट्य गृह में दिक्षार्थी एवं माता-पिता का शॉल, एवं अभिनंदन पत्र भेंटकर सवागत किया गया
इंदौर। जावरा कम्पाउंड में वीरेन्द्र-शीतल भंडारी के निवास से संयम और वैराग्य के पथ पर निकली उनकी उच्च शिक्षित 30 वर्षीय बेटी विनुषी भंडारी का शनिवार को सुबह विशाल वरघोडा निकाला गया, जिसमें वे अपने गृहस्थ जीवन में काम आने वाली वस्तुएं लुटाते हुए चलीं। रवीन्द्र नाट्य गृह तक एक सुसज्जित रजत मंडित रथ पर विराजित विनुषी का मार्ग में अनेक स्थानों पर स्वागत भी किया गया।
साधुमार्गी जैन समता संघ के अध्यक्ष पारस बोहरा एवं महामंत्री पिंकेश पगारिया ने बताया कि जैसे-जैसे बैंड-बाजों और परंपरागत वाद्ययंत्रों की मंगल ध्वनि के बीच यह जुलूस आगे बढ़ता गया, जुलूस में शामिल 2 हजार से अधिक समाजबंधुओं और विनुषी के स्नेहीजनों का उत्साह भी बढ़ता गया। भजनों पर गाते-युवाओं और महिलाओं का यह जत्था करीब 2 घंटे की पैदल यात्रा के बाद रवीन्द्र नाट्य गृह पहुंचा, जहाँ राज्य के कैबिनेट मंत्री चेतन कश्यप के मुख्य आतिथ्य और विधायक श्रीमती मालिनी गौड़ एवं अ.भा. साधुमार्गी जैन समता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्र गांधी, श्वेताम्बर जैन महासंघ के अध्यक्ष विजय मेहता, समाजसेवी महेश नाहटा के विशेष आतिथ्य में विनुषी एवं उनके माता-पिता का शॉल, एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर भव्य अभिनन्दन किया गया। सभा गृह में पहले से मौजूद समाजबंधुओं ने भगवान महावीर स्वामी और जैनाचार्यों तथा मुमुक्षु के जयघोष से समूचे नाट्य गृह को गुंजायमान बनाए रखा।
साधुमार्गी जैन समता संघ के तत्वावधान में आयोजित इस अभिनन्दन समारोह में बड़ी संख्या में देश के विभिन्न शहरों के समाजबंधु भी आए हुए थे। केशरिया दुपट्टे पहने पुरुष और लाल चुनरी में महिलाओं ने दीक्षार्थी के इस जुलूस मार्ग में नारे एवं भक्ति से समाज बंधुओं का उत्साह बढ़ाया। जावरा कम्पाउंड से यह जुलूस एमवाय के सामने से नेहरु प्रतिमा होते हुए टैगोर मार्ग से रवीन्द्र नाट्य गृह पहुंचा जहाँ साधुमार्गी जैन समता संघ सहित शहर के विभिन्न जैन श्रीसंघों तथा अन्य जैन संगठनों की ओर से अभिनन्दन समारोह में आए मेहमानों की आत्मीय अगवानी की गई। इस अवसर पर साधुमार्गी जैन समता संघ की ओर से संघ के संरक्षक सुजानमल वोरा, रतनलाल खिन्दावत, , संतोष कटारिया, हर्ष वोरा, प्रदीप बम्बोरि, अजय चौरड़िया, सुभाष गोखरू, श्रीमती रंजना सूर्या, श्रीमती सुचित्रा काकरेचा, श्रीमती मधु पितलिया, श्रीमती मेघा भलावत, राकेश पोरवाल, अशोक गांधी एवं सजंय भलावत आदि ने दीक्षार्थी के परिजनों के साथ समारोह की विभिन्न व्यवस्थाएं संभाली और अतिथियों का स्वागत किया।
इस मौके पर विनुषी को उनके सभी नजदीकी रिश्तेदारों और स्नेहीजनों ने भावपूर्ण बिदाई दी। श्रीमती रीना आंचलिया (मौसी) एवं श्रीमती राधिका भंडारी (भाभी) ने भी रुंधे गले से अपने भाव व्यक्त किए। समारोह को संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्र गांधी, महेश नाहटा, पारस बोहरा, श्रीमती मालिनी गौड़ एवं विजय मेहता ने भी संबोधित किया और दीक्षार्थी के उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं व्यक्त की। बिदाई का यह दृश्य अत्यंत भावप्रधान बना रहा।
विनुषी भंडारी ने अपने आधे घंटे के धाराप्रवाह उद्बोधन में विस्तार से बताया कि कैसे उन्होंने एक सम्पन्न और समृद्ध परिवार में जन्म लेने के बावजूद संयम और वैराग्य की राह चुनी। उन्होंने कहा कि मुझे आज बहुत हर्ष हो रहा है कि मैं अपनी लक्ज़री और कम्फर्ट लाइफस्टाइल को छोड़कर इस संयम की राह पर निकल रही हूँ। मैंने अपने जीवन में पैराग्लाइडिंग, स्काई डाइविंग, रिवर राफ्टिंग, मॉडलिंग से लेकर टिप टॉप और फैशन में रहना खूब पसंद किया लेकिन अचानक गुरु भक्ति का भाव मुंबई में नाना-नानी के साथ जाकर प.पू. आचार्य प्रवर रामलाल म.सा. एवं उपाध्याय प्रवर राजेश मुनिजी के दर्शन मात्र से ही जागृत हो गया। इसके बाद जीवन में अनेक ऐसे चमत्कार हुए कि जब आचार्य प्रवर इंदौर आए तो समता भवन में उनके दर्शनों का लाभ मिला और 5-7 बार उन्हें पत्र लिखकर जब मैंने पूछा कि मैं ससार और संयम में से किस मार्ग का चयन करूँ, तो गुरुदेव ने कहा कि अपने परिजनों की आज्ञा का हमेशा पालन करना और धेर्य रखना। इस तरह धीरे-धीरे पत्रों के माध्यम से उनसे वैराग्य की आज्ञा मिलने का सिलसिला शुरू हो गया और अंततः परिवार के लोग भी मेरे निर्णय पर राजी हो गए। विनुषी के उद्बोधन के दौरान book पूरा सभागृह पिन ड्राप साइलेंस की तरह शांत चित्त होकर उनकी बातें सुनता रहा। वैराग्य काल में उन्होंने धार्मिक पढ़ाई एवं अनेक शास्त्रों का अध्ययन किया
राज्य के लघु उद्योग मंत्री चेतन कश्यप ने भी अपने उद्बोधन में विनुषी के उद्बोधन का जिक्र करते हुए कहा कि दीक्षा जिन दर्शन की एक महत्वपूर्ण सीढी है। विनुषी ने जो भाव व्यक्त किए हैं वे उनके और उनके माता-पिता के कई जन्मों के पुण्योदय का परिणाम है। जिन शासन में जप, तप, संयम और नियम के जो कठोर प्रावधान बनाए हैं वे मनुष्य के व्यक्तित्व का पूरी तरह विकास करने में सहायक है। उन्होंने साधुमार्गी जैन समता संघ के तत्वावधान में आयोजित इस गरिमामय समारोह की प्रशंसा करते हुए कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मैं इस दीक्षार्थी के अभिनन्दन समारोह का साक्षी बन रहा हूँ। आचार्य प्रवर रामलाल म.सा. के दर्शन मैंने भी किए है और सचमुच उनका व्यक्तित्व इतना विराट है कि हर कोई उनके आभा मंडल का प्रशंसक बन जाता है। समारोह के विशेष अतिथि श्रीमती मालिनी गौड़ ने कहा कि जैन धर्म को मैंने भी बहुत नजदीक से देखा है। साधु साध्वियों की कठिन तपस्या जितनी जैन धर्म में है उतनी कहीं नहीं है। मैंने अपने पति ब्रह्मलीन लखनजी के साथ आचार्य प्रवर के दर्शन किए हैं और आज भी मैं और मेरे पुत्र एकलव्य रात्रि भोजन के त्यागी बने हुए हैं। उन्होंने भी विनुषी के प्रति अपनी सदभावनाएँ व्यक्त की। कार्यक्रम में अ.भा. साधुमार्गी जैन संघ, अ.भा. साधुमार्गी महिला संघ, युवा संघ सहित विभिन्न संगठनों के राष्ट्रीय, आंचलिक एवं स्थानीय पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। विनुषी की दीक्षा का मुख्य महोत्सव गुरुवार 23 अप्रैल को नोखा में होगा।अतिथियों को स्मृति चिह्न चित्रेश मेहता, भरत दुग्गड़ और तेज कुमार तातेड़ ने प्रदान किए ।
समारोह का संचालन ललित दुग्गड व अर्चना छीगावत ने किया


