इंदौर बना कला-संस्कृति का नया केंद्र: 'कलास्तंभ' के 'वर्ल्ड आर्ट डे' उत्सव में दिखा सामुदायिक जुड़ाव का अद्भुत नजारा
इंदौर बना कला-संस्कृति का नया केंद्र: 'कलास्तंभ' के 'वर्ल्ड आर्ट डे' उत्सव में दिखा सामुदायिक जुड़ाव का अद्भुत नजारा
इंदौर: देश के स्वच्छतम शहर के रूप में पहचान बनाने वाला इंदौर अब कला और संस्कृति के एक बड़े केंद्र के रूप में भी उभर रहा है। विश्व कला दिवस के उपलक्ष्य में, 'कलास्तंभ' द्वारा आयोजित दो दिवसीय महोत्सव ने यह सिद्ध कर दिया कि कला केवल दीवारो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव का एक सशक्त माध्यम है।
यूनेस्को और इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ आर्ट द्वारा समर्थित इस आयोजन की थीम “अ गार्डन ऑफ एक्सप्रेशन: कल्टीवेटिंग कम्युनिटी थ्रू आर्ट थी। इस थीम का मूल उद्देश्य कला के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ना और आपसी संवाद को बढ़ावा देना था।
आयोजन की सबसे बड़ी सफलता 'सामुदायिक जुड़ाव' रही। महोत्सव के दौरान आयोजित विभिन्न वर्कशॉप्स में 500 से अधिक लोगों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जो यह दर्शाता है कि आम जनता में कला के प्रति रुचि तेजी से बढ़ रही है। पॉटरी से लेकर मधुबनी पेंटिंग और मून लैंप मेकिंग तक, प्रतिभागियों ने हाथों-हाथ कला का हुनर सीखा।
इस दो दिवसीय आयोजन में जहाँ एक ओर मूर्तिकार विक्रम पंडित द्वारा हनुमान जी की प्रतिमा का लाइव निर्माण आकर्षण का केंद्र रहा, जो भारतीय परंपरा की जीवंतता को दर्शाता था, वहीं दूसरी ओर 'मित्रा एंड ग्रुप' और 'ऋषभ द बैंड' की आधुनिक संगीतमय प्रस्तुतियों ने युवाओं को आकर्षित किया।
मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे अभिनेता क्षितिज पंवार और फैशन डिजाइनर अनुपमा ने कहा कि "इंदौर की यह कलात्मक ऊर्जा न केवल अद्भुत है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर भी कला के प्रति एक सकारात्मक संदेश दे रही है।
फाउंडर सपना कटफर ने कहा, "हमारा मुख्य उद्देश्य कला के माध्यम से सामुदायिक जुड़ाव पैदा करना था। जब लोग एक साथ मिलकर चित्र बनाते हैं या शिल्प सीखते हैं, तो वे एक-दूसरे से जुड़ते हैं, और यही इस आयोजन की असली सफलता है |
डायरेक्टर पुष्कर सोनी ने बताया कि आने वाले समय में वे कला को और अधिक जनसुलभ बनाने के लिए देश भर में ऐसे और भी प्रयास करेंगे। कलास्तंभ ने कलाकारो की कृतियों को ग्लोबल मार्केट में बेचने के लिए अमेजॉन की तरह कला स्तंभ मार्केट प्लेस बनाया है , जहां कलाकार निःशुल्क अपने उत्पाद और कृतियों
को निःशुल्क वेबसाइट पर लिस्ट कर यूरो और डॉलर में बेच सकते है |
विशेष रूप से पॉटरी (शबाना), मून लैंप मेकिंग (निधि वर्मा), मधुबनी पेंटिंग (काजल), DIY आर्ट- क्ले फ्रिज मैग्नेट और मिनी मिरर पेंटिंग (सान्दली), अस्थायी टैटू (देव्यानी जोशी), लाइव स्केच (अमिता पांचाल), और हैंड एम्ब्रायडरी बैनर (सायली आप्टे) की
वर्कशॉप विशेष आकर्षण का केंद्र रही |
शहर के 26 प्रतिभावान कलाकारों द्वारा रचित अद्भुत कृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें रुमा त्रिवेदी, उपमा साहनी, रुचिका कुशवाहा, छवि अग्रवाल, उर्वी गोरे, स्मृति शितूत, हिमांशी मालवीय, समी सैयद, सोनाली तिलोतीया, चेतना प्रजापति, उभय साहू, पूजा मौर्य, दुर्वा भट्ट, काजल कांबले, माही जैन, हिमांशी खैतवास, पुतुल झा, जयेश वर्मा, सोनाली गुप्ता, रुदुल भंडारी, ज्योति ठाकुर, काव्या सोनी, निधि वर्मा, वंदना खुदीवाल, ज्योति उपाध्याय और अमिता पांचाल शामिल हैं।
साथ ही पारंपरिक और आधुनिक हस्तशिल्प की एक व्यापक श्रृंखला यहाँ मौजूद है, जिसे सुजाता मुदलियार, शीतल नायडू, उर्वी गोरे, दिशा ओझा, स्नेहा छाबड़ा, प्राजक्ता धोडपकर, केतकी मुले, अंजू गढ़वाल, शालिनी त्रिपाठी, जयश्री चौहान, प्रियंका, चाहत आसिवाल, दिव्या सोनी, प्रगति खंडेलवाल, 'आर्ट टोकड़ी', नीतू धनकानी, जयेश वर्मा और नेहा टगाई भट्ट ने सजाया है।
C21 मॉल में आयोजित यह दो दिवसीय कला महाकुंभ इंदौर को कला के मानचित्र पर एक नए मुकाम पर ले गया है। सम्मान समारोह के साथ हुए इस महोत्सव के समापन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कला ही वह भाषा है जो बिना शब्दों के समाज को जोड़ सकती है।


