इतिहास से रू-बरू कराते हुए शुरू हुआ गाँधी हॉल में मनी मेला-09
इतिहास से रू-बरू कराते हुए शुरू हुआ गाँधी हॉल में मनी मेला-09
दुनिया के 226 देशों के करेंसी नोटों से लेकर प्राचीन, मध्य, गुप्त एवं मुगलकालीन मुद्राओं और सिक्कों सहित अनेक दुर्लभ वस्तुओं का प्रदर्शन- आज होगा ऑक्शन
इंदौर, । इतिहास से सीधे संवाद, अतीत में झाँकने और वर्तमान का मूल्यांकन करने के लिए मनी मेला जैसे आयोजन हमारी नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करते हैं। एक युग, एक संस्कृति और एक सभ्यता को समझने की दृष्टि इस तरह के मुद्रा महोत्सव से ही मिल सकती है। यह आयोजन समय की यात्रा, ज्ञान के भंडार और तत्कालीन युग से लेकर आज तक संचार एवं संवाद का भी सशक्त माध्यम है। इस तरह के आयोजन न केवल भारत बल्कि दुनिया के इतिहास को समेटे हुए हैं।
यह बात कही भारत के गुप्तकाल “स्वर्ण युग के सिक्कों” के लेखक एवं संग्राहक संजीव कुमार शिवली कुमार गुप्त (अमेरिका) ने मुख्य अतिथि के रूप में। वे शुक्रवार को गाँधी हॉल में इंदौर मुद्रा शोध न्यास की मेजबानी में आयोजित तीन दिवसीय मनी मेला 09 के शुभारंभ समारोह में भाग लेने विशेष रूप से इंदौर आए हैं। प्रारम्भ में इंदौर मुद्रा शोध न्यास एवं राष्ट्रीय मुद्रा परिषद के संयोजक गिरीश शर्मा आदित्य, मेला संयोजक विराज भार्गव, दाऊलाल जौहरी, मेजर डॉ. महेश गुप्ता, आलोक खादीवाला, मुन्ना भार्गव, लक्ष्मीकांत जैन, मनोज कुमार शास्त्री, विपिन भार्गव एवं राजेश शाह आदि ने मेहमानों का स्वागत किया। अश्विनी शोध संस्थान महिदपुर के डॉ. रामचंद्र ठाकुर, पुरातत्व विभाग के सेवानिवृत्त उपसंचालक प्रकाश परांजपे विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे जिन्होंने दीप प्रज्वलन कर इस मेले का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का संचालन संजय पांडे ने किया। इस अवसर पर भगवान सिंह ठाकुर, विजय सोनी, प्रद्युम्न झरिया, चिराग त्रिवेदी, प्रतीक सोनी, रामचंद्र ठाकुर एवं मेजर डॉ. महेश गुप्ता सहित 11 मुद्रा संग्राहकों का सम्मान भी किया गया। मुख्य अतिथि संजीव कुमार गुप्त ने मनी मेला के आयोजन को नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बताते हुए इंदौर के मुद्रा संग्राहक गिरीश शर्मा आदित्य को शिवली ट्रस्ट की ओर से रजत पदक भेंट कर सम्मानित किया। महिदपुर के अश्विनी शोध संस्थान के डॉ. ठाकुर ने विराज भार्गव को संस्थान का उपाध्यक्ष मनोनीत करने की घोषणा की। उन्होंने मुद्रा संग्राहकों को उनके शोध कार्यों के लिए अपने संस्थान एवं विक्रम विवि की ओर से हरसंभव सहयोग देने के संकल्प भी व्यक्त किया।
अनेक दुर्लभ संग्रह - मनी मेला 09 में करीब 50 मुद्रा संग्राहक देश के विभिन्न शहरों से अपने-अपने मुद्रा संग्रह के साथ ही अनेक दुर्लभ वस्तुओं को लेकर आए हैं। इनमें नागपुर, गुजरात के जैतपुर, कोलकाता, छिंदवाडा, खंडवा, पुणे एवं मध्यप्रदेश के धार, उज्जैन, भोपाल सहित अनेक जिलों के मुद्रा संग्राहक शामिल हैं। इस मेले में दर्शकों के साथ खरीददारों का मेला भी सुबह 11 बजे से ही जुटने लगा। यहाँ लगे स्टाल्स पर अलग-अलग अनूठे नम्बरों के करेंसी नोटों एवं सिक्कों एवं प्राचीन, मध्य, गुप्त एवं मुग़लकालीन मुद्राओं के दुर्लभ संग्रह देखने को मिले। हजारों वर्ष पुराने चित्र, धार्मिक ग्रन्थ, ताला-चाबी, बेजेस, डाक टिकिट से लेकर दूरबीन और विभिन्न धातुओं से निर्मित सिक्कों का भंडार हर स्टाल पर देखने को मिला। शहर के अनूठे करेंसी नोट एवं सिक्के संग्रह करने वालों ने यहाँ आकर अपनी मुद्राएँ बेचीं भी और बदले में कुछ अन्य मुद्राएँ खरीदी भी। खरीदफरोख्त का यह कारोबार पूरे समय चलता रहा। हालत यह थी कि सुबह 11 से लेकर शाम 7 बजे तक लगातार मनी मेला में दर्शकों और मुद्रा संग्राहकों का सैलाब बना रहा। मेले में अनेक स्टालों पर स्मारक, सिक्कों, डाक टिकटों, विभिन्न प्रसंगों पर सरकार द्वारा जारी किए गए आवरणों और सिक्कों का संग्रह भी देखने को मिल सकता है। गोला बारूद फेक्ट्री पुणे के आवरण से लेकर आरएसएस के शताब्दी वर्ष और संयुक्त राष्ट्र संघ के विभिन्न कार्यकर्मों पर आधारित मुद्राएँ भी यहाँ देखी जा सकती हैं। नागपुर से आए एक संग्राहक के पास दुनिया के 226 देशों के करेंसी नोटों का संग्रह देखने को मिला, वहीँ रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा सन 1925 से लेकर अब तक जारी किए गए एक, दो, पांच, दस, बीस, पचास, सौ, पांच सौ, हजार और दस हजार तक के करेंसी नोटों का प्रदर्शन भी यहाँ देखने को मिला। कुछ नोटों पर ब्रिटिश शासकों और कुछ पर अंग्रेज शासकों के चित्र भी छपे हुए देखे गए। जयपुर के एक संग्राहक के पास भक्ताम्बर स्त्रोत नामक 250 वर्ष प्राचीन जैन ग्रन्थ भी यहाँ उपलब्ध है। जैन शासनकाल की अनेक दुर्लभ वस्तुएं भी इस मेले में देखी जा सकती हैं।
आज ऑक्शन - मेले में इंदौर के मुद्रा संग्राहक विराज भार्गव अपने शासकीय अनुमति प्राप्त विराज ऑक्शंस के माध्यम से 14 फरवरी को दोपहर में देश के अनमोल और दुर्लभ सिक्के नीलामी के माध्यम से संग्राहकों को उपलब्ध कराएंगे। उनके पास छठीं शताब्दी के गांधार महाजनपद, 350 वर्ष पूर्व कुरु महाजनपद, मगध कालीन, शाक्य कालीन, ईरान और विदिशा काल, मोर्य काल के ताम्बे एवं अन्य धातुओं के दुर्लभ सिक्कों सहित मुग़ल शासन काल में अकबर, हुमायूँ, जहाँगीर, मालवा सल्तनत, खानदेश, चित्र दुर्गा, मलाबार, बाजबहादुर, गुप्त शासनकाल, चन्द्रगुप्त द्वितीय से लेकर मालवा की ग्वालियर, देवास, धार, भोपाल, इंदौर (तुकोजीराव द्वितीय, शिवाजीराव एवं अहिल्या बाई होलकर के समय की मुद्राएँ), झाबुआ, जयपुर, मैसूर, रतलाम, त्रावणकोर और बरमा (म्यांमार), तिब्बत, पुर्तगीज, ग्रेट ब्रिटेन, विक्टोरिया, मोम्बासा, जार्ज पंचम और अंग्रेजों से लेकर वर्तमान समय तक रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किए गए विभिन्न करेंसी नोट भी इस ऑक्शन में शामिल हैं। अनेक तरह के नोटों की गड्डियां भी यहाँ नीलामी में उपलब्ध रहेंगी।
इस मेले में देश-विदेश के प्राचीनतम और दुर्लभ सिक्कों से लेकर अन्य महत्वपूर्ण आइटम्स को आम लोग पहली बार देख सकेंगे। मेले में विशेष रूप से करेंसी नोटों और मुद्राओं के नाम पर आम लोगों के साथ की जाने वाली झांसेबाजी एवं भ्रामक जानकारियां देकर गुमराह करने वाले तत्वों की गतिविधियों से आगाह करने पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि पेशेवर लोग आम लोगों के साथ किसी तरह की धोखाधड़ी नहीं कर सकें। मेले की व्यवस्थाओं के लिए एक समिति का गठन किया गया है। गाँधी हाल में बाहर पुस्तक मेला चल रहा है और मनी मेला अंदर, इस तरह गाँधी हॉल में आने वाले लोगों को फ़िलहाल दो-दो मेले देखने को मिल रहे हैं।



