हर वो व्यक्ति *जो भारत के धर्म स्थलों, प्रतीकों,  में आस्था रखता है और वन्दे मातरम् कहता हैं हिन्दू है*  - *कीर्तिश धामारीकर शास्त्री

हर वो व्यक्ति *जो भारत के धर्म स्थलों, प्रतीकों,  में आस्था रखता है और वन्दे मातरम् कहता हैं हिन्दू है*  - *कीर्तिश धामारीकर शास्त्री


*हिन्दू राष्ट्र का विचार RSS की आत्मा है.*

  हर वो व्यक्ति *जो भारत के धर्म स्थलों, प्रतीकों,  में आस्था रखता है और वन्दे मातरम् कहता हैं हिन्दू है*  -
*कीर्तिश धामारीकर शास्त्री*

इंदौर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस के 100 वर्ष के उपलक्ष में देशभर में बड़े धूमधाम से और उत्साह से हिंदू सम्मेलन के आयोजन हुए इस श्रृंखला में इंदौर के श्रीनगर बस्ती में हुए हिंदू सम्मेलन में नन्हे मुन्ने बच्चों ने और मातृ शक्तियों ने बड़े रोचक सांस्कृतिक, धार्मिक संदेश परक, और पर्यावरण का संदेश देने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित विशाल जन समुदाय का मन मोह लिया.

मातृ शक्ति संत परम पूज्य परम अनादी सरस्वती ने अपने उद्बोधन में समाज से जागृत होने की अपील करते हुए बच्चों के सु-संस्कृत राष्ट्रभक्ति होने की अपील की.

लेखिका - शिक्षिका अमिता झा ने कुटुंब प्रबोधन और पंच परिवर्तनों पर साधिकार अपने विषय की प्रस्तुति की.

मुख्य वक्ता और संघ के प्रवक्ता के रूप में अभिभाषण करते हुए कीर्तिश धामारीकर शास्त्री ने संघ के 100 वर्षों के इतिहास के विभिन्न पहलुओं पर सविस्तार स चर्चा करते हुए कहा की हिंदू राष्ट्र का विचार संघ की आत्मा है.
हर वह व्यक्ति जो हिंदू राष्ट्र के धार्मिक स्थल,महापुरुषों, नदियों गौ माता और इस देश को मां के रूप में पूजता है वह व्यक्ति हिंदू है चाहे पूजा का स्वरूप, पद्धति कोई भी क्यों ना हो.
आपने डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी के जीवन के विभिन्न पहलुओं से शुरुआत करते हुए संघ की स्थापना किस प्रकार और किन परिस्थितियों में हुई इस पर प्रखरता से  प्रकाश डाला.
आपने कहा कि १९२० के आते आते कांग्रेस में दो मत हो गए थे, एक नरम दल और दूसरा गरम दल. अधिकांश कांग्रेसी नरम दल के समर्थन में थे पर आम जनता गरम दल की विचार धारा का हृदय से समर्थन करती थी.

भारत माता के पूजन व आरती से कार्यक्रम की शुरुआत हुई.

कार्यक्रम का आरंभ वंदे मातरम से हुआ और अंत जन गण मन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.

कार्यक्रम में हजारों की संख्या में समाज जन उपस्थित रहे.
कार्यक्रम के अंत में सभी के लिए सुस्वादु सह भोज का आयोजन रखा गया.