रतलाम मंडल में ट्रैक साइड फेंसिंग से बढ़ेगी ट्रेनों की गति, संरक्षा एवं सुरक्षा
*रतलाम मंडल में ट्रैक साइड फेंसिंग से बढ़ेगी ट्रेनों की गति, संरक्षा एवं सुरक्षा*
रतलाम/ इंदौर । पश्चिम रेलवे का रतलाम मंडल यात्रियों की सुविधा के साथ-साथ ट्रेनों की गति, संरक्षा एवं सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाए रखने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में रतलाम मंडल द्वारा ट्रैक साइड फेंसिंग (बाउंड्री वॉल/सेफ्टी फेंसिंग) का कार्य व्यापक स्तर पर किया जा रहा है।
पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया की रतलाम मंडल द्वारा यह कार्य दो अलग-अलग
रूपों में किया जा रहा है। रतलाम मंडल का नागदा–गोधरा रेलखंड, मुंबई–दिल्ली सेमी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है,जिसे मिशन रफ्तार के अंतर्गत 160 किमी प्रति घंटा की गति के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत ट्रेनों की गति बनाए रखने तथा रेलवे ट्रैक पर पशुओं के आने से होने वाले रेल एवं किसानों के नुकसान
को रोकने के उद्देश्य से नागदा–गोधरा रेलखंड के चिन्हित स्थानों पर लगभग 98 किलोमीटर रेलखंड को बाउंड्री वॉल से सुरक्षित करने का कार्य आरंभ किया गया था जिसे पूर्ण कर लिया गया है। इससे केवल ट्रेनों का परिचालन सुरक्षित हुआ है, बल्कि पशु मालिकों को भी सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।
इसके अतिरिक्त रतलाम मंडल के चंदेरिया–मंदसौर, मंदसौर–रतलाम,मंदसौर–इंदौर, इंदौर–डॉ. अंबेडकर नगर–खंडवा, नागदा–भोपाल तथा उज्जैन–देवास–इंदौर रेलखंडों के चिन्हित लोकेशनों पर सेफ्टी फेंसिंग/बाउंड्री वॉल निर्माण का कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है। इन रेलखंडों में कुल लगभग 501 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में बाउंड्री वॉल का निर्माण प्रस्तावित है। गत वर्ष के दौरान लगभग 127 किलोमीटर क्षेत्र में बाउंड्री वॉल का निर्माण किया गया, जबकि वर्ष 2025-26 में अब तक लगभग 80 किलोमीटर क्षेत्र में बाउंड्री वॉल का निर्माण पूरा किया जा चुका है।
इंदौर–देवास–उज्जैन–भोपाल रेलखंड पर वंदे भारत ट्रेन का परिचालन किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण खंड पर सुरक्षा , संरक्षा को ध्यान में रखते हुए बाउंड्री वॉल निर्माण का कार्य तेज गति से प्रगति पर है।
रतलाम मंडल के सभी चिन्हित क्षेत्रों में बाउंड्री वॉल निर्माण होने से रेलवे ट्रैक पर पालतू एवं जंगली जानवरों की आवाजाही रुकगी, ट्रेनों निर्बाध रुप से अपने अधिकतम गति से चलेगी, ट्रैक के आस-पास के किसानों के पशुधन का नुकसान बचेगा, ट्रेनों का संरक्षित संचालन होगा जिससे समयपालनता में भी सुधार होगा तथा यात्री निर्धारित समय में अपने गंतव्य स्टेशन तक पहुँच सकेंगे।



