संस्कृति और संस्कारों का पोषण करती है रामकथा : पं. भार्गव
संस्कृति और संस्कारों का पोषण करती है रामकथा : पं. भार्गव
बर्फानी धाम के पीछे स्थित गणेश नगर में नौ दिवसीय राम कथा का शुभारम्भ हुआ शोभायात्रा के साथ
इंदौर, रामकथा में स्नेह, दया और करुणा की वर्षा होती है। समुद्र का पानी खारा होता है लेकिन आकाश के सम्पर्क में आकर वर्षा जल के रूप में मीठा बन जाता है। आज अंग्रेजी नए वर्ष का पहला दिन है जो हमारा नया वर्ष तो नहीं है, लेकिन हम वसुधैव कुटुम्बकम की भावना में विश्वास रखते हैं इसलिए सबको अपना मानते हैं। सज्जनों और श्रेष्ठ लोगों की संगत में आकर हमारा भी चरित्र निर्माण हो सकता है। रामकथा संस्कृति और संस्कारों का पोषण करती है। इसे हम भक्ति, कर्म और ज्ञान का संयोग भी कह सकते हैं। राम सत्य के साथ मर्यादा के भी संस्थापक हैं। सत्य का चिंतन और आचरण मनुष्य को सही दिशा में ले जाता है।
बर्फानी धाम के पीछे स्थित गणेश नगर में माता केशरबाई रघुवंशी धर्मशाला परिसर के शिव-हनुमान मंदिर की साक्षी में गुरुवार से प्रारंभ हुई संगीतमय रामकथा में प्रख्यात मानस मर्मज्ञ पं. मनोज भार्गव ने उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। ब्रह्मऋषि स्वामी बर्फानी दादा महाराज की प्रेरणा से हो रहे इस अनुष्ठान का शुभारंभ सुबह गणेश नगर और आसपास के क्षेत्रों में निकली दिव्य शोभायात्रा के साथ हुआ। बैंड-बाजों, भजन एवं गरब मंडलियों तथा परंपरागत परिधान में शामिल महिला पुरुषों के साथ यह शोभायात्रा जहाँ-जहाँ से निकली, भक्तों ने पुष्पवर्षा कर भगवान के जयघोष के बीच रामचरितमानस का पूजन किया। एक बग्घी में कथा व्यास पं. भार्गव एवं अन्य साधु संत विराजित थे जिनका अनेक स्थानों पर स्वागत किया गया। कथा स्थल पहुँचने पर आयोजन समिति की ओर से तुलसीराम-सविता रघुवंशी एवं संयोजक रेवतसिंह रघुवंशी, नरेन्द्र मिश्रा, शालिग्राम व्यायामशाला के रामचंद्र पाटीदार, रामसिंह राजपूत, मलखान सिंह कुशवाह, देवकरण यादव आदि ने व्यास पीठ एवं रामचरितमानस का पूजन किया। कथा में आज रामचरितमानस और भारतीय संस्कृति की महत्ता सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। संध्या को आरती में सैकड़ों भक्तों ने भाग लिया। संयोजक रेवतसिंह रघुवंशी ने बताया कि गणेश नगर में कथा 9 जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर 1 से सांय 5 बजे तक होगी।
पं. भार्गव ने कहा कि रामकथा वह पतित पावन गंगा है, जिसमें स्नान के बाद हर तरह के पाप, ताप और संताप से मुक्ति मिल सकती है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामायण के रूप में भारतीय संस्कृति को एक अदभुत और अलौकिक सौगात दी है। युगों-युगों से देश के जन मानस में सुबह से लेकर शाम तक और शाम से रात तक कोई स्वर गूंजता है तो वह राम का ही नाम है। जिस तरह मोबाईल को नया जीवन देने के लिए रिचार्ज कराना पड़ता है, उसी तरह रामकथा भी हमारे जीवन को रि-चार्ज करती है।



