गीता भवन की भागवत कथा में धूमधाम से मनाए गए राम-कृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंग 

गीता भवन की भागवत कथा में धूमधाम से मनाए गए राम-कृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंग 

 इंदौर। भारत के धर्मग्रंथों में एक आदर्श परिवार की व्याख्या बहुत सुंदर तरीके से बताई गई है। मां कौशल्या जैसी, पति राम जैसे, पत्नी सीता जैसी, भाई लक्ष्मण और भरत जैसे और सेवक हनुमानजी जैसे होना चाहिए। संसार का प्रत्येक जीव हमेशा अमर रहना चाहता है, मरना कोई नहीं चाहता। भागवत जैसे धर्मग्रंथ हमें पवित्रता के मार्ग पर बढ़ने के लिए प्रवृत्त करते हैं। भागवत के उपदेश और संदेश हमारे लिए अमृत से भी ज्यादा अनमोल हैं, जो जीवन के संशयों के क्षणों में हमें सही राह दिखाते हैं। पाप की प्रवृत्ति भोगते समय अच्छी लगती है, लेकिन बाद में विनाश करती है, जबकि पुण्य की प्रवृत्ति पहले कठिन लगती है और फिर हमारे जीवन को संवार देती है। राम और कृष्ण भारत की अस्मिता के प्रतीक हैं। 

          श्रीधाम वृंदावन के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ने गीता भवन में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन राम और कृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंगों की भावपूर्ण व्याख्या करते हुए उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। कथा में भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव भी धूमधाम से मनाया गया। जिसे ही बालक कृष्ण को सुसज्जित टोकनी में लेकर मंच पर लाया गया, समूचा सभागृह ‘नंद में आनंद भयो जय कन्हैयालाल की’... भजन पर झूम उठा। भक्तों ने भी बधाई गीत गाकर अपनी खुशियां व्यक्त की। व्यासपीठ का पूजन दिनेश-दीपाली तिवारी, दिव्यांशी, देवेशी, झाबुआ के पूर्व राजा कमलेन्द्रसिंह, संगीता शर्मा महू, मनीषा शर्मा, अर्चना एवं हरि शर्मा, लक्ष्मणसिंह राठौर आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया। 

          महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद ने आज कथा में अजामिल के साथ ही भक्त प्रहलाद के चरित्र का भी भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि प्रहलाद के गुरू नारदजी ने मां के पेट में रहते हुए प्रहलादजी को दिव्य ज्ञान का उपदेश दिया और तब प्रहलादजी ने भगवान को प्राप्त किया। वामन अवतार के पश्चात राम जन्म प्रसंग का उत्सव भी मनाया गया। महामंडलेश्वरजी ने कहा कि राम और कृष्ण भारत की अस्मिता के गौरवशाली प्रतीक हैं। राम कथा में बताया गया है कि एक आदर्श परिवार कैसा होता है। मां कौशल्य जैसी, पति राम जैसे, भाई लक्ष्मण और भरत जैसे पत्नी सीता जैसी और सेवक हनुमानजी जैसा हो तो वहां कोई भी रावण अपनी निरंकुशता नहीं चला पाएगा।