गोकुलदास हॉस्पिटल में अब 'लीडलेस पेसमेकर': बिना चीरा, संक्रमण का खतरा कम और जल्द रिकवरी*

गोकुलदास हॉस्पिटल में अब 'लीडलेस पेसमेकर': बिना चीरा, संक्रमण का खतरा कम और जल्द रिकवरी*

*गोकुलदास हॉस्पिटल में अब 'लीडलेस पेसमेकर': बिना चीरा, संक्रमण का खतरा कम और जल्द रिकवरी*

*इंदौर।* स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए, गोकुलदास हॉस्पिटल के अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष के जैन और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक बिना चीरा लगाए लीडलेस पेसमेकर इम्प्लांटेशन की प्रक्रिया को अंजाम दिया है। यह अत्याधुनिक तकनीक पारंपरिक पेसमेकर प्रक्रिया की तुलना में मरीजों को अधिक सुरक्षित, आरामदायक और तेजी से रिकवरी प्रदान करती है।

*अत्याधुनिक चिकित्सा की नई मिसाल*
लीडलेस पेसमेकर इम्प्लांटेशन एक मिनिमली इनवेसिव कार्डियक प्रक्रिया है, जिसमें पेसमेकर को बैटरी सहित पैर की नस (फेमोरल वेन) के माध्यम से सीधे हृदय के दाएं चेंबर में स्थापित किया जाता है। इस प्रक्रिया में छाती पर किसी भी प्रकार का चीरा या कट लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे मरीज की असुविधा और जोखिम दोनों में उल्लेखनीय कमी आती है।

*इस नई तकनीक की मुख्य विशेषताएं*

कोई चीरा नहीं: पारंपरिक पेसमेकर की तरह छाती पर चीरा लगाने की जरूरत नहीं होती।

*संक्रमण का खतरा नगण्य:* त्वचा के कम संपर्क के कारण संक्रमण का जोखिम लगभग समाप्त हो जाता है।

*तेज रिकवरी और डिस्चार्ज:* मरीज प्रक्रिया के उसी दिन सामान्य रूप से चल-फिर सकता है और उसे लंबे समय तक अस्पताल में रहने की आवश्यकता नहीं होती।

*लंबी बैटरी क्षमता:* पारंपरिक पेसमेकर की बैटरी जहां 5–10 वर्षों तक चलती है, वहीं लीडलेस पेसमेकर की बैटरी लगभग 25 वर्षों तक कार्यक्षम रहती है, जिससे मरीजों को बार-बार रिप्लेसमेंट प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता।

*इस सफल इम्प्लांटेशन के बारे में बताते हुए डॉ. आशीष के जैन ने कहा:* "परंपरागत पेसमेकर इम्प्लांटेशन में छाती की त्वचा पर चीरा लगाकर एक पॉकेट बनाई जाती है, जिसमें डिवाइस को रखा जाता है और हृदय तक तार (लीड) पहुंचाए जाते हैं। इस प्रक्रिया में संक्रमण, लीड संबंधी जटिलताएं और लंबे अस्पताल प्रवास का जोखिम बना रहता है। लीडलेस पेसमेकर तकनीक हृदय रोगियों के लिए एक बड़ी राहत है। यह न केवल सुरक्षित है, बल्कि मरीजों की रिकवरी भी बेहद तेज होती है। विशेष रूप से इसकी लगभग 25 वर्ष की बैटरी लाइफ मरीजों को दीर्घकालिक लाभ प्रदान करती है, जो पारंपरिक पेसमेकर के मुकाबले कहीं अधिक है।"

*इसी उपलब्धि पर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. कुश भगत ने कहा:* "लीडलेस पेसमेकर उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है, जिन्हें संक्रमण का जोखिम अधिक होता है या जिनकी त्वचा पर चीरा लगाना जटिल हो सकता है। बिना लीड और बिना पॉकेट वाली यह तकनीक जटिलताओं को बेहद कम करती है और खासतौर पर बुजुर्ग मरीजों के लिए अधिक सुरक्षित विकल्प बन जाती है।"