वर्ल्ड हेड एंड नेक कैंसर डे: मुँह और गले के कैंसर को नज़रअंदाज़ करना पड़ सकता है भारी

वर्ल्ड हेड एंड नेक कैंसर डे: मुँह और गले के कैंसर को नज़रअंदाज़ करना पड़ सकता है भारी

*वर्ल्ड हेड एंड नेक कैंसर डे: मुँह और गले के कैंसर को नज़रअंदाज़ करना पड़ सकता है भारी*

​*डॉ. अपूर्व गर्ग* कंसल्टेंट, हेड एंड नेक ऑन्कोसर्जन, केयर सीएचएल हॉस्पिटल,

इंदौर।कई बीमारियों की शुरुआत बेहद मामूली लक्षणों से होती है, लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो वे जानलेवा साबित हो सकती हैं। मुँह और गले का कैंसर (हेड एंड नेक कैंसर) भी एक ऐसी ही गंभीर बीमारी है। चिंता का विषय यह है कि भारत में इसके मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इसका मुख्य कारण हमारी बदलती जीवनशैली तथा तंबाकू की बढ़ती लत है। इसी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 27 जुलाई को 'वर्ल्ड हेड एंड नेक कैंसर डे' मनाया जाता है। इस वर्ष 'इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजिक सोसाइटीज़' (IFHNOS) अपना 13वां अवेयरनेस डे मना रहा है, जिसका उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के शुरुआती संकेतों के प्रति सतर्क करना और समय पर इलाज के लिए प्रेरित करना है।

*​तंबाकू के अलावा भी हैं कई कारण*
भारत में मुँह और गले का कैंसर सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसर के प्रकारों में से एक है। यह पुरुषों में होने वाला सबसे आम कैंसर है, जबकि महिलाओं में यह तीसरे स्थान पर आता है। हर साल इसके मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिसकी सबसे बड़ी वजह तंबाकू का सेवन है। आज भी एक बड़ी आबादी यह मानती है कि केवल गुटखा या तंबाकू ही नुकसानदेह है। लेकिन सच्चाई यह है कि पान मसाला, सादी सुपारी, ई-सिगरेट और शराब का नियमित सेवन भी इस कैंसर के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। कई लोग सालों तक सिर्फ सुपारी चबाते हैं और इसे पूरी तरह सुरक्षित मानते हैं, जबकि यह भी मुँह के कैंसर का एक प्रमुख कारण बन सकती है।लक्षणों को न करें नज़रअंदाज़ इस बीमारी के इलाज में सबसे बड़ी बाधा यह है कि अक्सर लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य समझकर टाल देते हैं। 

*निम्नलिखित संकेतों को बिल्कुल अनदेखा नहीं करना चाहिए:*

* ​मुँह का ऐसा छाला जो दो सप्ताह से अधिक समय तक ठीक न हो।
* ​मुँह का पूरा न खुल पाना।
* ​मुँह के अंदर लाल या सफेद धब्बे दिखाई देना।
* ​गर्दन में गांठ होना या लगातार तकलीफ रहना।
* ​खाना या पानी निगलने में परेशानी होना।
* ​बिना किसी स्पष्ट कारण के तेजी से वजन घटना।
​बीमारी की पहचान जितनी जल्दी होती है, उसका इलाज उतना ही आसान और सफल होता है।

*​आधुनिक चिकित्सा से बढ़ी उम्मीदें*
राहत की बात यह है कि आज चिकित्सा विज्ञान ने 'हेड एंड नेक कैंसर' के उपचार में अभूतपूर्व प्रगति की है। अब इंदौर जैसे शहरों में भी इसका विश्वस्तरीय और आधुनिक उपचार आसानी से उपलब्ध है। 

पहले जहां मरीजों के पास सीमित विकल्प होते थे, वहीं आज एडवांस सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी और आधुनिक टार्गेटेड दवाओं के माध्यम से इलाज कहीं अधिक प्रभावी हो गया है। यहां तक कि बीमारी के चौथे (एडवांस) चरण में पहुंचने के बाद भी कई मरीजों का उपचार संभव है। हालांकि, सफलता की दर बीमारी की अवस्था पर निर्भर करती है, इसलिए जागरूकता और समय पर की गई जांच ही आज भी सबसे बेहतर बचाव है।

*सामान्य जीवन की ओर लौटना है संभव*
इलाज का एक और सकारात्मक पहलू यह है कि अब ऑन्कोसर्जन केवल कैंसर ग्रस्त हिस्से को निकालने तक सीमित नहीं हैं। आधुनिक रिकंस्ट्रक्टिव (Reconstructive) और प्लास्टिक सर्जरी की मदद से जबड़े, जीभ और चेहरे के प्रभावित हिस्सों का सफलतापूर्वक पुनर्निर्माण भी किया जा सकता है। इस तकनीक के कारण मरीज इलाज के बाद फिर से सामान्य रूप से बोल सकते हैं, खाना चबा सकते हैं और गरिमापूर्ण जीवन जी सकते हैं। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र ने पिछले कुछ वर्षों में कितनी बड़ी छलांग लगाई है।

​*युवाओं से विशेष अपील:*
"आज के युवाओं से मेरी यही गुज़ारिश है कि तंबाकू, गुटखा, पान मसाला, सुपारी, ई-सिगरेट या किसी भी तरह के नशे को अपनी जिंदगी का हिस्सा न बनने दें। यदि आप पहले से इनका सेवन कर रहे हैं, तो आज और अभी इसे छोड़ने का दृढ़ संकल्प लें। इसके अलावा, यदि मुँह या गले से जुड़ा कोई भी असामान्य लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो उसे नज़रअंदाज़ न करें। तुरंत किसी विशेषज्ञ (हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजिस्ट) से जांच कराएं। समय पर की गई स्क्रीनिंग और सही इलाज से हज़ारों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं