ब्राज़ील की विश्व कांग्रेस में गूंजे भारत के विचार, ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड द राइट टू प्राइवेसी’ पर खुशबू इसरानी ने प्रस्तुत किया शोधपत्र*

ब्राज़ील की विश्व कांग्रेस में गूंजे भारत के विचार, ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड द राइट टू प्राइवेसी’ पर खुशबू इसरानी ने प्रस्तुत किया शोधपत्र*

*ब्राज़ील की विश्व कांग्रेस में गूंजे भारत के विचार, ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड द राइट टू प्राइवेसी’ पर खुशबू इसरानी ने प्रस्तुत किया शोधपत्र*

*विश्व मंच से भारत की आवाज़ बनीं रेनेसां विश्वविद्यालय की सहायक प्राध्यापक, 27 देशों के विधि विशेषज्ञों के बीच रखा शोधपरक दृष्टिकोण*

इंदौर। रेनेसां विश्वविद्यालय की विधि संकाय की सहायक प्राध्यापक खुशबू इसरानी ने ब्राज़ील में आयोजित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय विश्व कांग्रेस में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड द राइट टू प्राइवेसी’ विषय पर अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया। उनके शोधपरक व्याख्यान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराहना मिली।

‘विधि के रूपांतरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका : चुनौतियाँ एवं शेष कार्यसूची’ विषय पर आयोजित इस विश्व कांग्रेस का नेतृत्व पेरू के प्रसिद्ध विधि विशेषज्ञ डॉ. जॉर्ज आइज़ैक टोरेस मैनरिक ने किया। सम्मेलन में विश्व के 27 देशों से आए 120 से अधिक विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों एवं शोधकर्ताओं ने भाग लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता और विधि व्यवस्था से जुड़े समकालीन मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

अपने शोधपत्र में खुशबू इसरानी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव के संदर्भ में निजता के अधिकार, व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा, डिजिटल निगरानी तथा तकनीकी नवाचार और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में नागरिकों की निजता की रक्षा के लिए प्रभावी कानूनी ढांचे और उत्तरदायी तकनीकी नीतियों का विकास समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

यह अंतरराष्ट्रीय विश्व कांग्रेस विधि और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर संवाद, शोध और सहयोग को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई। इस अवसर पर खुशबू इसरानी की प्रस्तुति ने न केवल भारत, बल्कि रेनेसां विश्वविद्यालय और इंदौर का भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरव बढ़ाया।