इंदौर में जैन समुदाय के योगदान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
इंदौर। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) ने आज इंदौर, मध्य प्रदेश के मैरियट होटल में "भारतीय अर्थव्यवस्था, शिक्षा और परोपकार में जैन समुदाय का योगदान" विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इस अवसर पर वीडियो संदेश के माध्यम से संगोष्ठी को संबोधित करते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि परोपकार जैन समाज की पहचान है। "अस्पताल, धर्मशालाएं, गौशालाएं और सामुदायिक रसोई सभी को गरिमा के साथ सेवा प्रदान करते हैं। जैन उद्यमी भारत की अर्थव्यवस्था को भी शक्ति देते हैं, रोजगार सृजित करते हैं और नवाचार को बढ़ावा देते हैं, साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और ग्रामीण विकास में सहयोग करते हैं।"
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि समुदाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के विजन में योगदान दे रहा है। "सरकार इन योगदानों को मान्यता देती है। पीएम विकास और प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के माध्यम से हम जैन युवाओं और संस्थानों को सशक्त बना रहे हैं।
अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन मुख्य अतिथि के रूप में संगोष्ठी में शामिल हुए। उन्होंने अल्पसंख्यक समुदायों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से पीएम विकास योजना सहित विभिन्न सरकारी पहलों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने आजीविका को मजबूत करने और समुदायों में सामाजिक-आर्थिक उत्थान को बढ़ावा देने के अवसर पैदा कर समावेशी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
एनसीएम की सदस्य सुश्री एस. मुनव्वरी बेगम ने सेवा और उत्थान के प्रति जैन समुदाय की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि उनका योगदान भारत के सामाजिक ताने-बाने को लगातार मजबूत कर रहा है। एनसीएम के सदस्य श्री बेरजिस देसाई ने कहा कि अहिंसा और बहुलवाद के जैन मूल्य आज की दुनिया में गहरे प्रासंगिक हैं, और उनके आर्थिक व परोपकारी योगदान सभी समुदायों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण हैं।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सचिव श्रीमती अलका उपाध्याय ने अपने स्वागत भाषण और समापन टिप्पणी में कहा कि आयोग समुदाय की चिंताओं को दूर करने और हितों की रक्षा में सक्रिय रूप से लगा हुआ है व उन्होंने समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए आयोग की प्रतिबद्धता दोहराई।
उद्घाटन सत्र को मध्य प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप; देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राकेश सिंघई; शांतिलाल मुथा फाउंडेशन के संस्थापक शांतिलाल मुथा; और जैन इंटरनेशनल ट्रेडिंग ऑर्गनाइजेशन के उपाध्यक्ष श्री कमलेश सोजतिया ने भी संबोधित किया।
"भारतीय अर्थव्यवस्था, शिक्षा और परोपकार में जैन समुदाय का योगदान" विषय पर तकनीकी सत्र-I का संचालन डीएवीवी, इंदौर के जैन अध्ययन केंद्र के विभागाध्यक्ष प्रो. रजनीश जैन ने किया। सत्र में डॉ. जितेंद्र भाई शाह, पूर्व निदेशक, लालभाई दलपतभाई इंडोलॉ संस्थान, अहमदाबाद; शांतिलाल मुथा; दिगंबर जैन महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अशोक बड़जात्या; भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के सदस्य गिरीश जे. शाह; और जेआईटीओ के अल्पसंख्यक विंग के उपाध्यक्ष श्री रजनीश जैन ने संबोधित किया। वक्ताओं ने व्यापार, उद्यमिता और उद्योग के माध्यम से भारत के आर्थिक परिदृश्य को आकार देने में जैन समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला और शिक्षा व परोपकार में उनके योगदान को रेखांकित किया।
"जैन धर्म और भारतीय ज्ञान प्रणाली" पर तकनीकी सत्र-II का संचालन डीएवीवी, इंदौर की पूर्व कुलपति प्रो. रेणु जैन ने किया। सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. शालिन जैन; जैन विश्वभारती, लाडनूं के प्रो. भागचंद जैन (सेवानिवृत्त); इंटरनेशनल स्कूल फॉर जैन स्टडीज, पुणे के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. नवीन कुमार श्रीवास्तव; सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. फूलचंद जैन; और जैन धर्म रक्षक फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. इंदु जैन ने संबोधन दिया। चर्चा अहिंसा, अनेकांतवाद और अपरिग्रह जैसे मूल सिद्धांतों और समकालीन समय में उनकी प्रासंगिकता पर केंद्रित रही।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के संयुक्त सचिव डॉ. अत्य नंद द्वारा दिए गए औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी गणमान्य व्यक्तियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के बहुमूल्य योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।