देवी अहिल्या की नगरी इंदौर के विकास और समृद्धि में जितना योगदान माँ नर्मदा का, उतना किसी का नहीं
देवी अहिल्या की नगरी इंदौर के विकास और समृद्धि में जितना योगदान माँ नर्मदा का, उतना किसी का नहीं
खजराना गणेश मन्दिर पर पहली बार निकली वृक्ष कलश यात्रा, दादागुरु भेंट करेंगे मातृशक्ति को पौधे
इंदौर। माँ नर्मदा केवल नदी नहीं, भारतीय समाज और सनातन संस्कृति के लिए अत्यंत पुण्यदायी और जीवन रेखा मानी जाती है। अन्य नदियों में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति का उल्लेख है लेकिन माँ नर्मदा के लिए तो केवल दर्शन करने मात्र से ही पुण्य मिलने का उल्लेख धर्मग्रंथों में किया गया है। देवी अहिल्या की इस नगरी के लाखों लोग पुण्यशाली और भाग्यशाली हैं, जिन्हें घर बैठे माँ नर्मदा के आचमन, पूजन और स्नान जैसा लाभ मिल रहा है। अपने इस शहर की समृद्धि और विकास में माँ नर्मदा का जितना योगदान है, उतना किसी अन्य का नहीं। नर्मदा केवल जलधारा नहीं, सुख, शांति और आनंद का प्रवाह बनाए रखने वाली शिवपुत्री है, जिनका जन्म भगवान शिव की तपस्या से हुआ है।
नर्मदा परिक्रमावासी आचार्य पं. रविकांत शास्त्री के, जो उन्होंने शहर में पहली बार खजराना गणेश मन्दिर स्थित सत्संग सभागृह पर अ.भा. दादा गुरु परिवार इंदौर नर्मदा मिशन की मेजबानी में प्रारम्भ हुए 7 दिवसीय नर्मदा चिंतन ज्ञान यज्ञ के शुभारंभ सत्र में व्यक्त किए। कथा का शुभारंभ अनूठी वृक्ष कलश यात्रा के साथ हुआ जिसमें 500 से अधिक महिलाओं ने नाचते-गाते हुए अपने मस्तक पर माँ नर्मदा के जल से भरे कलश और उनमें रखे पौधों सहित भाग लिया। महिलाओं का उत्साह देखते ही बनता था। परिसर में अनेक श्र्द्धालुओं ने भी कलश यात्रा, मातृशक्ति और आचार्य पं. शास्त्री पर पुष्पवर्षा कर उनकी अगवानी की। प्रारंभ में आयोजन से जुड़े राजेंद्र बंसल, नित्यम बंसल एवं देवांग शर्मा आदि ने व्यास पीठ का पूजन किया। यात्रा में खजराना गणेश मंदिर के पुजारी परिवारों के सदस्यों तथा समाजसेवी बालकृष्ण छाबछरिया, शिव जिंदल, राजेश गर्ग आदि ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
अ.भा. दादागुरु परिवार इंदौर नर्मदा मिशन की मेजबानी में आज से प्रारंभ हुए इस दिव्य अनुष्ठान में प्रदेश एवं देश के अनेक नर्मदा भक्त और परिक्रमावासी श्रद्धालुओं के साथ ही अनेक तपोनिष्ठ संत-महंत और आचार्य-विद्वान भी आएंगे। खजराना गणेश मंदिर परिसर स्थित दौलतराम छाबछरिया सत्संग भवन पर 5 से 11 मई तक प्रतिदिन शाम 5 से 8 बजे तक माँ नर्मदा चिंतन ज्ञान यज्ञ का यह आयोजन पहली बार हो रहा है जिसमें आज मातृशक्ति ने नर्मदा के जल से भरे कलश में पौधे भी मस्तक पर धारण किए और उन्हें कथास्थल पर लाकर रखा। अब इन पौधों को 7 दिवसीय कथा के पश्चात माँ नर्मदा के अनन्य भक्त, पिछले 2027 दिनों से अखंड निराहार महाव्रत की कठोर साधना कर रहे परम तपस्वी, महायोगी, अवधूत श्री दादागुरु भगवान के करकमलों से ये पौधे मातृशक्ति को अपने-अपने घर-आँगन में उपयुक्त स्थान पर रोपने के लिए भेंट किए जाएँगे। यह समूचा आयोजन दादागुरु की प्रेरणा से ही उनके पावन सानिध्य में हो रहा है जो 9 से 11 मई तक इस कथा में विशेषरूप से शामिल होने आएंगे।
संयोजक राजेंद्र बंसल एवं नित्यम बंसल ने बताया कि कथा में बुधवार 6 मई को कथा में माँ नर्मदा के महात्यम, 7 को माँ भगवती नर्मदा के प्राकट्य उत्सव, 8 को अनेक कल्पों में माँ नर्मदा की लीलाओं का वर्णन, 9 को माँ नर्मदा की परिक्रमा की महिमा, 10 को नर्मदा तट के तीर्थों का वर्णन और सोमवार 11 मई को अवधूत श्री दादागुरु भगवान के आशीर्वचन, दर्शन के पश्चात महाप्रसादी का आयोजन होगा। दादागुरु भगवान रविवार 10 मई को भी कथा में पावन सानिध्य प्रदान करेंगे।
आज पूरे हुए तपस्या के 2027 दिन - अवधूत श्रीदादागुरु भगवान संभवतः देश के पहले ऐसे तपस्वी संत हैं जो पिछले करीब दो हजार दिनों से केवल नर्मदा के जल का पान ही कर रहे हैं और अखंड निराहार महाव्रत की कठोर साधना भी कर रहे हैं। उनकी प्रेरणा से जबलपुर में अनेक विश्व कीर्तिमान भी बन चुके हैं जिनका उल्लेख गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स, लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स सहित अनेक विश्व कीर्तिमानों की श्रृंखला में भी किया गया है। राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल सहित अनेक जन प्रतिनिधि उनके शिष्यों में शामिल हैं। वे अपने नर्मदा मिशन के माध्यम से नर्मदा किनारे के क्षेत्रों में अनेक अभियान चलाए हुए हैं जिनसे अब तक हजारों युवा व्यसनों को छोड़कर माँ नर्मदा की सेवा में समर्पित बन गए हैं। उनकी इस अखंड निराहार व्रत साधना के 2027 दिन आज 5 मई को पूर्ण हुए है और इसी दिन से नर्मदा चिंतन ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ हुआ है।


