जब तक हमारे आचरण में धर्म का समावेश नहीं होगा, मन की प्रवृत्तियां भी अपने लक्ष्य से भटकती रहेंगी – पं. तिवारी

जब तक हमारे आचरण में धर्म का समावेश नहीं होगा, मन की प्रवृत्तियां भी अपने लक्ष्य से भटकती रहेंगी – पं. तिवारी

जब तक हमारे आचरण में धर्म का समावेश नहीं होगा, मन की प्रवृत्तियां भी अपने लक्ष्य से भटकती रहेंगी – पं. तिवारी

खजराना गणेश मंदिर परिसर में सप्तऋषि भागवत मंडल की मेजबानी में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में आज मनेगा कृष्ण जन्मोत्सव

इंदौर। भगवान ने हमें वाणी दी है लेकिन कई बार यह वाणी बेकाबू होकर बाण बन जाती है। अनेक ऐसे युद्ध और घटनाक्रम हैं जो वाणी के कारण ही विकराल बने। हमारे आचरण में जब तक धर्म का समावेश नहीं होगा, मन की वृत्तियाँ भी लक्ष्य से भटकती रहेंगी। आचरण में धर्म का प्रवेश शूचिता और पवित्रता के साथ ही संभव है। मलिनता और मन के विकारों से मुक्ति पाने के लिए धर्म का आश्रय जरुरी है। भगवान कहीं और नहीं हमारे अंतर्मन में ही विराजित हैं लेकिन उन्हें अनुभूत करने के लिए मथना जरुरी है। जैसे मक्खन को मंथन के बाद घी में बदला जाता है, उसी तरह मन का मंथन भी किसी न किसी रूप में हमें परमात्मा की अनुभूति कराता है।

                भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी ने सप्तऋषि भागवत मंडल के तत्वावधान में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में मंगलवार की शाम को खजराना गणेश मंदिर स्थित सत्संग सभागृह में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में वामन अवतार प्रसंग की व्याख्या के दौरान उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। कथा में दिनोंदिन भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। मंगलवार को कथा प्रसंग के दौरान वामन अवतार का उत्सव भी मनाया गया। भजनों पर भक्तों के नाचने-गाने और झूमने का सिलसिला पहले दिन से ही चल रहा है। मातृशक्ति द्वारा गरबा नृत्य की प्रस्तुतियां और मनोहारी भजनों पर समूह नृत्य भी आकर्षण के केंद्र बने हुए हैं। कथा शुभारम्भ के पूर्व मनोरथी समूह की ओर से अशोक-आरती खंडेलवाल, हितेंद्र-वन्दना ग्रोवर, आशीष-खनक शर्मा, स्वप्न-स्वाति खंडेलवाल आदि ने व्यास पीठ का पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी महेंद्र-दिव्या मानधन्या, रामचंद्र-उषा पितलिया एवं लक्ष्मण-चंद्रकांता कानूनगो ने की। आज सभी श्रद्धालु लहरिया एवं पिंक रानी कलर के ड्रेस कोड में शामिल हुए जिससे कथा स्थल का वातावरण पूरी तरह भक्ति भावना से भरपूर बना रहा। कथा प्रतिदिन दोपहर 3.30 से शाम 7 बजे तक हो रही है।

                आज कृष्ण जन्मोत्सव मनेगा –बुधवार 20 मई को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में पुरुष एवं महिलाएं पीताम्बर परिधान में सज-धजकर आएंगे। कृष्ण जन्मोत्सव के लिए कथा स्थल को विशेष रूप से श्रृंगारित किया गया है। गुरुवार 21 मई को महिला-पुरुष हरे रंग के ड्रेस कोड में आएंगे तथा गोवर्धन पूजा उत्सव में शामिल होंगे। शुक्रवार 22 मई को रुक्मणी विवाह का उत्सव मनाया जाएगा जिसमें पुरुष एवं महिलाएं अपनी पसंद के परिधान में सज-धजकर शामिल होंगे। समापन दिवस पर 23 मई को सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष एवं कथा विश्राम के प्रसंग में श्रद्धालु लाल रंग के परिधान में भागीदार बनेंगे। कथा स्थल पर मौसम को देखते हुए भक्तों की सुविधा के लिए समुचित प्रबंध किए गए हैं। भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी पूर्व में दुबई, सिंगापुर, मॉरीशस, श्रीलंका, नेपाल, मलेशिया, वियतनाम तथा देश के लगभग सभी तीर्थस्थलों पर भागवत कथा एवं सनातन धर्म की पताका फहरा चुके हैं। 

             पं. तिवारी ने कथा के दौरान कहा कि भक्ति में सम्पूर्णता, निष्ठां और श्रद्धा होना चाहिए। बालक ध्रुव की तरह यदि हमें निष्काम भाव से परमात्मा को अपना लक्ष्य मान लिया तो निश्चित ही भक्ति का रंग कभी उतरेगा नहीं, बल्कि नवरंग बन जाएगा। अहंकार की प्रवृत्ति मनुष्य का स्वाभाव है। यहाँ तक की देव भी इस प्रवृत्ति से बच नहीं पाते हैं। बालक ध्रुव जैसी निश्छल और निस्वार्थ भक्ति से ही भगवान प्रसन्न होंगे। वामन अवतार की कथा अहंकार को नष्ट करने का संदेश देती है।