20 मिनट में दिल के 27 एमएम छेद का सफल इलाज
20 मिनट में दिल के 27 एमएम छेद का सफल इलाज
*इंडेक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में 16 वर्षीय बच्चे को मिला नया जीवन*
*यह बीमारी लगभग एक हजार बच्चों में से किसी एक को होती है*
*किसान परिवार के 16 वर्षीय बच्चे को मिला आयुष्मान योजना का सहारा*
*इंदौर।* आर्थिक परेशानियों के बीच अपने बेटे की बिगड़ती हालत देखकर किसान परिवार की उम्मीदें टूटने लगी थीं । दिल में 27 एमएम का बड़ा छेद लेकर जिंदगी और मौत से जूझ रहे 16 वर्षीय बच्चे को इंडेक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने नया जीवन दिया।हृदय रोग विशेषज्ञों ने एक जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक पूरा करते हुए 16 वर्षीय बच्चे और परिवार को नई खुशी दे दी। बच्चे के दिल में 27 एमएम का बड़ा छेद था, जिसके कारण वह पिछले छह महीनों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा था। अत्याधुनिक तकनीक की मदद से डॉक्टरों ने केवल 20 मिनट में पैरों की नसों के माध्यम से यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया। इस प्रक्रिया में एएसडी डिवाइस और सेप्टल ऑक्लूडर लगाया गया, जिससे दिल के छेद को बंद किया गया। आयुष्मान योजना के तहत इस आपरेशन को निःशुल्क किया गया।
*आधुनिक इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी तकनीक से की गई सर्जरी*
पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. सुदीप वर्मा ने बताया कि खंडवा के समीप एक गांव में रहने वाले 16 वर्षीय बच्चे को एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD) नामक बीमारी थी। इसमें दिल के ऊपरी दोनों चैम्बर्स के बीच छेद हो जाता है, जिससे शरीर में रक्त प्रवाह प्रभावित होता है। यदि समय पर इसका इलाज नहीं किया जाए तो फेफड़ों और हृदय पर गंभीर असर पड़ सकता है।डॉ. वर्मा ने बताया कि पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी के बजाय इस मरीज का इलाज आधुनिक इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी तकनीक से किया गया। ऑपरेशन के दौरान पैरों की नसों के माध्यम से कैथेटर डालकर दिल तक पहुंचा गया और वहां विशेष एएसडी डिवाइस एवं सेप्टल ऑक्लूडर लगाकर छेद को बंद किया गया। पूरी प्रक्रिया मात्र 20 मिनट में पूरी हो गई और मरीज को किसी बड़े चीरे या ओपन सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ी।इस तरह की प्रक्रिया में मरीज जल्दी रिकवर होता है और संक्रमण का खतरा भी कम रहता है।
*लगातार थकान, घबराहट, सांस फूलना और कमजोरी को न करें नजरअंदाज*
डॉ. सुदीप वर्मा ने बताया कि यदि बच्चों में इस प्रकार के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत हृदय रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। समय पर उपचार मिलने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकता है।डॉक्टरों के अनुसार यह बीमारी जन्मजात हृदय रोग की श्रेणी में आती है और लगभग एक हजार बच्चों में से किसी एक को होती है। समय पर पहचान और उपचार नहीं मिलने पर यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है।किसान परिवार से आने वाला यह बच्चा लगातार थकान, घबराहट, सांस फूलना और कमजोरी जैसी समस्याओं से परेशान था। पिछले दो महीनों में उसकी हालत इतनी खराब हो गई थी कि वह कई बार अचानक बेहोश हो जाता था। परिवार ने कई स्थानों पर उपचार करवाने का प्रयास किया, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण महंगा इलाज कराना संभव नहीं हो पा रहा था। इसके बाद बच्चे को इंडेक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल लाया गया, जहां जांच में पता चला कि उसके दिल में 27 एमएम का बड़ा छेद है।इस पूरे इलाज का महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि बच्चे का उपचार आयुष्मान योजना के अंतर्गत पूरी तरह निःशुल्क किया गया। इससे आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवार को बड़ी राहत मिली। बच्चे के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इंडेक्स अस्पताल ने उनके बच्चे को नया जीवन दिया है।मयंक वेलफेयर फाउंडेशन के चेयरमैन सुरेश सिंह भदौरिया, वाइस चेयरमैन मयंकराज सिंह भदौरिया,मेडिकल डायरेक्टर डॉ. पवन भम्बानी,आपरेशन मैनेजर गीताजंलि खेड़ेकर ने इस सफल आपरेशन के लिए पूरी कार्डियोलॉजी और पीडियाट्रिक टीम की सराहना की।
*दिल में छेद होने के प्रमुख लक्षण*1. जल्दी थकान महसूस होना,2. सांस फूलना,3. बार-बार घबराहट होना4. कमजोरी और वजन कम बढ़ना5. सीने में दर्द या धड़कन तेज होना,6. बार-बार बेहोश होना,7. खेलकूद या शारीरिक गतिविधियों में परेशानी होना


