.अ भा विराट कवि सम्मेलन जाल सभागृह में सम्पन्न हुआ.

.अ भा विराट कवि सम्मेलन जाल सभागृह में सम्पन्न हुआ.

.अ भा विराट कवि सम्मेलन जाल सभागृह में सम्पन्न हुआ.

इंदौर। वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन इण्डिया के बैनर तले आयोजित हुए कवि सम्मेलन में कभी तालियां बजती रहीं तो कभी ठहाके लगते रहे. कवियों ने वर्तमान संदर्भ को छूते हुए कई कविताएं सुनाई. फ़ेडरेशन के अध्यक्ष संजय अग्रवाल की अगुवाई में हुए इस कवि सम्मेलन के सूत्रधार अंतर्राष्ट्रीय कवि प्रो राजीव शर्मा ने बारी बारी से हर कवि को अपनी काव्य पंक्तियों से आमंत्रित किया व अंत में कवि सम्मेलन में अपनी कविताओं से शिखर कलश रखा. कवि दिनेश दिग्गज, कवि हरीश हंगामा, कवयित्री भुवन मोहिनी और अंतर्राष्ट्रीय कवि प्रोफेसर राजीव शर्मा ने काव्य पाठ कर जाल सभागृह को काव्य रस में डुबो दिया. फ़ेडरेशन ने समाजसेवी डॉ माला ठाकुर, श्री पुरुषोत्तम वाघमारे आदि का सम्मान शाल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह प्रदान कर किया...कवि दिनेश दिग्गज ने यह कविता सुनाई....डॉलर के लिए सूने ये घर बार हो गए, 

फैशन में सब सलीके तार तार हो गए,

ये फोन जब से हाथ में बच्चों के आ गया,

सारे खिलोने वाले ही बेकार हो गए ।।कवि हरीश हंगामा ने कविता पेश की... महंगाई से मचा चहूँ ओर हाहाकार, रोक नहीं पाई इसे कोई भी सरकार, खाना कैसे खाएगा गरीब लाचार, नेता नहीं करते इस पर विचार, गरीब के चूल्हे ठंडे पड़ रहे हैं, और ये सत्ता के लिए लड़ रहे हैं. भुवन मोहिनी कवयित्री ने यह कविता भी सुनाई....ठिकाना है यहीं मेरा यहीं पर ठौर मेरा है, 

पुराना दौर था मेरा नया भी दौर मेरा है,

जो भारत भर में सबसे स्वच्छ सबसे खूबसूरत है,

सबकी जान में बसता शहर इंदौर मेरा है। सूत्रधार प्रोफेसर राजीव शर्मा अंतर्राष्ट्रीय कवि ने यह कविता प्रस्तुत कर तालियां बटोरी....अंधेरों को उजास कह नहीं सकता, पतझड़ को मधुमास कह नहीं सकता जो सच है उसे झुठलाऊं कैसे ?, शक को विश्वास कह नहीं सकता, ये राजीव की कलम है पर्दाफाश कर देगी,लंगड़ी चाल को परवाज़ कह नहीं सकता, फ़र्ज़ी लोग बैठ गए हैं ओहदों पर, श्वान कद को गजराज कह नहीं सकता ।। प्रो राजीव शर्मा की एक अन्य कविता को भी श्रोताओं ने दाद दी.. काव्य सर्जना सरल नहीं है, पूछो काव्यकारों से, आग का दरिया चीर रहे हैं, मोम की पतवारों से ।