अंतर्मन से विषय वासनाओं की गंदगी हटाए बिना हमारी भक्ति सार्थक नहीं होगी - आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद
गीता भवन में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद के सानिध्य में मनाया गया गोवर्धन पूजा उत्सव – आज रुक्मणी विवाह
इंदौर। हम माला भी जपते हैं, मन्दिर भी जाते हैं और घंटों बैठकर भक्ति भी करते हैं लेकिन अंदर विषय वासनाओं की गंदगी भरी हुई है। यह गंदगी हटाए बिना हमारी भक्ति सार्थक नहीं हो सकती क्योंकि विषय वासनाएँ ही हमें परमात्मा और सत्संग से विमुख करती हैं। हमें अपना मन उस गोकुल की तरह बनाना पड़ेगा, जिसमें पूतना जैसी राक्षसी प्रवृतियां अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाए। समाज की दुष्प्रवृतियों रूपी पूतना को उसी तरह बाहर निकालना पड़ेगा, जिस तरह भगवान ने निकाला था। भगवान की सभी लीलाओं में सज्जनों के प्रति कल्याण और उद्धार का ही भाव होता है।
ये दिव्य विचार हैं श्रीधाम वृंदावन के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद के, जो उन्होंने गुरुवार को गीता भवन सत्संग सभागृह में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में चल रहे श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस पर भगवान की बाल लीलाओं, 56 भोग एवं गोवर्धन पूजा प्रसंगों के दौरान व्यक्त किए। कथा शुभारंभ के पहले व्यासपीठ का पूजन प्रमुख संयोजक संजय-किरण मंगल, बिनोद-सुनीता अग्रवाल, समाजसेवी प्रेमचंद गोयल, विजय गोयल, सुरेन्द्र बंसल, गोपाल शर्मा, राजेश गर्ग, निरंजन गुप्ता, शिव जिंदल, आशीष गोयल आदि ने किया। विद्वान वक्ता की अगवानी अवनि-अनंत अग्रवाल, विनीता-अक्षत अग्रवाल, श्याम मोमबत्ती, चंचल अग्रवाल आदि ने की। संयोजक संजय मंगल ने बताया कि कथा 30 मई तक प्रतिदिन दोपहर 3.30 से शाम 7 बजे तक होगी। गुरुवार को कथा में गोवर्धन पूजा और बाल ग्वालों का प्रसंग धूमधाम से मनाया गया।
महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद ने कहा कि भगवान की लीलाएँ अकारण नहीं होतीं। उन्हें समझना हम जैसे साधारण लोगों के बूते की बात नहीं है। खुद ब्रह्मा जी भी उनकी लीलाओं को नहीं समझ पाए थे। भगवान कृष्ण के साथ ऐसी अनेक लीलाएँ जुडी हुई हैं जिनमें प्राणी मात्र के लिए सद्भाव और कल्याण का भाव मौजूद है। अपना शहर बाहर की स्वच्छता और साफ-सफाई में तो पूरे देश में अव्वल बना हुआ है लेकिन अपने अंदर के इंदौर को भी स्वच्छ बनाने की जरूरत है। शहर के ट्रेचिंग ग्राउंड से तो कचरे का ढेर साफ़ हो गया लेकिन अपने अंतर्मन में भरे हुए कचरे को भी साफ करना होगा।
आज रुक्मणी विवाह – प्रमुख संयोजक संजय मंगल ने बताया कि कथा में छठे दिवस 29 मई को रुक्मणी विवाह एवं शनिवार 30 मई को समापन दिवस पर सुदामा चरित्र के पश्चात फूलों की होली खेली जाएगी।