मधुमेह के वास्तविक कारणों, नियंत्रण और रिवर्सल को समझने के लिए एक विशेष सेमिनार 16 नवम्बर को
विश्व मधुमेह दिवस
*डॉ. संदीप जुल्का और उनकी टीम द्वारा विश्व मधुमेह दिवस पर जन जागरूकता कार्यक्रम*
• मधुमेह के वास्तविक कारणों, नियंत्रण और रिवर्सल को समझने के लिए एक विशेष सेमिनार 16 नवम्बर को
• वॉलंटियर्स द्वारा आमजन के रैंडम ब्लड शुगर टेस्ट किए गए
• हर पांच में से एक की ब्लड शुगर सामान्य से ज्यादा पाई गई और हर दस में से एक व्यक्ति मधुमेह से प्रभावित
*इंदौर। डायबिटीज़ को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि यह बीमारी बिना किसी स्पष्ट लक्षण के हमारे शरीर को धीरे-धीरे प्रभावित करती रहती है। शहर के वरिष्ठ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. संदीप जुल्का जो पिछले 25 वर्षों से विश्व मधुमेह दिवस पर जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजीत करते आ रहे है, इसी कड़ी में डॉ. संदीप जुल्का और उनकी टीम ने इस वर्ष दो चरणों में जन जागरूकता कार्यक्रम किया, प्रथम चरण में -भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के सहयोग से इंदौर में एक विशेष जनस्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा जन जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। दुसरे चरण में इंदौर में मधुमेह के वास्तविक कारणों, नियंत्रण और रिवर्सल को समझने के लिए “मधुमेह (रिवर्सल) — कब, कैसे और क्या कभी नहीं?” विषय पर आधारित महत्वपूर्ण सत्र 16 नवम्बर 2025 को सुबह 11 बजे से 12 बजे तक जाल सभागृह, साउथ तुकोगंज, इंदौर में एक विशेष सेमिनार का भी आयोजन किया जा रहा है ।
इस पहल का उद्देश्य नागरिकों में डायबिटीज़ (मधुमेह) के प्रति जागरूकता बढ़ाना, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच की आदत को प्रोत्साहित करना और साथ ही सड़क सुरक्षा के नियमों का महत्व समझाना था।
प्रथम चरण के कार्यक्रम में डॉ. संदीप जुल्का और उनकी टीम ने मंगलवार 11 नवम्बर 2025 को देवास नाका से राऊ के बीच स्थित बीपीसीएल के 6 चयनित पेट्रोल पंपों पर सुबह 9 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक वॉलंटियर द्वारा आमजन के रैंडम ब्लड शुगर टेस्ट किए गए। इस दौरान 500 से ज्यादा लोगों की शुगर जांच की गई। जांच में हर पाँच में से एक व्यक्ति की ब्लड शुगर सामान्य से बड़ी हुई पाई गई, जबकि हर दस में से एक को डायबिटीज पाई गई, दस में से दो लोग इस बात से अनजान थे कि उन्हें डायबिटीज हो सकती हैं। ये आंकड़े इस दिशा में समाज में फैली अनभिज्ञता को दिखाते हैं। अधिकतर लोग नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं कराते और तभी परीक्षण करवाते हैं जब बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।
यह अभियान केवल स्वास्थ्य परीक्षण तक सीमित नहीं रहा। डॉ. जुल्का की टीम ने इस अवसर को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भी उपयोग किया। पेट्रोल पंपों पर आने वाले वाहन चालकों, रिक्शा चालकों और नागरिकों को हेलमेट पहनने, ट्रैफिक नियमों का पालन करने और सड़क पर सतर्क रहने की सलाह दी गई। प्रत्येक व्यक्ति को उसकी शुगर रिपोर्ट कार्ड दी गई, जिसके पीछे सड़क सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण संदेश और ट्रैफिक नियमों की जानकारी अंकित थी, ताकि व्यक्ति अपने स्वास्थ्य के साथ-साथ सुरक्षा के प्रति भी जिम्मेदार बने।
इसी श्रृंखला में द्वितीय चरण में, इंदौर में मधुमेह के वास्तविक कारणों, नियंत्रण और रिवर्सल को समझने के लिए एक विशेष सेमिनार का भी आयोजन किया जा रहा है। “मधुमेह (रिवर्सल) — कब, कैसे और क्या कभी नहीं?” विषय पर आधारित यह महत्वपूर्ण सत्र 16 नवम्बर 2025 को सुबह 11 बजे से 12 बजे तक जाल सभागृह, साउथ तुकोगंज, इंदौर में आयोजित होगा। इसमें शहर के वरिष्ठ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और डायबिटीज़ विशेषज्ञ डॉ. संदीप जुल्का मार्गदर्शन देंगे, जो पिछले 25 वर्षों से मधुमेह, थायरॉइड, मोटापा एवं हार्मोन संबंधी रोगों के उपचार में विशेषज्ञता रखते हैं। सेमिनार में मधुमेह के वास्तविक कारणों, वैज्ञानिक नियंत्रण के तरीकों और रिवर्सल/रिमिशन की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा होगी। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली से शुगर लेवल नियंत्रित करने और कई मामलों में रिमिशन तक पहुंचने की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला जाएगा। “दिल जिद्दी है” कार्यक्रम के तहत प्रेरक जीवन कहानियाँ साझा की जाएंगी, और विश्व मधुमेह दिवस 2025 के अवसर पर प्रश्न–उत्तर सत्र में प्रतिभागियों को सीधे विशेषज्ञ से मार्गदर्शन पाने का अवसर मिलेगा।
इसके साथ साथ शुभारम्भ होगा “विकसित भारत पाठशाला” का जो युवाओं को सशक्त बनाने की अनूठी पहल है! नवयुवकों के सर्वांगीण विकास हेतु “विकसित भारत पाठशाला” कार्यक्रम का शुभारंभ किया जा रहा है। इस अभिनव पहल के अंतर्गत युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इमोशनल इंटेलिजेंस, कम्युनिकेशन स्किल्स, लीगल एस्पेक्ट्स और फाइनेंसियल लिटरेसी जैसे आधुनिक विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा कार्यक्रम का उद्देश्य है युवाओं को तकनीकी, मानसिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में उनकी सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना।"विकसित भारत पाठशाला" का पहला अध्याय आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस “इंपेटस टेक्नोलॉजी” द्वारा लिया जायेगा जिसके लिए हम उनके आभारी है।
“विकसित भारत पाठशाला” – बदलते भारत के बदलते युवाओं के लिए!
इस अवसर पर डॉ. संदीप जुल्का ने कहा, “हमारे अभियान के दौरान यह देखकर चिंता हुई कि हर पाँच में से एक व्यक्ति की ब्लड शुगर सामान्य से बड़ी हुई पाई गई और उनमें से कई को अपनी स्थिति की जानकारी भी नहीं थी। यह आंकड़ा बताता है कि हमें अब केवल इलाज नहीं, बल्कि समय पर जांच और जागरूकता को प्राथमिकता देनी होगी। हर व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में स्वास्थ्य जांच को उतनी ही गंभीरता से शामिल करना चाहिए जितनी से हम रोज़मर्रा के अन्य कार्य करते हैं।बीस वर्ष से ज्याद उम्र के व्यक्ति को वर्ष में एक बार शुगर टेस्ट करवाना कोई कठिन कार्य नहीं है, लेकिन यह आपकी आने वाली ज़िंदगी को सुरक्षित कर सकता है। हमारा उद्देश्य केवल जांच करना नहीं था, बल्कि यह समझाना था कि ‘स्वास्थ्य’ और ‘सुरक्षा’ दोनों जीवन के अभिन्न अंग हैं। जैसे सड़क पर सावधानी बरतना हमें दुर्घटनाओं से बचाता है, वैसे ही नियमित जांच हमें बीमारियों से बचा सकती है। एक सजग नागरिक वही है जो अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों की जिम्मेदारी स्वयं लेता है। इस अभियान के ज़रिए हम यही संदेश देना चाहते हैं कि बदलाव सरकारों या डॉक्टरों से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जागरूकता से शुरू होता है। जब हर व्यक्ति अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार बनेगा, तभी हम एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज की दिशा में आगे बढ़ पाएंगेl



