स्क्रीन में सिमटी युवा पीढ़ी और कॉफी हाउस की जिंदादिल बुजुर्ग टोली
स्क्रीन में सिमटी युवा पीढ़ी और कॉफी हाउस की जिंदादिल बुजुर्ग टोली
पांच दशक से रोज शाम सजती है सचेतक ग्रुप की चौपाल; उम्र 70 पार, लेकिन जज्बा आज भी जवान
शहर से लेकर देश दुनिया के किस्से और साफगोई का अंदाज
इंदौर। आज की युवा पीढ़ी स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में तेजी से सिमटती जा रही है। हाथ में दुनिया भर की जानकारी देने वाला मोबाइल है, लेकिन आमने-सामने बैठकर संवाद करने, रिश्तों को समय देने और जीवन के अनुभव साझा करने का समय कम होता जा रहा है। ऐसे दौर में इंदौर का एक बुजुर्ग समूह आज भी युवाओं को जिंदादिली से जीने का पाठ पढ़ा रहा है।
यह है शहर के ऐतिहासिक इंडियन कॉफी हाउस में पिछले पांच दशकों से रोज शाम सजने वाली ‘सचेतक ग्रुप’ की चौपाल। यहां उम्र महज एक आंकड़ा है। 60, 70 और 80 वर्ष की उम्र पार कर चुके सदस्य आज भी उसी उत्साह से मिलते हैं, जैसे वर्षों पहले मिला करते थे। चाय-कॉफी की चुस्कियों के साथ राजनीति, साहित्य, समाज, देश-दुनिया और जीवन के अनुभवों पर चर्चा होती है। हंसी-मजाक और ठहाकों के बीच यह चौपाल कई लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुकी है।
मोबाइल की दुनिया से अलग, संवाद की दुनिया
आज सोशल मीडिया पर हजारों संपर्कों के बावजूद आमने-सामने बैठकर सुख-दुख साझा करने वाले लोगों की संख्या कम होती जा रही है। इसके विपरीत सचेतक ग्रुप के सदस्य रोज शाम मिलते हैं, एक-दूसरे का हाल जानते हैं और पुराने किस्सों को नई यादों के साथ जीते हैं। यही संवाद और आत्मीयता इस समूह की सबसे बड़ी ताकत है।
सलोनी गार्डन में फिर दिखी जिंदादिली... सादगी के साथ दीवानगी भी
सचेतक परिवार का हाल ही में कनाड़िया रोड स्थित सलोनी गार्डन में सामूहिक मिलन आयोजित हुआ। उमस भरी शाम में करीब 40 मिनट तक चली अंताक्षरी ने माहौल को संगीतमय बना दिया। वरिष्ठ साथी सुभाष खंडेलवाल और कामरेड राजेश शर्मा ने पुराने फिल्मी गीतों की ऐसी झड़ी लगाई कि महफिल में मौजूद हर उम्र के लोग झूम उठे।
और सिने अभिनेता देवानंद का किस्सा
इस दौरान 1977 का वह किस्सा भी सुनाया गया, जब अभिनेता देवानंद ने डोनेशन देने के बजाय खुद साथियों को 500-500 रुपए की रसीद थमा दी थी। किस्सा सुनते ही महफिल ठहाकों से गूंज उठी।मेजबान रमेश जैन और उनके परिवार की आत्मीय मेहमाननवाजी के बीच मालवा के पारंपरिक कंडे पर सिके दाल-बाफले, कढ़ी, लड्डू और छाछ ने आयोजन को और यादगार बना दिया।
अनुभव और प्रतिष्ठा का अनूठा संगम
सचेतक ग्रुप की खासियत इसकी विविधता और सदस्यों का लंबा सामाजिक, राजनीतिक, साहित्यिक और पत्रकारिता अनुभव है। समूह में वरिष्ठ समाज सेवी सुभाष खंडेलवाल, भगवान सिंह चौहान किशनलाल सोमानी, कामरेड राजेश शर्मा, कविराज सत्येन वर्मा, वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन, अर्जुन सिंह राठौर, नारायण जोशी, शिवजी गुप्ता, चंद्रशेखर बीरथरे, अनिल जाजोदिया, मोहन वर्मा, गजानंद नीमगांवकर, कमलेश्वर सिंह सिसोदिया, भगवानसिंह जी, रामेश्वर जी,विमलज रोकड़, सुभाषजी जैन, विमलचंदज जैन, रामेश्वर गुप्ता, राजेंद्र बिल्लौर राजेश जैन और राजेंद्र दुबे सहित अनेक वरिष्ठ साथी शामिल हैं।
उम्र नहीं, जज्बा मायने रखता है
सचेतक ग्रुप से जुड़े युवा साथी कमलेश्वर बताते हैं कि मित्र कविराज सत्येन वर्मा की प्रेरणा से वे इस समूह से जुड़े। शुरुआत में उम्र के अंतर को लेकर झिझक थी, लेकिन वरिष्ठ सदस्यों के खुलेपन और स्नेह ने यह दूरी जल्द ही मिटा दी।
संदेश.. सक्रिय रहने के लिए उम्र नहीं उत्साह संवाद जरूरी
समाजसेवी एडवोकेट सुभाष खंडेलवाल कहते हैं कि सचेतक ग्रुप की यह चौपाल बताती है कि जीवन में सक्रिय रहने के लिए उम्र नहीं, बल्कि उत्साह और संवाद जरूरी है। मोबाइल और स्क्रीन की आभासी दुनिया के बीच यह समूह आज भी आमने-सामने बैठकर रिश्तों को जीने की परंपरा को जीवंत बनाए हुए है। शायद यही वजह है कि पांच दशक बाद भी इंडियन कॉफी हाउस की वह टेबल सिर्फ एक बैठक की जगह नहीं, बल्कि दोस्ती, अनुभव और जिंदादिली की पहचान बन चुकी है।


