विश्व फिजियोथेरेपी दिवस: दिल और स्ट्रोक के मरीजों को फिर से सामान्य जीवन जीने में मदद करती है फिजियोथेरेपी
विश्व फिजियोथेरेपी दिवस: दिल और स्ट्रोक के मरीजों को फिर से सामान्य जीवन जीने में मदद करती है फिजियोथेरेपी
इंदौर । विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर इस वर्ष लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि फिजियोथेरेपी केवल शरीर के दर्द को दूर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल की बीमारी और स्ट्रोक के बाद मरीज को दोबारा सामान्य जीवन में लाने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। हृदय रोग और स्ट्रोक आज बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रहे हैं। समय पर इलाज के साथ सही व्यायाम और नियमित शारीरिक गतिविधि मरीज की सेहत सुधारने में काफी मददगार हो सकती है। फिजियोथेरेपिस्ट मरीज की स्थिति को देखकर उसके लिए आसान और सुरक्षित व्यायाम तय करते हैं, जिससे शरीर की ताकत बढ़ाने, चलने-फिरने में सुधार करने, संतुलन बनाए रखने और रोजमर्रा के काम खुद करने में मदद मिलती है। स्ट्रोक के बाद कई मरीजों के हाथ-पैर में कमजोरी आ जाती है, उन्हें चलने में परेशानी होती है या शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है। ऐसे मरीजों में नियमित फिजियोथेरेपी से धीरे-धीरे शरीर की ताकत, चलने की क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसी तरह हृदय रोग से जूझ रहे मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार नियंत्रित और सुरक्षित व्यायाम करवाकर उनकी शारीरिक क्षमता और सहनशक्ति बेहतर करने का प्रयास किया जाता है। इंदौर की फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. पायल हरगांवकर (BPT, MPT – Advanced Manual Physiotherapist एवं Osteopath Practitioner) के अनुसार, फिजियोथेरेपी का मकसद सिर्फ दर्द कम करना नहीं, बल्कि मरीज को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करना और उसे ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने बताया कि खासतौर पर स्ट्रोक या हृदय रोग के बाद हर मरीज की समस्या अलग होती है, इसलिए सभी को एक जैसा व्यायाम नहीं दिया जा सकता। मरीज की उम्र, बीमारी, शरीर की ताकत और उसकी जरूरत को देखते हुए उपचार और व्यायाम की योजना बनाई जाती है। फिजियोथेरेपी में चलने की ट्रेनिंग, संतुलन सुधारने वाले व्यायाम, मांसपेशियों को मजबूत करने की एक्सरसाइज और रोजमर्रा के काम करने की ट्रेनिंग दी जाती है। जरूरत पड़ने पर सांस से जुड़े व्यायाम भी कराए जाते हैं। बढ़ती उम्र में भी फिजियोथेरेपी और नियमित व्यायाम काफी उपयोगी है। उम्र के साथ मांसपेशियां कमजोर होने, जोड़ों में जकड़न, चलने में परेशानी और गिरने का खतरा बढ़ सकता है। नियमित और सही तरीके से किया गया व्यायाम बुजुर्गों को सक्रिय और आत्मनिर्भर बनाए रखने में मदद कर सकता है। डॉ. हरगांवकर ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों को अपनी शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना चाहिए। लंबे समय तक बैठे रहने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार नियमित रूप से चलना-फिरना और व्यायाम करना जरूरी है। विश्व फिजियोथेरेपी दिवस का उद्देश्य भी लोगों को अपनी सेहत के प्रति जागरूक करना और यह समझाना है कि सही समय पर फिजियोथेरेपी और नियमित शारीरिक गतिविधि से व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ, सक्रिय और आत्मनिर्भर रह सकता है।


