मानव कल्याण के लिए व्यवसाय एवं शिक्षा में उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता’* विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
श्री वैष्णव कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, इंदौर द्वारा मानव कल्याण के लिए व्यवसाय एवं शिक्षा में उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
इंदौर, । श्री वैष्णव कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, इंदौर में *‘मानव कल्याण के लिए व्यवसाय एवं शिक्षा में उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता’* विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
पुरुषोत्तमदास पासारी , अध्यक्ष, श्री वैष्णव ग्रुप ऑफ ट्रस्ट ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा, शोध एवं व्यवसाय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अत्यंत आवश्यक हो गई है, लेकिन इसके उपयोग में आँकड़ों की पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी अनिवार्य है।
देवेंद्र कुमार मुच्छाल सचिव, श्री वैष्णव सहायक कपड़ा मार्केट समिति, इंदौर ने वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विभिन्न उपयोग क्षेत्रों पर प्रकाश डालते हुए इसकी बढ़ती उपयोगिता को रेखांकित किया।
श्री अरविंद गुप्ता, अध्यक्ष, शिक्षा समिति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज हमारे जीवन में पूरी तरह घुल-मिल गई है। हम ऐसे युग में प्रवेश कर चुके हैं, जहाँ इसे स्वीकार करने के साथ इसका विवेकपूर्ण उपयोग सीखना भी आवश्यक है। उन्होंने बिगड़े हुए हाथी की एक रोचक कहानी के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता को नियंत्रित करने तथा उसे सही दिशा में उपयोग करने का संदेश दिया।
श्री महेश चिमनानी सचिव, शिक्षा समिति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारी काल्पनिक बातों को आकार देने की क्षमता रखती है, लेकिन उसका उपयोग सही दिशा और उद्देश्य के साथ किया जाना चाहिए।
डॉ. परितोष अवस्थी, प्राचार्य, श्री वैष्णव कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानवीय संवेदनाओं को भी ग्रहण करने में सक्षम हो सकती है। उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग और उसकी संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।
प्रथम तकनीकी सत्र में कुमार रोहित,{ सहायक प्राध्यापक, एसजीएसआईटीएस}, इंदौर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को प्रभावी निर्देश देने की तकनीक समझाई। उन्होंने *क्लाउड और जेमिनी जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों की उपयोगिता तथा उनके व्यावहारिक प्रयोगों की जानकारी दी।* सत्र का संचालन **प्रो. विभोर ऐरन** ने किया तथा आभार **डॉ. मनीष दुबे**, कार्यक्रम संयोजक ने व्यक्त किया।
द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता एवं प्रबंधन शिक्षाविद् **डॉ. अंकिता जैन* "कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तीव्र प्रगति और उसकी व्यापक संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका विकास हमारी कल्पना से कहीं आगे पहुँच चुका है। उन्होंने शिक्षा एवं प्रबंधन के क्षेत्र में इसके प्रभावी उपयोग के विभिन्न आयामों को रेखांकित किया"। सत्र का संचालन **डॉ. अनिल शर्मा** ने किया।
संगोष्ठी में लगभग 120 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए तथा वक्ताओं को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। संगोष्ठी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक एवं उत्तरदायी उपयोग तथा तकनीकी विकास को मानवीय मूल्यों और जनकल्याण से जोड़ने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।
अंत में समस्त समिति समन्वयक प्रो विभोर ऐरन द्वारा दिया गया।
इंदौर, । श्री वैष्णव कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, इंदौर में *‘मानव कल्याण के लिए व्यवसाय एवं शिक्षा में उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता’* विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
पुरुषोत्तमदास पासारी , अध्यक्ष, श्री वैष्णव ग्रुप ऑफ ट्रस्ट ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा, शोध एवं व्यवसाय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अत्यंत आवश्यक हो गई है, लेकिन इसके उपयोग में आँकड़ों की पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी अनिवार्य है।
देवेंद्र कुमार मुच्छाल सचिव, श्री वैष्णव सहायक कपड़ा मार्केट समिति, इंदौर ने वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विभिन्न उपयोग क्षेत्रों पर प्रकाश डालते हुए इसकी बढ़ती उपयोगिता को रेखांकित किया।
श्री अरविंद गुप्ता, अध्यक्ष, शिक्षा समिति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज हमारे जीवन में पूरी तरह घुल-मिल गई है। हम ऐसे युग में प्रवेश कर चुके हैं, जहाँ इसे स्वीकार करने के साथ इसका विवेकपूर्ण उपयोग सीखना भी आवश्यक है। उन्होंने बिगड़े हुए हाथी की एक रोचक कहानी के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता को नियंत्रित करने तथा उसे सही दिशा में उपयोग करने का संदेश दिया।
श्री महेश चिमनानी सचिव, शिक्षा समिति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारी काल्पनिक बातों को आकार देने की क्षमता रखती है, लेकिन उसका उपयोग सही दिशा और उद्देश्य के साथ किया जाना चाहिए।
डॉ. परितोष अवस्थी, प्राचार्य, श्री वैष्णव कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानवीय संवेदनाओं को भी ग्रहण करने में सक्षम हो सकती है। उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग और उसकी संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।
प्रथम तकनीकी सत्र में कुमार रोहित,{ सहायक प्राध्यापक, एसजीएसआईटीएस}, इंदौर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को प्रभावी निर्देश देने की तकनीक समझाई। उन्होंने *क्लाउड और जेमिनी जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों की उपयोगिता तथा उनके व्यावहारिक प्रयोगों की जानकारी दी।* सत्र का संचालन **प्रो. विभोर ऐरन** ने किया तथा आभार **डॉ. मनीष दुबे**, कार्यक्रम संयोजक ने व्यक्त किया।
द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता एवं प्रबंधन शिक्षाविद् **डॉ. अंकिता जैन* "कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तीव्र प्रगति और उसकी व्यापक संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका विकास हमारी कल्पना से कहीं आगे पहुँच चुका है। उन्होंने शिक्षा एवं प्रबंधन के क्षेत्र में इसके प्रभावी उपयोग के विभिन्न आयामों को रेखांकित किया"। सत्र का संचालन **डॉ. अनिल शर्मा** ने किया।
संगोष्ठी में लगभग 120 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए तथा वक्ताओं को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। संगोष्ठी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक एवं उत्तरदायी उपयोग तथा तकनीकी विकास को मानवीय मूल्यों और जनकल्याण से जोड़ने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।
अंत में समस्त समिति समन्वयक प्रो विभोर ऐरन द्वारा दिया गया।


