कलियुग में मित्रता को नए सिरे से परिभाषित करने की जरुरत

कलियुग में मित्रता को नए सिरे से परिभाषित करने की जरुरत

कलियुग में मित्रता को नए सिरे से परिभाषित करने की जरुरत

मालवा मील अग्रवाल पंचायत द्वारा आयोजित भागवत ज्ञान यज्ञ में हुआ कृष्ण-सुदामा मिलन – भागवताचार्य का सम्मान 

इंदौर,। कलयुग में मित्रता को नए सिरे से परिभाषित करने की जरूरत है। ऊंचे पदों पर बैठे लोगों को अपने बाल सखाओं के दुख-दर्द में भागीदार बनने का संदेश भी इस प्रसंग से मिलता है। यह भारत भूमि का ही पुण्य प्रताप है कि यहां कृष्ण जैसे राजा और सुदामा जैसे स्वाभिमानी ब्राह्मण हुए। राजमहलों के दरवाजे झोपड़ी में रहने वालों के लिए जिस दिन खुल जाएंगे, उस दिन देश का प्रजातंत्र सार्थक हो उठेगा।

                   ये दिव्य विचार हैं राजस्थान के प्रख्यात भागवताचार्य पं. सतीशचन्द्र शर्मा के, जो उन्होंने श्री मालवा मील अग्रवाल पंचायत की मेजबानी में वाय एन रोड स्थित अग्रवाल धर्मशाला पर चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में सोमवार को कृष्ण-सुदामा मिलन के भावपूर्ण प्रसंग के दौरान व्यक्त किए। कथा स्थल पर कृष्ण-सुदामा मैत्री का उत्सव भी धूमधाम से मनाया गया। पंचायत के अध्यक्ष गोविन्द गर्ग भमोरी, मंत्री सुशील अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, अर्पण गर्ग एवं उमेश मंगल ने बताया कि व्यास पीठ का पूजन विधायक महेंद्र हार्डिया, महापौर परिषद के सदस्य पार्षद नंदकिशोर पहाड़िया, समाजसेवी राजेंद्र गर्ग समर्पण, गोविन्द गोयल अलंकार, गणेश गोयल, संतोष गोयल, अशोक अग्रवाल, सतीश मंगल, सुरेश मित्तल, मुकेश मित्तल, कल्याण अग्रवाल, सुभाष अग्रवाल, महेश अग्रवाल, विनोद बंसल, अनिल मंगल, रामचरण अग्रवाल, महेश मित्तल आदि ने किया। महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती मोनिका पोत्दार, सावित्री मित्तल, अनिता गोयल ने उत्सव की व्यवस्थाएं संभाली। मुख्य यजमान श्रीमती श्यामा-नरेश मित्तल, संजय चौधरी, नंदकिशोर कंदोई, शिव खंडेलवाल, अनोखी पोरवाल, गोपाल गर्ग, बबली गुप्ता, मनोहर अग्रवाल, गणपत गोयल आदि ने कथा समापन पर पंचायत की ओर से पं. शर्मा का शॉल-श्रीफल भेंट कर सम्मान किया। संचालन गोविन्द रामपाल मित्तल ने किया और आभार माना राजू गोयल ने। भागवताचार्य पं. शर्मा ने सबके सुखी और यशस्वी जीवन के शुभाशीष दिए। 

                आचार्य पं. शर्मा ने कहा कि कृष्ण और सुदामा का मिलन राजमहल और झोपड़ी के मिलन जैसा है। जिस दिन आज के राजा अपने महलों के दरवाजे सुदामा जैसे आम आदमी के लिए खोल देंगे, उस दिन देश में फिर कृष्णयुग और मजबूत प्रजातंत्र लौट सकता है। कृष्ण और सुदामा की मित्रता पूरी दुनिया में अनूठा उदाहरण है। मित्रता के नाम पर स्वार्थ और मोह-माया से बंधे रिश्ते ज्यादा दिनों तक नहीं चलते। कृष्ण-सुदामा जैसा मैत्री भाव पूरे विश्व की जरूरत है।