अपनी जड़ों से जुड़कर ही प्राप्त होगा खोया हुआ गौरव-पंडित देवेश्वर जोशी

अपनी जड़ों से जुड़कर ही प्राप्त होगा खोया हुआ गौरव-पंडित देवेश्वर जोशी

अपनी जड़ों से जुड़कर ही प्राप्त होगा खोया हुआ गौरव-पंडित देवेश्वर जोशी

ब्राह्मणत्व की रक्षा के लिए तीन दिवसीय संस्कार शाला संपन्न

इंदौर। श्री गुर्जर गौड़ ब्राह्मण नगर सभा (रजि.) इंदौर के तत्वावधान में आयोजित तीन-दिवसीय ब्राह्मणत्व संस्कार शाला संपन्न हुई। महर्षि गौतम एवं भगवान गणपति के पूजन के साथ शुरू हुए इस कार्यक्रम ने समाज के युवाओं और प्रबुद्धजनों को अपनी जड़ों की ओर लौटने और संस्कारों के वैज्ञानिक व आध्यात्मिक महत्व को समझने का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम में के शुभारंभ अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में पधारे मंदसौर के पंडित देवेश्वर जोशी ने तीन दिनों तक चले इस विशेष सत्र में ब्राह्मण समाज को उनके मूल कर्तव्यों का बोध कराया। उन्होंने कहा कि सृष्टि के प्रारंभ से ही ब्राह्मणों ने सम्राटों का मार्गदर्शन किया है, लेकिन आज यदि हम निस्तेज हुए हैं, तो इसके जिम्मेदार हम स्वयं हैं। अपनी जड़ों से कटने के कारण हमारी विश्वसनीयता घटी है। यदि समाज अपना खोया हुआ गौरव पुन: प्राप्त करना चाहता है, तो उसे शास्त्र की मर्यादा और नित्य कर्मों को अपनाना होगा।

कार्यक्रम के प्रथम दिन नगरसभा अध्यक्ष वीरेंद्र व्यास ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि जिस तरह हम पेट की क्षुधा शांत करते हैं, उसी तरह मन, बुद्धि और मस्तिष्क की शुद्धि के लिए ऐसे आयोजनों का होना अति आवश्यक है। अधिक मास में समाजजनों को इस संस्कार शाला का अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए। संस्कार शाला के संयोजक डॉ. सोमेश्वर जोशी ने सभी आगंतुक पदाधिकारियों और सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ब्राह्मण की जान उसका ब्राह्मणत्व है, जो उसे ब्रह्म तत्व से मिला है और यह नित्य पुण्य कर्मों से ही बढ़ता है। उन्होंने बताया कि सजीव और निर्जीव दोनों के 6 से लेकर 48 प्रकार के संस्कार होते हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार है, जिसके कारण हम ब्राह्मण और द्विज के नाम से जाने जाते हैं।

पंडित देवेश्वर जोशी ने संस्कार शाला के दूसरे दिन संध्या वंदन, गायत्री जाप और नित्य कर्मों का अभ्यास कराया। उन्होंने विशेष जोर देते हुए कहा कि जो संध्या नहीं करता, उसे किसी धार्मिक कार्य का पुण्य नहीं मिलता। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय पर संध्या करने वाले को कभी रोजगार की समस्या नहीं होती। इस सत्र में 16 वर्ष की आयु तक अनिवार्य यज्ञोपवीत धारण करने की महत्ता भी समझाई गई।

संस्कार शाला के अंतिम दिन समापन सत्र में सामूहिक शालिग्राम पूजन एवं विष्णु सहस्त्रनाम के साथ 1008 तुलसी पत्रों से अर्चन किया गया। पुरुषोत्तम मास के इस विशेष अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भगवान गणेश के 21 से से 21 लड्डुओं का भोग लगाया गया और मधुर संगीत के साथ आरती संपन्न हुई।

कार्यक्रम के अतिथि विद्याधाम मंदिर के संचालक दिनेश शर्मा, श्री गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज के सभी संस्थाओं के प्रमुख नगर सभा अध्यक्ष वीरेंद्र व्यास, पूर्व नगर सभा अध्यक्ष के.सी. शर्मा, शैक्षणिक न्यास के अरविंद तिवारी, सहकारी साख संस्था के विवेक व्यास, गौतम सोशल ग्रुप से सतीश व्यास, सांस्कृतिक संगठन की रंगीमा जोशी, माया श्याम ग्रुप की माया शर्मा, कार्यक्रम व्यवस्थापक जयंत उपाध्याय ने पं. देवेश्वर जोशी का पुष्प माला, शाल, श्रीफल, दुपट्टा और महर्षि गौतम की अष्टधातु प्रतिमा प्रदान कर सम्मान किया। अतिथियों द्वारा संस्कार शाला की प्रशंसा करते हुए ब्राह्मणत्व को बचाने के लिए समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया। अंत में अतिथियों द्वारा तीन दिवसीय संस्कार शाला के प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन कमलेश तिवारी ने किया तथा आभार जयंत उपाध्याय ने माना। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बड़ी संख्या समाजजन उपस्थित थे।