450  से अधिक लोगों ने मिलकर बनाई गणेश प्रतिमाएं, स्थानीय व्यवसायों को भी मिला मंच

450  से अधिक लोगों ने मिलकर बनाई गणेश प्रतिमाएं, स्थानीय व्यवसायों को भी मिला मंच

450  से अधिक लोगों ने मिलकर बनाई गणेश प्रतिमाएं, स्थानीय व्यवसायों को भी मिला मंच

उड़ते कबूतर ने द मिलेनियम स्कूल और हाई स्ट्रीट अपोलो के सहयोग से आयोजित की शहर की सबसे बड़ी पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमा निर्माण कार्यशाला

इंदौर। गणेशोत्सव के अवसर पर लोगों को रचनात्मकता, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता से जोड़ने के उद्देश्य से उड़ते कबूतर ने द मिलेनियम स्कूल और हाई स्ट्रीट अपोलो के सहयोग से शहर की सबसे बड़ी पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमा निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में 450 से अधिक लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और कलाकारों के मार्गदर्शन में अपने हाथों से गणेश प्रतिमाएं तैयार कीं।

कार्यशाला में बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी आयु वर्ग के प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने गणेश प्रतिमा निर्माण की पूरी प्रक्रिया को करीब से समझा और स्वयं प्रतिमाओं का निर्माण किया। इस दौरान पर्यावरण-अनुकूल तरीके से गणेश प्रतिमा बनाने और गणेशोत्सव को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी के साथ मनाने का संदेश भी दिया गया।

कार्यशाला के साथ एक विशेष स्थानीय बाजार भी लगाया गया, जिसमें इंदौर के करीब १५ स्थानीय व्यवसायों ने हिस्सा लिया। बाजार में शहरवासियों को विभिन्न प्रकार के स्थानीय उत्पादों को देखने और खरीदने का अवसर मिला। इस पहल के माध्यम से छोटे व्यवसायों और स्थानीय उद्यमियों को अपने उत्पादों और ब्रांड को नए ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए एक प्रभावी मंच भी मिला।

कार्यक्रम का समापन भक्ति संगीत संध्या के साथ हुआ। गायकों ने भजन और भक्तिगीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिनका उपस्थित लोगों ने जमकर आनंद लिया। कुछ ही समय में प्रतिभागी भी गायकों के साथ सुर मिलाते नजर आए। लोग भजन गाते, झूमते और नृत्य करते रहे, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो गया।

उड़ते कबूतर के शशांक गर्ग और ऋतिक साहू ने बताया कि गणेश प्रतिमा निर्माण कार्यशाला उनकी प्रमुख वार्षिक गतिविधियों में से एक है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य लोगों को एक साझा मंच पर लाना, स्थानीय व्यवसायों और उद्यमियों को प्रोत्साहित करना तथा लोगों को रचनात्मक और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि सामूहिक रूप से गणेश प्रतिमा बनाने और भक्ति संगीत से जुड़े इस आयोजन ने लोगों को एक-दूसरे के करीब आने का अवसर दिया और पूरे कार्यक्रम को विशेष बना दिया।

द मिलेनियम स्कूल की इंदरजीत कौर ने बताया कि स्कूल के विद्यार्थियों ने भी आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई। विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों में स्वयंसेवक के रूप में योगदान दिया और कार्यक्रम के संचालन में सहयोग किया। उनके लिए यह आयोजन केवल रचनात्मक गतिविधि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे उन्हें टीम भावना, जिम्मेदारी और सामाजिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण मूल्यों को सीखने का अवसर भी मिला।

स्थानीय व्यवसायों की भागीदारी, सामूहिक रूप से गणेश प्रतिमा निर्माण की रचनात्मक गतिविधि और भक्ति संगीत से सजे इस आयोजन ने गणेशोत्सव को एक जीवंत, पर्यावरण-अनुकूल और सामुदायिक स्वरूप प्रदान किया। आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने यह संदेश भी दिया कि उत्सवों को रचनात्मकता, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय उद्यमों के प्रोत्साहन के साथ मनाया जा सकता है।