दीदी की राखी’ ने बांधी स्नेह, विश्वास और राष्ट्र संकल्प की डोर
बुरहानपुर विशेष संवाददाता सुभाष सपकाले
दीदी की राखी’ ने बांधी स्नेह, विश्वास और राष्ट्र संकल्प की डोर
बुरहानपुर। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बुरहानपुर की ‘दीदी की राखी’ अब केवल एक राखी भेजने की परंपरा नहीं, बल्कि स्नेह, विश्वास और आत्मीय रिश्तों को सहेजने वाली 28 वर्षों पुरानी परंपरा बन चुकी है। विधायक, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) की ओर से हर वर्ष बुरहानपुर और नेपानगर विधानसभा के प्रत्येक बूथ से लेकर लोकसभा क्षेत्र, प्रदेश और देशभर में 1 लाख से अधिक स्नेही बंधुजनों तक विशेष संदेश के साथ रक्षा सूत्र भेजे जाते हैं। रक्षाबंधन के दिन बड़ी संख्या में भाई इस रक्षा सूत्र को अपनी कलाई पर बांधकर इस आत्मीय रिश्ते को निभाते हैं।
इस वर्ष भी 1 लाख 18 हजार से अधिक रक्षा सूत्र स्नेही बंधुजनों तक पहुंचाए गए। यह रक्षा सूत्र केवल रेशम की डोरी नहीं, बल्कि वर्षों से कायम स्नेह, विश्वास, अपनत्व और पारिवारिक रिश्ते का प्रतीक बन चुका है। इस परंपरा की खास बात यह है कि रक्षा सूत्र केवल डाक या किसी माध्यम से भेजकर औपचारिकता पूरी नहीं की जाती, बल्कि कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र के स्नेहीजनों, नागरिकों, सहयोगियों और परिवारों के घर-घर पहुंचकर स्वयं रक्षा सूत्र और संदेश देते हैं। इससे राखी के साथ व्यक्तिगत संपर्क और आत्मीयता का भाव भी जुड़ जाता है।
‘दीदी की राखी’ से जुड़े स्नेहीजनों के नाम और पते की सूची का हर वर्ष नवीनीकरण किया जाता है। पुराने स्नेहीजनों का विवरण अपडेट करने के साथ नए परिवारों को भी इस आत्मीय रिश्ते में जोड़ा जाता है। इस निरंतर प्रक्रिया ने 28 वर्षों में इस परंपरा को लगातार विस्तार दिया है।
इस रिश्ते की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यदि किसी कारणवश किसी भाई के घर ‘दीदी की राखी’ नहीं पहुंच पाती, तो वह सीधे अर्चना चिटनिस से संपर्क कर अपनी नाराजगी भी व्यक्त करता है। यह नाराजगी भी दरअसल उस आत्मीय अधिकार और रिश्ते की अभिव्यक्ति है, जिसे वर्षों में मजबूत किया गया है।
वहीं, किसी स्नेही भाई के दुनिया छोड़ जाने के बाद भी यह रिश्ता समाप्त नहीं होता। उसके परिवार को भी रक्षा सूत्र और शुभकामना संदेश भेजा जाता है। इस तरह व्यक्ति के साथ बना रिश्ता उसके परिवार तक आगे बढ़ता है और स्नेह की यह डोर निरंतर कायम रहती है।
*राखी के साथ इस वर्ष राष्ट्र संकल्प का संदेश*
इस वर्ष ‘दीदी की राखी’ के साथ भेजे गए विशेष संदेश में रक्षा सूत्र को राष्ट्र निर्माण के संकल्प से जोड़ा गया है। संदेश में कहा गया - “संशय को निष्ठा, निष्ठा को विश्वास, विश्वास को संकल्पित मन दें। भटके लोगों को राह, राह को ध्येय और ध्येय तक बढ़ते कदम दें।” संदेश के माध्यम से आपसी विश्वास और प्रेम के साथ राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को निभाने का आह्वान किया गया। प्रत्येक व्यक्ति अपने पुरुषार्थ, परिश्रम और सेवा से राष्ट्र की प्रगति में योगदान दे-इस भावना को रक्षा सूत्र के साथ घर-घर पहुंचाया गया।
वंदे मातरम’ के 150 वर्ष का गौरव भी संदेश में
इस वर्ष राखी के साथ भेजे गए कार्ड में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने की गौरवपूर्ण स्मृति को भी स्थान दिया गया है। कार्ड पर अंकित पंक्तियां- “रक्षाबंधन पर स्नेह, वंदे मातरम... आइये, आपसी विश्वास और प्रेम के साथ हम सब मिलकर बांधें सूत्र संकल्प का...” रक्षाबंधन के पारिवारिक स्नेह को राष्ट्रभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना से जोड़ती हैं। साथ ही भारतीय संस्कृति और अपनी गौरवशाली परंपराओं के प्रति जागरूकता का संदेश भी दिया गया। विक्रम संवत 2083 का हिंदू नववर्ष 19 मार्च 2026 को चौत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ हुआ, जिसका उल्लेख कार्ड के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना से जोड़ते हुए किया गया।
28 वर्षों से चली आ रही ‘दीदी की राखी’ की यह परंपरा आज रिश्तों को राजनीतिक पहचान से आगे ले जाकर आत्मीय पारिवारिक संबंधों में बदलने का माध्यम बन गई है। बुरहानपुर और नेपानगर के बूथ स्तर से शुरू होकर देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचने वाला यह रक्षा सूत्र हर वर्ष हजारों परिवारों को एक ही भाव से जोड़ता है-स्नेह, विश्वास, अपनत्व और राष्ट्र के प्रति संकल्प।
रक्षा सूत्र की यह डोर संदेश देती है-रिश्तों में विश्वास हो, मन में संकल्प हो, कर्म में सेवा हो और हृदय में राष्ट्र सर्वोपरि हो।


