शिक्षक राष्ट्र निर्माता, सम्मानित कर गौरवान्वित हो रहा समाज

शिक्षक राष्ट्र निर्माता, सम्मानित कर गौरवान्वित हो रहा समाज

शिक्षक राष्ट्र निर्माता, सम्मानित कर गौरवान्वित हो रहा समाज

शिक्षकों के मार्गदर्शन के बिना परिवार, समाज और राष्ट्र का विकास अधूरा : वैष्णव ब्राह्मण सेवा संघ का शिक्षक सम्मान समारोह संपन्न

इंदौर, शिक्षक केवल विद्यार्थियों को शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य को गढ़ने वाला शिल्पकार है। बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण से लेकर परिवार, समाज, शहर और देश के विकास तक शिक्षकों का योगदान सदियों से महत्वपूर्ण रहा है। शिक्षक के मार्गदर्शन के बिना राष्ट्र का नवनिर्माण अधूरा है। यह बाते अखिल भारतीय वैष्णव ब्राह्मण सेवा संघ, महिला प्रकोष्ठ जिला इंदौर द्वारा समाज के शिक्षक-शिक्षिकाओं का सम्मान समारोह मे अतिथियों के कही.

श्री हंसदास मठ, एयरपोर्ट रोड पर आयोजित समारोह में इंदौर सहित उज्जैन, देवास, धार, सीहोर और राजगढ़ (ब्यावरा) से आए शिक्षक-शिक्षिकाओं का सम्मान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवा संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं मध्यप्रदेश के पूर्व राज्य मंत्री योगेंद्र महंत, अध्यक्षता सेवा संघ के राष्ट्रीय महासचिव ओमप्रकाश बैरागी ने की। विशिष्ट अतिथि श्यामदास माधवाचार्य और गिरधारीदास वैष्णव उपस्थित रहे।कार्यक्रम की मुख्य सूत्रधार महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रेया धीरज वैष्णव रहीं। आयोजन में सरोज वैष्णव, कृष्णा वैष्णव, रेणु शास्त्री, सीमा बैरागी सहित महिला कार्यकारिणी की सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही। समारोह का संचालन इंदौर संस्कृत महाविद्यालय के आचार्य पं. गोपालदास पुजारी ने किया। आभार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमती श्रेया धीरज वैष्णव ने व्यक्त किया

संस्कार अनुशासन और मार्गदर्शन हमारे समाज को शिक्षकों के देन

समारोह में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक समाज की नई पीढ़ी को दिशा देने का सबसे महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उनके संस्कार, अनुशासन और मार्गदर्शन से विद्यार्थी न केवल अपने जीवन में सफलता प्राप्त करता है, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में भी योगदान देता है। ऐसे शिक्षकों का सम्मान वास्तव में ज्ञान, संस्कार और राष्ट्र निर्माण की परंपरा का सम्मान है।

जहां शिक्षकों का सम्मान महाराष्ट्र की नई सर्वाधिक मजबूत

समारोह में शिक्षक-शिक्षिकाओं का सम्मान करते हुए उनके शिक्षा, संस्कार और समाज निर्माण में योगदान को रेखांकित किया गया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि जिस समाज में शिक्षक का सम्मान होता है, वहां ज्ञान, संस्कार और राष्ट्र निर्माण की नींव और मजबूत होती है।