मीडिया को जामवंत बनकर समाज रूपी हनुमान की वास्तविक शक्ति को जागृत करना है* - अमिताभ अग्निहोत्री
*मीडिया को जामवंत बनकर समाज रूपी हनुमान की वास्तविक शक्ति को जागृत करना है* - अमिताभ अग्निहोत्री
*स्व बोध की मूल इकाई व्यक्ति है, इसमें स्व, मित्र, शत्रु बोध होना आवश्यक*
*राष्ट्रमाता के श्रीविग्रह को दैदीप्यमान रखने के लिए स्व बोध आवश्यक*
- इंदौर। देवर्षि नारद जयंती के अवसर पर आयोजित व्याख्यान में श्री अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा की स्व के बोध की मूल इकाई व्यक्ति है। उसमें अपने स्व का यह बोध होना चाहिए। व्यक्ति कहीं भी, किसी भी क्षेत्र में कार्यरत हो, स्व का बोध, मित्र का बोध व शत्रु का बोध होना आवश्यक है। विगत 2000 वर्षों की यात्रा में हमारा देश दर्जनों बार टूटा, जिसका एकमात्र कारण स्व का बोध जागृत नहीं होना था। ना हम मित्र बोध को ही समझ पाए व शत्रु बोध भी नहीं जान पाए। इसलिए देश टूटा। तीनों बोध जानना जरूरी है।
वैदिक वाड्मय से रामायण तक को किसी ने कह दिया कि यह माइथालॉजी है- यह षड्यंत्रपूर्वक किया गया था, ताकि हमारा आत्मबल क्षीण हो जाए।आत्मबल क्षीण होता है तो पराजय निश्चित होती है। भारत की श्रेष्ठता को सारे विश्व में बताने वाली हमारी संस्कृति व परंपरा को माइथालॉजी कह दिया, काल्पनिक कह दिया और यह हमारे मन में अंदर तक बैठ गया। जो तथ्य हजारों वर्ष पहले हमारे संज्ञान में आए, आज उसका महत्व विज्ञान के मान से समझ में आ रहा है। हमें बोध है कि कमतरी का भाव मुगलों व अंग्रेजों ने कराया।
प्रख्यात राष्ट्रीय पत्रकार, एडिटर इन चीफ राष्ट्रवाणी चैनल एवं एडिटर्स क्लब ऑफ इंडिया के अध्यक्ष श्री अमिताभ अग्निहोत्री ने रविवार प्रात: 11.30 बजे विश्व संवाद केन्द्र मालवा, इंदौर प्रेस क्लब एवं पत्रकारिता विभाग देअविवि इंदौर द्वारा आयोजित देवर्षि नारद जयंती कार्यक्रम में एसजीएसआईटीएस के गोल्डन जुबली सभागार में दिया। वे "भारतीय मीडिया में स्व का जागरण" विषय पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि सेनाएं भूगोल जीतती है, इतिहास नहीं। काशी, मथुरा, अयोध्या यह तीन स्थान राजनीतिक, आर्थिक केन्द्र नहीं थे, इनमें सोना-चांदी भी नहीं लगा था, फिर भी इन्हें नष्ट किया, क्योंकि यह भारतीयों के स्व जागरण के केन्द्र थे। हमारे स्व को कुचलने के लिए यह कृत्य किया गया। स्व बोध होता तो 500 वर्ष नहीं लगते अयोध्या में रामलला के मंदिर निर्माण में। उन्होंने कहा मीडिया कुछ उत्प्रेरक की भूमिका निभाता है, लेकिन यह सब समाज से आते हैं।व्यक्ति निर्माण की टकसाल समाज है - शिक्षक, पत्रकार, उद्योगपति, कलाकार, गुंडा यह सभी समाज से ही आते हैं। अपने समाज में स्व जागृत हो जाएगा, तो सब ठीक होगा। समाज की जिम्मेदारी हम सब की है, जहां-जहां मुगल व अंग्रेज नहीं पहुंच पाए, वहां कोई समस्या नहीं है। इन्होंने हमारा आत्मबल निस्तेज किया । राम मंदिर के पुनर्रोद्धार से भारत का आत्मबल जागृत हुआ है।
श्री अग्निहोत्री ने कहा जामवंत ने हनुमानजी को स्व का बोध कराया। हनुमानजी का स्व बोध नहीं जागता तो समुद्र का लंघन नहीं होता, रामायण नहीं होती। समुद्र लंघन हम सबको करना है, मीडिया को भी करना है। समाज के ऊपर जमी धूल को हटाना होगा। जैसे पंखा करने से कोयले पर जमी राख हटती है, तो ज्वाला भड़कती है। उसी प्रकार समाज में स्व का बोध जगाना जरूरी है। आत्ममलिनता का भाव समाज के मन में गहरा है, ऐसे मन से देश खड़ा नहीं होता, इसलिए समाज में आत्मविश्वास का जागरण स्व के बोध से होगा। मित्र बोध व शत्रु बोध नहीं होने से मृत्यु होती है या मारे जाते हैं। हम शत्रु बोध में कमजोर थे, इसलिए हम जीती हुई बाजी हारे, पृथ्वीराज चौहान की हार इसका उदाहरण है। सैकड़ों युद्ध ऐसे हैं, जिसमें ऐसा हुआ। यह उस देश की स्थिति है, जहां योगेश्वर कृष्ण ने गीता हमें दी है। गीता के बाद भी हमने गीता की ही लीपा-पोती कर दी। कायरता का राष्ट्रीय अभियान भारत में चला, हमने समाज की जागृति के लिए कुछ नहीं किया। भगवान के सारे अवतार धर्म स्थापना के लिए हुए, देवी अवतार भी चंड-मुंड के विनाश के लिए हुए, हमने अवतारों से जो ग्रहण करना था, वह नहीं किया। हमने अपने नायकों का वैसा आख्यान नहीं किया, जिससे आने वाली पीढ़ी प्रेरणा ले सके। यह सैकड़ों साल की बीमारी है। यह एकदम से नहीं जाएगी।मुगलों ने दो बार ,अंग्रेजों ने दो बार मनुस्मृति में परिवर्तन किया। मूर्खता का अखंड साम्राज्य भारत में चला, हमने पीछे पलटकर नहीं देखा।
उन्होंने कहा भारत ने अपने हृदय में दो मूर्ति स्थापित की। वह है राम और कृष्ण। राम और कृष्ण का रंग श्यामल है। समुद्र का व आकाश का रंग भी श्यामल है, उनकी कोई सीमा नहीं। राम-कृष्ण की स्थापना हुई, लेकिन शक्ति और सामर्थ्य को जगाने के लिए कोई काम नहीं किया। हमें कोई चीज याद नहीं, जिससे आत्मबल पैदा हो। हमने अपने तमाम अक्षमताओं को भगवान के समक्ष रख दिया। देश के 90 प्रतिशत लोग राष्ट्र निर्माण में लग जाएंगे तो देश बहुत आगे बढ़ेगा। हम हमारे ग्रंथों की पुनर्स्थापना करे, राष्ट्र का कलश बार-बार स्थापित होता है, उसके लिए प्राण शक्ति लगती है। दक्षिणेश्वर काली की स्थापना दलित रानी ने की थी। रामानंदाचार्य के शिष्य थे कबीर दास, रैदास। यह जानकारी हमें होना चाहिए। आत्म चेतना का एक भी टूलकीट हमारे पास है ही नहीं। इसके लिए स्व का बोध जरूरी है। इसके लिए हमें जो भी करना पड़े, वह करें। देश को बताइए हिंदू धर्म आत्मिक उन्नयन का आधार है। सनातन ही ऐसा धर्म है, जो पूरे ब्रह्माण्ड में जिसके जन्म की दिनांक नहीं है, जिसका कोई प्रवर्तक नहीं, जिसकी एक किताब नहीं। भारत का स्व सनातन रहेगा। भारत की आत्मा का नाम सनातन है। जो अक्षर से जुड़ा है, वह अमर है। जो सत्ता से जुड़ा है, वह नष्ट हो जाते हैं। राष्ट्रमाता के विग्रह को चमकाते रहना है, हम अतीत पर गर्व करें, अतीत की त्रुटियों से सबक लें। मूर्ख बनने से बचे, भारत का माथा ऊंचा करें। अब बौद्धिक युद्ध का समय है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए समाजसेवी व कलाधर्मी सानंद के अध्यक्ष जयंत भिसे ने कहा नारद देवों के भी ऋषि थे। श्री भिसे ने एक कहानी सुनाते हुए कहा कि भगवान ने कहा कि मानव जब भी मेरे मंदिर में आता है, अपनी समस्याएं मेरे ऊपर डालकर जाता है। जबकि सबको मालूम है मेरे हाथ में कुछ नहीं। मैं कहां जाऊं, जहां मुझे शांति मिले। अलग-अलग देवताओं ने, अलग-अलग सुझाव दिए। भगवान ने देवर्षि नारद से पूछा आप बताए मैं कहा जाऊं? जहां मैं मेरे स्व बोध को जागृत करने के लिए शांति से काम कर सके, जहां मुझे शांति मिले। नारदजी ने कहा प्रभु मैं एक ऐसी जगह जानता हूं, जहां आप जाएंगे आपको शांति मिलेगी। तब नारदजी ने कहा कि आप मानव के हृदय में बैठ जाओ। मानव कभी हृदय में झांकेगा नहीं, आप वहां शांति से रह सकोगे। जिस मानव ने हृदय के अंदर देखा उसने आनंद को प्राप्त किया, स्व को प्राप्त किया।
कार्यक्रम की आरंभ अतिथियों द्वारा देवर्षि नारद व माता सरस्वती के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुई। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक करदम थे तथा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री जयंत भिसे थे। कार्यक्रम का संचालन सुश्री अनुभूति निगम ने किया तथा सुश्री जाह्नवी ने वन्देमातरम लिया । दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात पं. माधव शर्मा ने नारद स्त्रोत का पाठ किया। आभार पूर्व प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने प्रकट किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पत्रकार, संपादक, लेखक, सोशल मीडिया इन्फ्लुएन्सर सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।


