देवी अहिल्या विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया गया मध्य, पश्चिम, दक्षिण और दक्षिण पश्चिम क्षेत्रों का संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन
इंदौर।केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने की क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में राजभाषा विभाग सरकारी काम-काज में हिंदी के प्रगामी प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत
सम्मेलन में दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम क्षेत्रों में स्थित विभिन्न बैंकों/उपक्रमों/कार्यालयों को राजभाषा कार्यान्वयन में उत्कृष्ट कार्य हेतु पुरस्कृत किया गया. सम्मेलन में कुल 80 पुरस्कार प्रदान किए गए।
नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों को नराकास राजभाषा सम्मान से सम्मानित किया गया।
केन्द्र सरकार के कार्यालयों, बैंकों एवं उपक्रमों को विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत राजभाषा में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु पुरस्कार प्रदान किए गए
मंचासीन अतिथिगण- गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार
इंदौर के सांसद शंकर लालवानी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के कुलपति डॉ. राकेश संघई हिंदी विद्वान जे. एल. रेड्डी
वरिष्ठ साहित्यकार श्री नर्मदा प्रसाद मध्य, पश्चिम, दक्षिण और दक्षिण पश्चिम क्षेत्र में राजभाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के निष्पादन हेतु पुरस्कार विजेताओं को प्रमाण पत्र तथा शील्ड देकर सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों का चयन सूचना प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से प्राप्त तिमाही प्रगति रिपोर्ट के आधार पर किया गया है।
विभिन्न बैंकों, साहित्यिक संस्थाओं की और अन्य स्टॉल भी लगाए गए। सम्मेलन में राजभाषा विभाग की सचिव, सहित बड़ी संख्या में केन्द्रीय सरकारी कार्यालयों/बैंकों/उपक्रमों आदि के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। श्री मध्य भारत साहित्य समिति, हैदराबाद हिंदी प्रचार सभा, ट्राईफ़ेड, बावा, मृगनयनी और कई बैंकों के स्टाल लगाये गये।
कार्यक्रम के अध्यक्ष गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने कार्यक्रम में उपस्थित सोलह सौ से अधिक हिंदी कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें यह ध्यान रखना है कि भाषा बाधा न बने सेतु बने। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ते हुए आत्मनिर्भरता की ओर दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं को शिक्षा और ज्ञान का मूल आधार बनाकर इसी आत्मविश्वास को सुदृढ़ किया गया है। साथ ही गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में हिंदी और भारतीय भाषाओं को प्रशासन, तकनीक और वैश्विक संवाद से जोड़ने का जो व्यापक दृष्टिकोण सामने आया है, उसने राजभाषा कार्यान्वयन को एक नई दिशा दी है। आज राजभाषा विभाग केवल अनुपालन का विभाग नहीं रहा, बल्कि नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण का अग्रदूत बन चुका है।
स्थानीय संसद शंकर लालवानी ने कहा कि इंदौर महात्मा गांधी जी के हिंदी आंदोलन की भी भूमि रहा है।
सचिव राजभाषा विभाग ने स्वागत संबोधन में कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व और विरासत पर गर्व एवं गुलामी की जंजीर से मुक्ति के आह्वाहन से देश में हिंदी के प्रयोग में आमूल-चूल परिवर्तन आया है।
माननीय गृह मंत्री के मार्गदर्शन में विभाग ने यह स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है कि राजभाषा नीति को केवल अनुपालन तक सीमित न रखकर उसे सृजन, संवाद और सहभागिता से जोड़ा जाए। इसके अनुपालन में राजभाषा विभाग ने समय के साथ अपने काम करने के तरीके में कई नए और उपयोगी बदलाव किए हैं। अब राजभाषा का कार्य केवल आदेशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह तकनीक के माध्यम से आगे बढ़ रहा है। ऑनलाइन प्रणाली से प्रगति की निगरानी, ई-ऑफिस में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा, मानकीकृत शब्दावली और आधुनिक भाषा-तकनीक के उपयोग से विभाग की कार्यकुशलता और पारदर्शिता बढ़ी है।
राजभाषा विभाग द्वारा भारतीय भाषा अनुभाग की स्थापना की गई है। इसके माध्यम से गृह मंत्री राज्यों के साथ उनकी अपनी आधिकारिक भाषाओं में सीधा और सार्थक संवाद स्थापित कर रहे हैं। भारतीय भाषा अनुभाग, केंद्र और राज्यों के बीच भाषायी सेतु के रूप में कार्य करते हुए प्रशासनिक संवाद को अधिक संवेदनशील, विश्वासपूर्ण और परिणाम उन्मुख बना रहा है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हिंदी के प्रभावी प्रयोग को सुदृढ़ करने के लिए राजभाषा विभाग द्वारा विकसित ‘हिंदी शब्द सिंधु’ एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल है। यह डिजिटल शब्दकोश तकनीकी और वैज्ञानिक शब्दावली के मानकीकरण एवं विस्तार के माध्यम से हिंदी को समकालीन परिवेश से जोड़ रहा है। इससे युवा शोधार्थियों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों को अपनी भाषा में अभिव्यक्ति और नवाचार का आत्मविश्वास मिला है।
देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय के कुलपति राकेश सिंघई ने सभा को संबोधित करते हुए राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय की दूरदर्शीभूमिका की विशेष रूप से प्रशंसा की और विभाग द्वारा राजभाषा के कार्यान्वयन को सुदृढ़ बनाने हेतु अपनाई गई नवोन्मेषी पहल की सराहना की।
वरिष्ठ साहित्यकार नर्मदाप्रसाद उपाध्याय ने मध्य प्रदेश में ज्ञान विज्ञान की पुस्तकों पर हिंदी में हो रहे कार्य का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें हिंदी को विश्व के ललाट पर दमकती बिंदी के स्थान पर पहुंचाने का संकल्प लेना होगा।
तेलुगु भाषी हिंदी विद्वान प्रोफ़ जे.एल रेड्डी ने कहा दक्षिण में हिंदी का समृद्ध इगिहास है। हिंदी ने हमें बनाया है। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में सात विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाती है। हिंदी ने बहुत दक्षिण भारतीयों के लिए आजीविका का द्वार खोला है। हैदराबाद से हिंदी के अनेक पत्र पत्रिका प्रकाशित होते हैं। दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा और हैदराबाद हिंदी प्रचार सभा का दक्षिण में हिन्दी के प्रसार में अतुल्य योगदान है।