शालिनी ताई मोघे की 15वीं पुण्यतिथि पर बाल निकेतन संघ में दो दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला
*शालिनी ताई मोघे की 15वीं पुण्यतिथि पर बाल निकेतन संघ में दो दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला*
-30 जून और 1 जुलाई को बाल निकेतन संघ में जुटेंगी समाजसेवा और शिक्षा जगत की प्रतिष्ठित हस्तियां
इंदौर '। कुछ व्यक्तित्व अपने जीवनकाल से कहीं आगे तक समाज को दिशा देते हैं। बाल शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली पद्मश्री स्वर्गीय शालिनी ताई मोघे ऐसी ही विभूतियों में शामिल हैं। उनकी शिक्षण पद्धति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा दृष्टिकोण आज भी अनेक संस्थाओं और कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। उनकी 15वीं पुण्यतिथि के अवसर पर पागनीस पागा स्थित बाल निकेतन संघ द्वारा 30 जून और 1 जुलाई को दो दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया जाएगा। संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य शालिनी ताई मोघे के सेवा, शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। आयोजन के तहत समाजसेवा, शिक्षा और मानवीय सरोकारों से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए जाएंगे। कार्यक्रम बाल निकेतन संघ परिसर, 62 पागनीस पागा, इंदौर में आयोजित होगा।
व्याख्यान श्रृंखला के पहले दिन 30 जून को प्रातः 11:30 बजे नर्मदालय, मंडलेश्वर की संस्थापक भारती ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी। जनजातीय समुदायों के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र में उनके कार्यों को व्यापक पहचान मिली है। उन्होंने अपना जीवन नर्मदा घाटी के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया है। वहीं दूसरे दिन 1 जुलाई को प्रातः 10:30 बजे लक्ष्य फाउंडेशन, पुणे की संस्थापक अनुराधा प्रभुदेसाई मुख्य अतिथि होंगी। वे भारतीय सैनिकों, वीर नारियों और शहीद परिवारों के सम्मान एवं सहयोग के लिए लंबे समय से कार्य कर रही हैं। उनकी संस्था नागरिकों और सशस्त्र बलों के बीच संवाद और संवेदनशीलता का सेतु बनाने के साथ ही युवाओं में राष्ट्रसेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को प्रोत्साहित करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
बाल निकेतन संघ की सचिव डॉ. नीलिमा अदमणे ने कहा, "शालिनी ताई मोघे ने ऐसे समय में बाल शिक्षा और महिला विकास के क्षेत्र में कार्य प्रारंभ किया था, जब इन विषयों पर व्यापक स्तर पर चर्चा भी नहीं होती थी। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि शिक्षा केवल ज्ञान देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी साधन भी है। उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित यह व्याख्यान श्रृंखला उनके विचारों और मूल्यों को समाज के बीच जीवित रखने का एक प्रयास है। हमें विश्वास है कि दोनों दिनों के सत्र प्रतिभागियों को प्रेरित करने के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने में भी सहायक होंगे।"


