बच्चों में बढ़ता टाइप-1 डायबिटीज गंभीर राष्ट्रीय चुनौती- डॉ. रविंद्र नांदेडकर

बच्चों में बढ़ता टाइप-1 डायबिटीज गंभीर राष्ट्रीय चुनौती- डॉ. रविंद्र नांदेडकर

बच्चों में बढ़ता टाइप-1 डायबिटीज गंभीर राष्ट्रीय चुनौती- डॉ. रविंद्र नांदेडकर

इंदौर। भारत में बच्चों में तेजी से बढ़ता टाइप-1 डायबिटीज (बाल मधुमेह) अब एक गंभीर राष्ट्रीय स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। अनुयश आरोग्य प्रतिष्ठान एवं मधुमेह मुक्त भारत अभियान के तत्वावधान में आयोजित इस वार्ता में उन्होंने कहा कि समय पर पहचान, जनजागरूकता और सामाजिक सहयोग से हजारों बच्चों का भविष्य बचाया जा सकता है। यह बात राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात मधुमेह शोधकर्ता डॉ. रविंद्र नांदेडकर ने इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में कही।

डॉ. नांदेडकर ने टाइप-1 डायबिटीज इंडेक्स के हवाले से बताया कि भारत में लगभग 9.9 लाख बच्चे इस बीमारी से प्रभावित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटो-इम्यून रोग है, जिसमें अग्न्याशय इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। ऐसे बच्चों को जीवनभर इंसुलिन और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की जरूरत होती है।

उन्होंने बताया कि पीडि़त बच्चों की मदद के लिए अनुयश आरोग्य प्रतिष्ठान देशभर में बाल मधुमेही दत्तक योजना चला रहा है। इसके तहत 18 वर्ष तक के बच्चों का 100 प्रतिशत नि:शुल्क पंजीकरण, चिकित्सकीय मार्गदर्शन और संस्थान द्वारा विकसित हर्बल औषधि डायबा-टी उपलब्ध कराई जाती है। अब तक 2,000 से अधिक बच्चे इसका लाभ उठा चुके हैं। इस अवसर पर हर्बायू वेलनेस इंडिया के सीओओ विजय निंबालकर और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रचारक विशाल खानवलकर ने भी समाज से इस अभियान में सहयोग की अपील की।