पुण्य से पलायन करेंगे तो कभी धर्म से नहीं जुड़ पाएँगे- राष्ट्र संत सुधासागर म.सा.
पुण्य से पलायन करेंगे तो कभी धर्म से नहीं जुड़ पाएँगे- राष्ट्र संत सुधासागर म.सा.
दलाल बाग में देशभर से आए भक्तों और शिष्यों की विशाल धर्मसभा में प्रेरक आशीर्वचन-प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक होगी प्रवचनों की अमृत वर्षा
इंदौर, । सुख के दिनों में धर्म करने वाला व्यक्ति शुभ कर्मों वाला होता है। चिंतन करें कि हम जो धनार्जन कर रहे हैं, जो रुपया पैसा कमा रहे हैं उसका उपयोग पाप के लिए करेंगे या धर्म के लिए। कमाई करते समय जो विचार आपके मन में चल रहा होता है, उस धन का उपयोग आप उसी तरह करोगे। यदि आपके मन में कमाई के वक्त यह विचार आया होगा कि मैं इस धन का उपयोग मंदिर बनाने या किसी अन्य सेवा के लिए करूँगा तो उस धन का उपयोग सही दिशा में होगा। पुण्य से पलायन करेंगे तो कभी धर्म से नहीं जुड़ पाएँगे और पाप से भागेंगे तो सीधे धर्म से जुड़ेंगे।
ये दिव्य और प्रेरक विचार हैं संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज के, जो उन्होंने सोमवार को सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में दलाल बाग के विशाल विद्या-सुधा सत्संग मंडप में आयोजित चातुर्मास की धर्मसभा में उपस्थित देशभर से आए समाज बंधुओं को संबोधित करते हुए किए। प्रारम्भ में चक्रवर्ती नवीन-आनंद गोधा, आनंद-अंतिका गोधा परिवार ने दीप प्रज्वलन किया। बहू मंडल सुखलिया द्वारा मंगलाचरण की प्रस्तुति दी गई। पाद प्रक्षालन का लाभ विनोद-सरोज गोधा और अजय-विजय बडजात्या परिवार ने लिया। प्रारम्भ में धर्म प्रभावना समिति की ओर से नवीन गोधा, हर्ष जैन, अशोक डोसी, मनीष गोधा एवं आकाश कोयला ने साधकों की अगवानी की। चातुर्मास के दौरान दलाल बाग पर प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक धर्मसभा में राष्ट्रसंत सहित सभी संत विद्वानों के प्रवचनों की अमृत वर्षा होगी। चातुर्मास के दौरान विभिन्न अनुष्ठान भी होंगे।
राष्ट्रसंत ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सुख के दिन आते ही हम अधर्मी बन जाते हैं। सुखी व्यक्ति को धर्म से जोड़ने से ज्यादा सरल काम है एक दुखी व्यक्ति को धर्म से जोड़ना। मैं जब-जब आशीर्वाद देता हूँ, मेरे मन में यही भाव रहता है कि तुम सब लोग धर्म से जुड़े रहो। हमारे यहाँ दान का नहीं, दान किस पात्र को दिया है-इसका महत्व है। यदि हमारे द्वारा दिए गए दान का उपयोग खोटे काम में होगा तो उसके पाप के भागीदार भी हम ही बनेंगे इसलिए जब भी दान दें, इस बात का ध्यान जरुर रखें कि उसका उपयोग सही जगह पर हो। हम सुबह मंदिर जाकर दर्शन करते हैं कि भगवान हमारे दिन को अच्छे से निकालना। इसी तरह शाम को भी जरुर मंदिर जाएं और भगवान के प्रति आभार व्यक्त करें कि मेरा दिन अच्छा निकल गया। किसी के प्रति आभार मानना नहीं भूलना चाहिए।
राष्ट्रसंत ने कहा कि मनुष्य की सबसे गन्दी आदत है कोई वस्तु देखकर नीयत खराब करने की। बाजार में एक चीज लेने जाते हैं और दूसरी वस्तु देखकर नीयत खराब कर लेता है। मनुष्य तय नहीं कर पाता है कि उसे करना क्या है। असीम इच्छा खत्म करने वाला व्रती कहलाता है। हम यदि जीवन में प्रकाश चाहते हैं तो इसका आशय है कि हमें अँधेरे का अनुभव है। आँखों की कीमत तभी पता चलेगी जब हमें अंधत्व का अनुभव होगा। अपनी आँखों से जीवों को बचाने का पुण्य जरुर करना चाहिए। मैंने जीवन में जितने कदम उठाए हैं, उतनी चीटी और सूक्ष्म जीवों को बचाया है। अपनी आँख का सही उपयोग करने का पुण्य भी हमें मिलता है।


