त्वरित निर्धारण ठीक नहीं। धर्मेंद्र श्रीवास्तव,
"लेख"
त्वरित निर्धारण ठीक नहीं,
धर्मेंद्र श्रीवास्तव,
"इंडियन न्यूज़ अड्डा"
जिला ब्यूरो चीफ़
जिला धार,
सदैव यह देखा है कि,
किसी के एक व्यवहार,
एक बार कहे गए शब्द या उसके द्वारा की गई व्यवहार गत त्रुटि के आधार पर,
हम उस मनुष्य को घमंडी, स्वार्थी, भला या बुरा
मान लेते हैं,
किंतु?
हम उसकी परिस्थिति उसके जीवन में चल रही उहापोह को नहीं समझते,
अपने मन से ही वह अच्छा है बुरा है,
निर्णय कर लेते हैं,
और उसके व्यवहार को गलत या सही ठहरा दिया जाता हैं,
किंतु?
व्यवहार का मूल्यांकन और व्यक्ति का अंतिम निर्णय दो अलग-अलग बातें है,
विवेक के स्तर पर धैर्य पूर्वक मनन करने के पश्चात ही अमुक व्यक्ति को परिभाषित करना चाहिए ऐसा हम अपने लिए भी तो चाहते हैं, कि उसने ना सोचा ना समझा अपने मन से मुझे जैसा सोचा वैसा मान लिया धैर्य पूर्वक मनन तो करना था थोड़ा ठहर कर आरोप मढ़ना था, सकारात्मकता पूर्वक संकल्पित होकर किसी भी व्यक्ति के बारे में पूर्वानुमान से पहले धैर्य पूर्वक मनोयोग से विचार करना ही उत्तम माना गया हैं, आत्म चिंतन के पश्चातनिर्णय लेना ही वास्तविक पक्ष की ओर ले जाने में सहयोगी सिद्ध हों सकता है, और आप विवेकशील व्यक्तियों की श्रेणी में आगे की पंक्तियों में गिने जा सकते हो।
इसलिए......
त्वरित निर्धारण ठीक नहीं।


