इंडेक्स नर्सिंग कॉलेज में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पर संगोष्ठी, डिजिटल युग की चुनौतियों पर हुई चर्चा

इंडेक्स नर्सिंग कॉलेज में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पर संगोष्ठी, डिजिटल युग की चुनौतियों पर हुई चर्चा

डिजिटल दुनिया के बढ़ते प्रभाव से मानसिक स्वास्थ्य पर असर

इंडेक्स नर्सिंग कॉलेज में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पर संगोष्ठी, डिजिटल युग की चुनौतियों पर हुई चर्चा

इंदौर। डिजिटल तकनीक और बदलती जीवनशैली के बीच मानसिक स्वास्थ्य आज एक महत्वपूर्ण सामाजिक चुनौती बनकर उभर रहा है। मानसिक तनाव, डिजिटल दुनिया के बढ़ते प्रभाव को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से इंडेक्स नर्सिंग कॉलेज में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों, उनके समाधान और समय पर सहायता लेने की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए।विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मालवांचल यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. संजीव नारंग ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि मनोवैज्ञानिक समस्याओं की समय पर पहचान, उचित उपचार और विशेषज्ञों से परामर्श बेहद जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करने के बजाय इसे समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा मानना चाहिए। जागरूकता और संवेदनशील व्यवहार के माध्यम से लोगों को मानसिक समस्याओं से निपटने में सहयोग दिया जा सकता है।

डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर

संगोष्ठी में डॉ. स्मृति जी. सोलोमन ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने जीवन को आधुनिक और सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके बढ़ते उपयोग के दुष्प्रभाव भी सामने आ रहे हैं। आज हर उम्र के लोग डिजिटल दुनिया से प्रभावित हो रहे हैं। वास्तविक जीवन में संवाद, आपसी मेलजोल और भावनात्मक जुड़ाव की जगह स्क्रीन पर अधिक समय बिताने की आदत मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में तकनीक का संतुलित उपयोग और वास्तविक जीवन से जुड़ाव बनाए रखना आवश्यक है।डॉ. पायल शर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के साथ व्यक्तिगत स्तर पर पहल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेना पर्याप्त नहीं है। यदि कोई व्यक्ति मानसिक परेशानी का सामना कर रहा है, तो उसे अपनी समस्या स्वीकार करते हुए विशेषज्ञ की मदद लेने के लिए आगे आना चाहिए। 

युवाओं की समस्याओं को समझना जरूरी

डॉ. नितिन चिचोलकर ने ‘किशोरों एवं युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां और सहयोग’ विषय पर चर्चा की। उन्होंने किशोरों और युवाओं की मानसिक स्थिति को समझने, उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनने तथा उन्हें उचित सहयोग देने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। परिवार, शिक्षकों और समाज की सकारात्मक भूमिका युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बेहतर दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक हो सकती है। संगोष्ठी में इस बात पर जोर दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य समग्र स्वास्थ्य का अभिन्न अंग है। समय पर सहायता, संवेदनशील व्यवहार, सही मार्गदर्शन और उचित देखभाल से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। कार्यक्रम का आयोजन चेयरमैन श्री सुरेश सिंह भदौरिया, वाइस चेयरमैन श्री मयंक राज सिंह भदौरिया तथा इंडेक्स नर्सिंग कॉलेज के डायरेक्टर श्री दीपक मिश्रा के मार्गदर्शन एवं सहयोग से किया गया। अंत में श्रीमती संजना नायडू ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।