गायत्री महायज्ञ' और जनजागरण अभियान: बुरहानपुर में बाल पुरोहितों ने रचे नए कीर्तिमान

गायत्री महायज्ञ' और जनजागरण अभियान: बुरहानपुर में बाल पुरोहितों ने रचे नए कीर्तिमान

गायत्री महायज्ञ' और जनजागरण अभियान: बुरहानपुर में बाल पुरोहितों ने रचे नए कीर्तिमान


​विशेष रिपोर्ट / बुरहानपुर:
भारतीय ऋषि परंपरा, वैदिक संस्कृति और नैतिक मूल्यों के पुनर्जागरण के लिए गायत्री परिवार द्वारा चलाए जा रहे 9 दिवसीय विराट आयोजन ने पूरे अंचल में अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक परिवर्तन की बहार ला दी है। जहां एक ओर गायत्री शक्तिपीठ पर भव्य महायज्ञ के उपरांत गर्भवती महिलाओं के पुंसवन संस्कार और नौनिहालों के अन्नप्राशन संस्कार श्रद्धापूर्वक संपन्न कराए गए, वहीं दूसरी ओर श्रीराम गुरुकुल आश्रम / रचनात्मक केंद्र गोलोकधाम (खड़कोद) के तेजस्वी बाल पुरोहितों और कार्यकर्ताओं द्वारा ग्रामीण अंचलों में इतिहास रचा जा रहा है।
​वर्तमान में चल रहे इस विराट अनुष्ठान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जनजागरण अभियान और गायत्री महायज्ञ' की धूम मची हुई है।
​​100 से अधिक बाल पुरोहितों और 72 दलों का गठन: रचनात्मक केंद्र गोलोक धाम से 100 से अधिक बाल पुरोहितों की सक्रिय सहभागिता में 72 विशेष दलों का गठन किया गया है, जो जिले के 500 से अधिक गांवों में सघन परिव्राज्या (भ्रमण) कर रहे हैं।
​  श्रीराम गुरुकुल आश्रम खड़कोद के बाल पुरोहितों ने अपनी असाधारण निष्ठा और दक्षता का परिचय देते हुए एक ही दिन में 75 घरों में एक साथ हवन संपन्न करवाकर अनूठा रिकॉर्ड बनाया है।
​प्रमुख गाँवों में 9 दिवसीय प्रवास: यह अभियान नांदखेड़ा, खापरखेड़ा, सायर, खकनार, जमनिया, ताजनपुर सहित क्षेत्र के तमाम गांवों में विस्तार पा रहा है, जहाँ एक साथ 24 घरों में एक साथ यज्ञ जैसी श्रृंखलाएं संचालित हो रही हैं।
​  परिव्राज्या के दौरान प्रत्येक दल प्रतिदिन लगभग 3 गांवों में पहुंचकर भारतीय संस्कृति के पांच प्रमुख आधारों—गौ, गंगा, गीता, गायत्री और गुरु के महत्व को घर-घर पहुँचा रहा है।
​    धर्म के साथ-साथ ग्रामीणों को नशा मुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, संस्कार निर्माण और सामाजिक जागरूकता का संकल्प भी दिलाया जा रहा है।
​वर्षभर चलने वाले संस्कार: गायत्री परिवार पूरे वर्ष भर में सैकड़ों यज्ञोपवीत, विवाह, पुंसवन, अन्नप्राशन, विद्यारंभ और अन्य वैदिक संस्कार सेवा भाव से संपन्न कराता है।
​बाल पुरोहितों का सामर्थ्य और 'घर-घर गायत्री '
​कम उम्र के बाल पुरोहितों द्वारा जिस शुद्ध उच्चारण, अनुशासन और वैदिक कर्मकांड के साथ यज्ञ कराए जा रहे हैं, उन्हें देखकर ग्रामीणजन पूरी तरह अभिभूत हैं। जब इन बाल टोलियों का गांवों में प्रवेश होता है, तो पूरा वातावरण 'गायत्री मंत्र' और 'शिव शक्ति' के जयघोष से गूंज उठता है। ग्रामीणों का कहना है कि बाल पुरोहितों के माध्यम से एक ही समय में दर्जनों घरों में यज्ञाग्नि प्रज्वलित होना इस बात का प्रमाण है कि हमारी युवा पीढ़ी प्राचीन संस्कृति को सहेजने और आगे बढ़ाने में पूरी तरह सक्षम है।
​"संस्कारों और यज्ञ के माध्यम से ही एक आदर्श और नैतिक समाज का निर्माण संभव है। शक्तिपीठ पर संस्कार संपन्न कराने से लेकर, खड़कोद के बाल पुरोहितों द्वारा ग्रामीण प्रवास में एक ही दिन में दर्जनों घरों में हवन करवाना और 500+ गांवों में जनजागरण करना—यह सब गायत्री परिवार के ऋषि परंपरा को घर-घर पहुँचाने के संकल्प को चरितार्थ करता है।"
​ ​शक्तिपीठ के आयोजनों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे 9 दिवसीय प्रवास और गायत्री महायज्ञ' ने बुरहानपुर जिले के कोने-कोने में सकारात्मकता का संचार कर दिया है। इस महाअभियान से न केवल पर्यावरण का शोधन हो रहा है, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों और आत्मीयता का भाव भी प्रबल हो रहा है।