बुरहानपुर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की ऑफिस की कुर्सी मिली खाली डॉक्टर आर के वर्मा नदारद नजर आए
बुरहानपुर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की ऑफिस की कुर्सी मिली खाली डॉक्टर आर के वर्मा नदारद नजर आए
क्या है पूरा मामला
डॉ आर के वर्मा का
बुरहानपुर: जिला स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर बड़ा सवालिया निशान लग खड़ा हुआ है। आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने की जिम्मेदारी जिस मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर डॉ आर के वर्मा(CMHO) के कंधों पर है, वही अपने दफ्तर से नदारद हैं। साहिब की कुर्सी खाली है, केबिन वीरान है और पूरा अमला यह छिपाने में जुटा है कि आखिर "श्रीमान" गए तो गए कहां?
यह पूरा वाकया तब बेनकाब हुआ जब इंडिया न्यूज़ के जिला संवाददाता एक गंभीर जनसमस्या और स्वास्थ्य महकमे से जुड़ी खबर के संबंध में जानकारी लेने सीधे सीएमएचओ कार्यालय पहुंचे। संवाददाता जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आर के वर्मा के केबिन के बाहर पहुंचे तो वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। अंदर झांककर देखा तो साहिब की कुर्सी खाली पड़ी थी, साहब गायब थे।
झूठ का मायाजाल और सहमा हुआ स्टाफ
मामले की हकीकत जानने के लिए जब दफ्तर में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई, तो वहां से जो जवाब मिले, उन्होंने महकमे की पोल खोलकर रख दी। स्टाफ का हर कर्मचारी अलग ही राग आलाप रहा था:
किसी कर्मचारी ने दबी जुबान में कहा— "साहब बाहर किसी विजिट पर निकले हैं।"
दूसरे ने कहा— "साहब तो किसी शासकीय काम से भोपाल गए हैं।"
वहीं तीसरे ने मामला टालते हुए कह दिया— "साहब तो आज छुट्टी पर हैं।"
एक ही दफ्तर और तीन अलग-अलग दावे! आखिर ऐसा क्या राज़ है जिसे छिपाने के लिए पूरा स्टाफ एक सुर में सच बोलने से घबरा रहा है? कर्मचारियों के चेहरे पर तैरती घबराहट और बयानों का यह विरोधाभास साफ इशारा कर रहा है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।
फोन घनघनाया, पर नहीं मिला जवाब
जब दफ्तर के कर्मचारियों के बयानों में भारी गड़बड़ी नजर आई, तो इंडियन न्यूज़अड्डा संवाददाता ने सच का पता लगाने के लिए सीधे सीएमएचओ बुरहानपुर के व्यक्तिगत मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन हद तो तब हो गई जब साहिब ने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। कई बार घंटी बजने के बाद भी फोन रिसीव नहीं हुआ।
क्या है इस 'गड़बड़झाले' के पीछे की सच्चाई?
अधिकारियों का दफ्तर से बिना किसी पूर्व सूचना या स्पष्ट विवरण के गायब रहना और स्टाफ का विरोधाभासी बयान देना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
क्या वाकई बिना छुट्टी के गायब हैं साहिब?
अगर किसी आधिकारिक दौरे या बैठक में हैं, तो दफ्तर के रजिस्टर या स्टाफ के पास इसकी सही जानकारी क्यों नहीं है?
स्टाफ सही जानकारी देने से क्यों कतरा रहा है? क्या किसी बड़े प्रशासनिक झोल को छिपाने की कोशिश की जा रही है?
जिले के सबसे जिम्मेदार स्वास्थ्य अधिकारी का मीडिया के फोन से दूरी बनाना किस बात का डर दर्शाता है?
जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की ढीली कमान और प्रशासनिक लापरवाही का सीधा खामियाजा बुरहानपुर की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और भोपाल में बैठे उच्च अधिकारी इस 'गायब साहिब' और उनके घबराए हुए अमले पर क्या सख्त संज्ञान लेते हैं!


